केस ये था कि 1948 में हैदराबाद के निज़ाम की तरफ से क़रीब 1 मिलियन पाउंड ब्रिटेन में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर रहीम तुल्ला को ट्रांसफर की गई थी. उस रक़म की क़ीमत अब 35 मिलियन पाउंड्स यानी करीब 306 करोड़ रुपए हो गई है. पिछले 70 सालों से निज़ाम के पोते मुकर्रम जाह, जिन्हें भारत का समर्थन हासिल था, वो इस कोशिश में लगे थे कि ये पैसा पाकिस्तान नहीं, उनको मिलना चाहिए. जी हाँ, इनहेरिटेंस की इस जंग में पाकिस्तान इस पैसे को क्लेम करने में जुटा था.
लेकिन इस खजाने पर किसी और की भी नजर थी. इस खजाने के पीछे की कहानी क्या है? सुनिए दा बिग स्टोरी पॉडकास्ट में.
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