किसी जंगल में चंडरव नामक एक सियार रहता था। वह एक बार भूख से व्याकुल होकर खाने की खोज में किसी नगर में जा पहुंचा। नगर में रहने वाले कुत्ते उसे देखकर भौंकते हुए उसके पीछे दौड़े। उनसे अपनी जान बचाने के लिए सियार भाग कर पास ही एक धोबी के घर में घुस गया। वहाँ नील के पानी से भरा एक नांद तैयार रखा था। कुत्तों से डरा हुआ सियार हड़बड़ी में उस नांद में गिर गया। जब वह उस नांद ने निकला तो नीले रंग को हो जाने के कारण कुत्तों ने उसे नहीं पहचाना और उसके पीछे नहीं भागे। नीले रंग से रंगा हुआ सियार धीरे-धीरे जंगल पहुंचा।
जंगल के सभी जानवर नीले रंग के सियार को देखकर अचंभित हो गए और डर के कारण इधर-उधर भागने लगे। यहाँ तक कि बड़े-बड़े हाथी और भयानक सिंह भी इस नए जानवर से भयभीत थे। उनको डरा हुआ देखकर चंडरव बोला, “हे जंगल के जीवों! तुम मुझे देखकर भाग क्यों रहे हो? मुझसे डरो मत। ब्रह्मदेव ने आज ही मेरा निर्माण किया है और मुझे जंगल के सभी जीवों का राजा बनाकर यहाँ भेजा है। मेरा नाम ककुद्द्रुम है और स्वयं ब्रह्मदेव की आज्ञा से मैं तुम सब का राजा हूँ।“
उसकी बात सुनकर सभी जानवरों ने कहा, “स्वामी! आज्ञा दीजिये।“
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