In this episode Ankur discusses five beliefs he held as a child that he has since realized are not true. He covers topics such as the finite nature of money, the infallibility of parents, definitions of success, the correlation between academic performance and life success, and the quantity of friends contributing to happiness. He provides insights into how these misconceptions were formed and encourages listeners to question and discover their own truths. The episode aims to provoke thought and offer new perspectives on common societal beliefs.
00:00 Welcome to Woice with Warikoo: An Introduction
00:18 Childhood Beliefs vs. Reality: A Personal Journey
00:49 The Myth of Finite Money and Wealth Creation
02:26 Rethinking Parental Perfection
03:27 Redefining Success: Beyond Rich and Famous
04:39 Academic Performance vs. Life Success
05:35 The True Value of Friendship
06:19 Reflecting on Personal Growth and Insights
06:28 Closing Thoughts and Invitation to Subscribe
[00:00:03] Hey everyone, यह है है वोईस विद वारिकू मेरे यानी अंकुर वारिकू के साथ इस हिंगलिष पोट्कास सीरीज में में बहुज शाडी चीजे कवर करता हों करीर, रेलेट्चनचिप, परस्टन्र फिनन्च, सक्सेस, फेलिर और ख़ाईगर तो जब आप ज़ाईगर वोच्छिष कर लागा था, यह तो अजी कोन सीजी जीस ती, जो अपको बच्छमन में विष्वास था सच है, इक नब जागे पता जलाए जोड थी. तो मैं इसके बारे में सोचने बहता, मैं एक जीस के बारे में निसोच बारे में, मैं वोड़ पाजची से मिली. तो इसके बारे में शेर करन लागा जाएगर इसले नहीं कि, मुझे लगता है कि वो सच है यह जोड है, कि यह तो तो मैं वो सच है, तो और बज्गा पुष्टिए बारे में, अपने उपने बारे में, वो भच्छमन रब लगता था बच्छ में, थो बजगा परदा सच है, जोड है. मुझे विश्वास था बच्छमन में, की पैसा जोड है, उड़र अगर कोई नभीर बनता है, तो उपने बनता है, कि वो ख़ी और गरीभ और है, मुझे विश्वास था की पैसा जोड है, उटरा है दोन्या में, अपने बच्छमन बबटता रब रब यह तो गर कोई नभीर बनता है, तो उगर कोई नभीर बनता है, वो गरीमो से चींके ही नभीर बनता है, और यह विश्वास इतना अंदर गुसा होँवा आता, कि मुझे पैसे से तो नफ्रत थी, पेके मुझे नभीरो से बी नफ्रत थी, कुई हम गरीभ ते, तो हमें लखता ता, कि हम इसलगरीभे किस्छी और ने हम से वो पैसे चींके, हम से बो वववाशुन ती चींके, फैसे कमाल यह, आज बदा चला है की, नहीं, पैसा लेमिटेद नहीं है, पैसा बनाय जा सकता है, वलीव आट कर कर के, बैसा बनाय जा सकता है, अपनी लेटिस बुक में के अपिक मनी मैं मैं नहीं एक इख्झम्पल दिया था, की ते वेगी का पाकेट जोए, दस भीस रुपे कोवता है, और अगर अप उस मैगी की पाकेट को खोलेंगे, उसको बनायेंगे, तो बआईदेबे डो में नहीं बनेगी, ये एक अगर जोड़े बच्फन का जो अब बताचला है जोड़ता, फिर उस में कुछ सबजीया नालेंगे, मकन अखर नालेंगे, तोड़ा मुद केचव नालेंगे, तो वही बकी वोई मैगी, अब आप वचास रोपेगे पिकेखे, और अगर लदाग के पहाडो में है, तो सो रोपेगे. अभी ये पैसा काई आजा आजा? ती तो वो दसमी सुब़ेगे मैगी, उस में आपने पाश रोपेगे जीज़े आद कर दीगी, यह वर्स हम माबाव को माबाब पहले मानते है, अर अद लड़ अद में, लेकिज़े जेशे द़़द़र होते है, तो पड़ा चलता है, यह आमाने माबाव तो पहले इन्साण है, एक यासा अचान जो गलतिया कर सकता है, यासा अचान, जिसके उपिन्यंट्स गलत हो सकते है, यसा अईन्सान जो आपने बायसेस के चलते शाएत गलत काम कर सकता है. जब यह पता चलता है तो एक तरीके से वो इनोसिन्स चली जाती है. वो इनोसिन्स जो यह यह यकीन करती ती की माबाब बवान का रोप है. ती से जीस, की सफलता यह सक्सेस जोवन उसका मतलव है, आमीर होना और फेमस होना. अमीर भी होना और फेमस होना. आज मुझे बता है की अमीर होना तो बड़ी बात है. अगर मुझे अप पूछेंगे तो सब से बेस्ट कोमपनेश्छन होगा कि आमीर है, लिकन आपको कोई जानता नहीं है. और आसे बहुत लोगोते है. बड़े बड़े शेडरो में जाएंगे चोटे शेडरो में भी जाएंगे तो आसे इतने साझे लोगोंगे, जो दोस, भीस, करोड की नेटवोट लेके गूम्रे होगे, और आपको अईडिया ही लही होगा कि इनके पास यतना पैसा है. कोई उनको जानता भी नहीं है. And that is one way. मुझे इस से दाड़ यह पराचला है कि, सपलता यह सक्सेस ना पैसे के बारे में है, ना फेमसोने के बारे में है. It is about कि आब कितने संथुष्त है. अप अपनी जिन्टिगी में कितने कुष है. वक अहुतगी मैं कि उआप जी मैं ना को और रेतो है. यह विरद लाई के बिटुप में वहाँ कि बीना उनको ऱेता। And in that life... तो, मैं और लेएं के रखा तुवर नहीं से प्लुप लगने है. यह विर्क और श्छाता है। मेरे परीमार में बौई यह साहते है, मेरे नोस में बौई नहीं साहते है। मैं, मुछी सादिगी में और उच नहींचाही. चोथी चीसू. ॐ multi-straung, कि अगर तुम बाड हे में चचनए हूना, तुम सादिगी में छ़ने है बन साइत! ये मेरा याकीं ताग! इतना बड़ा यकीन ता की जो निटले लोग पुड़ा है में अच्छे नहीं है ना? उजन्दिगी में कभी कुछ करही नहीं बायेंगे आज आस वता है कि में कितना गलाता कि वो एकजाम, वो रेपोट काएड, वो नमबर, वो रेंकिं वो ख़ा बेहुदा अस्वैस्मैंट है, किसी की जिड़िगीगा आज अगर आप जिड़िगी में कुछ हैं वो इसले हैं क्यो की आप एक अच्छे इन्चान है आप इन्चानो को इसजथ से शमान से पेशाते हैं आप जो जानते हैं, उसको यूज करते हैं, लोगो के लिए, खुत के लिए बलीट्ग रेड़े रेड़े हैं यही अच्छा सवक्स हैं, अप उस में मैद्स में कितने आए, कमिस्टरी में कितने आए, हिन्दी में कितने आए, क्या फरण परता हैं? आए बाजुद कि नोने कभी बड़ाय में अच्छा बी नाखरें? यह बच्छफन में भुज लगताता है कि, जितने जाड़ जिन्दिगी में दूस्तना, उतने ही जाड़ा हम जिन्दिगी में खूशूं. आज तो एक दमी अपज़ेट है, मैं इतना खूशूं कि मेरे इतने काम दूस्तन, मुझे जिन्दिगी में किसे की जरुद नहीं कि, बहुत काम दूस्तन, यप अच्छ मुझे लगता है कि मैं कुद काही सबसे बैस दूस्तन, और मैं कुद के साथ है, बहुत कुछी खूशी वबता सकता है, मैं अगर आपको कलपनागर एक धुस्से अद बनादूं। मैं अपने आपको कलपनागर के एक जुझ्टी लगता लगता तुफ़ी करना चाँंगा, अपने आपको कल्पना गरके के एक तुस्रा अजन बनादूं और में अपने अपने अपने पुष्छों की आर अगर एस अजन समें मिलुझा के आमें सेombl यसे दुस्ती करना चाँँँँँँ मैंगे आंसर है वह आंदट परश्च्ट मुझे मेरा रुब बहुत मसंद है मैं आपना फेवरेटूँ और मुझे आसे लकता कि मुझे इसके चलते बाही लोगु की जरूथ मैंगे मुझे कोई आसी खामी आसी कमी नहीं में सुभ सोती जिन्धिगी मैं जो कोई और मेंरे ले बर सकते है तो ये बाई चीज़े जो मुझे लकता आता बच्छमन में सच है लेकिन आप जागे बाटा चलूँ जुड आपके ले वो कोन सी जिस आवके



