वैवस्वत मनु और महारानी श्रद्धा दीर्घ काल तक निःसंतान रहे। पुत्रहीनता के कष्ट को कम करने हेतु महर्षि वशिष्ठ के परामर्श अनुसार, मनु और श्रद्धा ने भगवान मित्र और वरुण की उपासना करने का निर्णय लिया। वशिष्ठ ऋषि के संरक्षण में ही मनु ने पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन करवाया। भगवान मित्र-वरुण से मनु ने अपने वंश को आगे चलाने हेतु एक पुत्र की कामना की थी, परंतु विधि का विधान कुछ और ही था।
Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices


