ब्रह्मदेव ने एक बार एक महायज्ञ का आयोजन किया जिसमें सभी देवता और ऋषि उपस्थित हुए। जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ मंडप में प्रवेश किया तो ब्रह्मदेव और शिवजी के अलावा अन्य सभी देवताओं ने अपने आसनों से उठकर उनका सम्मान किया।
ब्रह्मदेव तो दक्ष के पिता थे, लेकिन शिवजी के आसन से न उठने को दक्ष ने अपना अपमान समझा और इसी अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने दक्ष यज्ञ का आयोजन किया जिसमें सभी देवताओं और ऋषियों को आमंत्रित किया परन्तु शिवजी और सती को नहीं बुलाया।
Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices


