इस एपिसोड के माध्यम से विधि, अनिशा, हिमांशी और सौरव ने साझा की है कहानी, सोनू की और समाज में उसके lgbtq+ कम्यूनिटी से होने पर स्वीकृति मिलने के लिए संघर्ष की। यह कहानी एक संदेश है कि प्रेम की कोई भाषा नहीं होती। यह सिर्फ शरीर का मिलन नहीं अपितु आत्मा, हृदय और विचारों का मेल है जिसको समाज में पूर्ण रूप से मान्यता मिलनी चाहिए।
इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि किसी का लिंग क्या है, बल्कि फर्क पड़ता है उसके विचारों, मानसिकता और व्यवहार से।
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