यह कहानी उन दर्दनाक परिस्थितियों को उजागर करती है, जिनमें पूरे परिवार दहेज की वजह से उजड़ जाते हैं। लाडो, एक मासूम और खुशहाल लड़की, इस कहानी की नायिका है, जिसके सपने दहेज की काली छाया से धुँधले हो जाते हैं। लाडो का परिवार, जो कि एक छोटे से गाँव में रहता है, अपनी बेटी की शादी के लिए बड़ी उम्मीदों के साथ तैयारियाँ करता है। लेकिन जैसे-जैसे शादी की तारीख नज़दीक आती है, दहेज की माँगें उनके जीवन पर काले बादल की तरह मँडराने लगती हैं। इस कहानी में देवराज कुमार, लाल बहादुर मौसम , तृप्ति सिंह, तेजस , प्रकृति प्रिया, और आर्यन कुमार साथ मिलकर एक प्रश्न उठाते हैं - क्या हम इस अन्याय को सहते रहेंगें, या इसके खिलाफ़ आवाज़ उठाएंगें?
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