Price of being good
Woice with Warikoo PodcastJune 13, 202400:07:25

Price of being good

In this episode Ankur shares a valuable lesson from his first job at a corporate training company. Tasked with creating a sales training program for FMCG field staff, he creatively used PowerPoint animations to make an engaging movie starring a character named Ramesh, inspired by Shah Rukh Khan. Despite the success of the training, he found himself overwhelmed with work and sought advice from his manager. This led to a lifelong lesson about the price of being good at one's job. Tune in every Thursday on your favorite podcast platform for more insightful episodes. 00:00 Introduction to Woice With Warikoo 00:29 Ankur's First Job Experience 01:12 Creating a Unique Training Program 03:35 The Success and Consequences 04:29 Life-Changing Advice from a Manager 06:19 Final Thoughts and Podcast Promotion

In this episode Ankur shares a valuable lesson from his first job at a corporate training company. Tasked with creating a sales training program for FMCG field staff, he creatively used PowerPoint animations to make an engaging movie starring a character named Ramesh, inspired by Shah Rukh Khan. Despite the success of the training, he found himself overwhelmed with work and sought advice from his manager. This led to a lifelong lesson about the price of being good at one's job. Tune in every Thursday on your favorite podcast platform for more insightful episodes.

00:00 Introduction to Woice With Warikoo

00:29 Ankur's First Job Experience

01:12 Creating a Unique Training Program

03:35 The Success and Consequences

04:29 Life-Changing Advice from a Manager

06:19 Final Thoughts and Podcast Promotion

[00:00:03] यह है वौइस विद वारिकु, मेरे यानी अंकुर वारिकु के साथ इस हिंगलिश पौटकास सीरीज में मैं बहुत सारी चिज़े कवर करता हूं करियर, रिलेजिन्शिप्स, परस्थनाल फिनाथ, सक्सस, फेलियर और फ्रांक्लिक, कुछ भी और जो समह जमहन में आता है, हर हफते तरस्डे को आपके फिवरिट पौटकास प्लाट्फॉम पर एक नहाई एपिसोट वौइस विद वारिकु और इस वह में परस्ट जोब था, एक कौप्रिट ट्रेनिंग कम्पनी थी, उसके रीसर्च औं डड़ेलप्मेंट टीम में, और यहां प्रोजेक्ट आप आप लिए आपने प्राजेता है, जहां फ्रेंक्लिक्लींग मुझे कोई आइड़ेया भी नहीं था, श्रूंग वहन से करना हैं, एक टेंड़ी नहीं आपको और सेल्स ट्रेनिंग प्रोग्रम के लिए एक नहीं, और विएस्ट एक सिर्फिल्ट स्टाफ के लिए याना है, वो तीं हैं जो तूठपेश, साबून ये साड़ी जिज़ें भेशते हैं, फास्ट मूविंग कंजूम और गुड़। और उनके तो फिल्ट अथा हैं, वो जाओगार आप प्राइजावां तो जाओगार तो आपको इस कम्माल करीदना चाहिएं. तो वो इपनारहादी के आपको बेशाएंग प्रोग्रम पर देखा. और वर्भारा नहीं जाओगाएँ तो तो से प्रेचना यहाँ बाटर्फासं है, एक भीट कहाँ था. तो उनकी बीट प्लानिंग होती है, सुबह यहां जाएंगे, फिर इस दुकान पे फिर इस दुकान पे तो पूरा रोडमाब बनाते हैं, क्या बोलेंगे, कैसे बोलेंगे, आप वो दोस. और वो बाद करता हैं, वो विवावाश्ट के लिए प्रोग्राम करता हैं. अप वो समय तक यो ट्रेनिंग प्रोग्राम्स हैं, वे इस तो बी वेरी बॉरिंग हैं. पाव पॉइंट प्रेसंटेशन्द, एक्सर्साइस्ज्जें हैं, वो चोड़ चोड़े फॉन्ट में भाओ साधी जिज़े लिखी हूई हैं. और वो बादा रहा है, यह प्रेसंट स्टाफ है, यह रोज जाते हैं, इनको पढ़ना पसं नहीं है, इनको एक लास्रूम में बेटखर कोई ग्यान मिल रहा है, उससे कुछ सीखने को नहीं मिलेगा, कुछ समझ नहीं आयेगा. तो वाई बादा है, आपकी अपने प्रेसंट स्टाफ के लिए अगर कोई प्रेसंट प्रोग्राम बनाना है, इस विड़ाजा के नहीं रहा है. तो वे बादा हुआ, में एक विवी बनाँगा, और विवी में एक हीरो होगा, शारुखान. उसका नाम था रमेश, रमेश है इस कमंपनी का सेल्ज वाला इंसान, सबसे बैस्ट पर्फॉमिंग सेल्स परसन. और रमेश की जिनदिगी में क्या होता है, यह वोसे ओज़ाना के विवियाँ है. तो मैंने तिखाया कि रमेश कैसे दिन शुरू होने की पिछली रात को सोने से बहले अपने अगले दिन के अब्जेक्टिवस लिखता है फिर उसूबी उटता है, फिर उपना दिन प्लान करता है, फिर वो क्या-क्या चीज़े दुकानदारों को बोलता है, तो एक प्रार्पॉनट वे बनाईती हूँ, ऐस मुद्गी म हाँ पर रहा है, लिए बानानी नहीं निसार है, बीसाल प्रार्पॉन्ट पे मणाईत हूँ, यह 2004 की बात है, 20 साल पहले की बात हैं. यह movie मैंने Power Point पर बढ़ाई थी. I don't know if you have ever used Power Point or not, पर Power Point में animations होते हैं, and you can use these animations to create this movie. So I used to, I remember work nearly 16 hours a day, एक हफते तक मैंने पूरा काम किया, and this movie को बारीखी से एक-एक जीस चोड कर बढ़ाइा, यह एक प्रषंसा होई, अबस्श्टिलूटली अमेसिंग प्रषंसा होई, बहुत महनत का काम था, बहुत मजे का काम था, और मैं आप तर्वाइशाइन का यह उड़ाइना है, और आप प्रषंसा होई, जब यह training प्रग्राम लाँच होआ और यह movie दिखाई गई, तो मैं नहीं बोलना नहीं हाता था, तो मैं नहीं हाम बोलना शुरूग घऴिया, और आप इस्तिन्टली यह वे वर्डिन्ड विवाल्ग है, मैं देख सकता था कि मैं जो टीम मेंबर्ज हैं वो चिल चूल कर रहे हैं, अपने मजे से लूँज ब्रेक ले रहे हैं, सूट्टा चाहे, सूट्टा ब्रेक हो रहा है ये वगरा, और मैं यहां काम के बोझ के थले डसा हूँ हां, और मुझे ऐस्ते लगता था कि बांकी लोगों का काम मुझे क्यों मिल रहा है, सुट्टा ब्रेक नहीं हा उन् प्भ्रोगा प्रोगा प्रष्ती बिर जारिया, क्युंके प्राविर य्राविजा तो ये तो रहे है था। सब shame बाग़ा आप ईमें लिए आप भाग़ा था। तो मैं उपसा गुछा बग़ा था, पो रहा है बगरा बगरा बगरा

[00:04:30] And I was done and उसके बाद my manager said something which has stayed with me for the rest of my life. She said, अंकुर, Good people pay a far higher price for being good than bad people pay for being bad. अच्छे लोग नह, अच्छे होने की बज़े से भौट साथा बढ़ी किमच चुकाते हैं, उस से ज़ादा जितना बौरा लोग बौरे होने किलिए जुआते हैं. And I was like, क्या, समझ नहीं आया, फिर से समझाइंगे? And then she was like, दुन्या नह selfish है, दुन्यां को अपना काम निकलबान हैं, तो जब उसे वो लोग मिलते हैं न, जो अपने काम में अच्छे हैं, जो काम सही से जो जब बोलते हैं कि इस वक तक काम हो जाया कर लें और आज्च्ट्री वाके में डिलिवर कर देते हैं, तो दुन्या बोलती हैं, यार ये बन्डा सही हैं, इस बन्डें के साथ में को रिसक नहीं लेना, और दुन्या उस इस इंसान को जाति हैं, उसके जब प्राकाम देने के लिए त्यार हो जाती हैं. इत्ना काम की वो बूरे लोगों से काम निकाल के इन अच्छे लोगों को देना शुरूख रहते हैं. तो आप इस बाग लिए नहीं नहीं या इसके अपने प्राजाद पर देते हैं,

[00:06:10] तुमारी मर्जी तुम क्या जूस करते हूं? और इस जेंज तो प्राजाद पर विश्ट नहीं रहे हैं. मैं इस कानी से ये नहीं पताना चाता हूं कि अगर आप एक एसे इंवार्मेट में हैं जहां आपके पास सांस लेने की फुरसत नहीं हैं, आपको हमेशा इक टॉकसिक इंवार्मेन्ट में रखा जाता है, आपको 16, 18, 20 गणट पे काम कराहे जाता है, आपकी इज्ड़त नहीं होती है, तो वो सही है, यह वो इसले हो रहा है क्योंकि आप काम में भहुत अच्छे हैं. अब इसकी पड़ने है आपको चाथिए प्रैस्टी से वही साथपार्ट भी देखुएं तो ईस्माताद नहीं है, वो समस вниз एक सब्त्री काम का काम रहे हैं, सब आप आपको आपको इसलिए देखा रहे हैं, क्यो कि वारोसा है आप वो काम कर सकते हैं, And that reminder is a very important one. All the best!