Marz: A Word for Guilt, Longing, Pain and More
UrdunamaAugust 22, 202600:12:18

Marz: A Word for Guilt, Longing, Pain and More

In Urdu poetry, “marz” does not always mean an illness. It can be the weight of guilt, a restless heart, someone else’s manipulation, or even the problems affecting an entire society. In this episode of Urdunama, we look at verses by Ameer Minai, Rahat Indori, Akbar Allahabadi and Hali to explore how each poet gives “marz” a different meaning, and how the idea of a cure changes with it. Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

In Urdu poetry, “marz” does not always mean an illness. It can be the weight of guilt, a restless heart, someone else’s manipulation, or even the problems affecting an entire society. In this episode of Urdunama, we look at verses by Ameer Minai, Rahat Indori, Akbar Allahabadi and Hali to explore how each poet gives “marz” a different meaning, and how the idea of a cure changes with it.

Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

[00:00:06] Productivity बहुती बढ़ी बड़ी चीज है लेकिन वो प्रोड़क्टिविटी जब आपको गलत वक्त पे आके आपकी आखे खोलती है वो बड़ी खतरनाक होती है कॉई काम है जो आपके उपर पड़ा हुआ है Серएअध़ बीमारी हैं वो प्रूर्चण मसाला नहीं लगा है और पर्याम आपको पिसना होती है।

[00:00:29] Moramain, नाbamain, इत मुद्धाम, दॉर्चारम, च Module, circuit बचारा मेरी, प्रूर्य के बीमारी है, पूर्छ करना वारे है. means disease or something that is not good for you. The Quinn पर शुरू हो गया है उर्दुनामा, आज का लफ्स है मर्स,

[00:00:59] मानि डिजीज इलनेस, बगैर वक्त बरबाद की है, काम पर ही आएंगे, इधर उधर की कोई बात नहीं करेंगे, और शुरू आद करते हैं, अमीर मिनाई के इस शेर के साथ, जब वो लिखते हैं के, निगाह हे लुट्फ है लाजम, के दूर हो ये मर्स, दबा रही है सियाही, मुझे गुनाहों की. इस शेर में शायर पहले remedy की बात करता है, फिर अपना मर्स बताता है,

[00:01:27] यानि पहले वो कह रहा है कि मुझे किस चीज की जरूरत है, और फिर वो बताता है कि उस चीज की इसलिए जरूरत है, क्योंकी मुझे ऐसा हो रहा है. यानि पहले वो prescription दिखा देता है कि भाई इस चीज़ की जरूरत है, मेरी दवाई है और ये इसलिए चाहिए क्योंकि ऐसे मेरे symptoms है ऐसा मुझे महसूस हो रहा है तो पहला मिसरा है कि निगाह लुट्फ है लाजिम के दूर हो ये मर्स यानि इस मर्स को दूर करने के लिए एक महरबान नजर की जरूरत है निगाह यानि नजर, glance

[00:01:56] और लुट्फ का मतलब होता है affection लुट्फ को हम अकसर pleasure या enjoyment के माइने में समझते हैं, استعمال करते हैं For example, अगर आपको कोई गाना पसंद है, आप recommend करना जाते हैं या फिर आप किसी को कहीं जाने की अगर recommendation देते हैं, तो आप ये कह सकते हैं

[00:02:24] In fact, real life example बता रही हैं, कि मैं बहुत time से कोशिश कर रही हैं अपने हस्बन के साथ गंपती फूले की drive लेने, Bombay से गंपती फूले का जो पुरा stretch, it's beautiful तो वहां मैं जाना चा रही थी, पर बारिश है इतनी तेज हो रही थी और वहां जाने का बिलकुँ बेस्ट टाइम है जब हलकी बारिश हो So you can say, I mean I can tell you, कि Bombay से गंपती फूले की drive बेहद हसीन है हलकी बारिशों में जाईए और लुथ लीजिए

[00:02:50] लेकिन अमीर मीनाई का ये जो शेर है कि निगाए लुथ है लाजिम के दूर हो ये मर्ज इसमें लुथ का affection, kindness के sense में इस्तिमाल किया गया है तो निगाए लुथ यानी वो नजर जिसमें महरबानी हो, compassion हो शायर कहता है कि जो मर्ज उसे है, उसे दूर करने के लिए एक ऐसी compassionate नजर की ही जरूरत है अब आते हैं मर्ज पे कि मर्ज है क्या उसका जवाब दूसरी लाइन में मिलता है

[00:03:18] कि दबा रही है सियाही मुझे गुनाहों की यानी मेरे गुनाहों की सियाही मुझे दबा रही है समझ आए तो ये imagery बहुत heavy है कैफियत है जो बयान कर रहा है शायर के गुनाहों की सियाही किस तरहां दबा सकती है ये अपने आप में बहुत ही ज्यादा तकलीफ दे मनजर है शायर यहां सिर्फ अपने गुनाहों को याद नहीं कर रहा उसे अपनी गलतियों का एहसास हो रहा है जो कुछ उसने किया है उसकी realization इतनी heavy हो गई है

[00:03:44] कि गुनाहों के बोच तले अब वो खुद को दबा हुआ महसूस कर रहा है और इसी एहसास को शायर सियाही के जरिये describe करता है जो सियाही word है वो use करके describe करता है darkness के जरिये तो सियाही यादि गुनाहों की एक dark heavy presence वो सिर्फ यह नहीं कह रहा है कि मैंने गलतियां की है वो कह रहा है कि हाँ भही मैंने गलतियां की है और उनके consequences इतने खराब हैं, negative हैं

[00:04:10] कि ये जो feeling है, ये बहुत ही dark feeling है, एक दम सियाही के जैसी यानि उसके गुनाओं का एहसास एक ऐसी कैफियत बन गया है उसके लिए जिसमें वो खुद को फंसा हुआ महसूस करता है और शायद इसी लिए वो इस पूरी कैफियत को मर्स कहता है he feels sick, he feels tired, exhausted, किसी बीमारी की तरह उसको ये realization महसूस होता है और बहुत ये मानदारी की बात है किस तरह की जो कैफियत है

[00:04:37] जब कोई इनसान इतने heavy regret या guilt से गुजर रहा होता है तो उस वक्त सबसे ज़्यादा जरूरी कोई एक ऐसा इनसान होता है जो judge ना करे जो वस आपके पास बैट जाए, आपकी बात सुने जिसके सामने आप अपना गुसा, रोना, भड़ा सब निकाल लें बहुती safely, safe is the word अमीर मिनाई का ये जो share है, इसमें अकेलेपन की बात है और ये अकेलापन directly नहीं कहा गया है अकेलेपन को बहुती explicitly बयान नहीं किया है

[00:05:06] उसके लिए कोई word भी use नहीं किया गया है कोई reference भी नहीं है लेकिन जो पूरी condition है share कि उसमें basically अकेलेपन का ही मर्ज है अब आगे आते हैं राहा तिंदौरी के share पर

[00:05:32] share है कि बिमार को मरस की दवा देनी चाहिए मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए तो पहले मिस्रे में शायर कह रहे हैं कि बिमार जो है वह उसको तो दवा मिलनी चाहिए लेकिन फिर दूसरी line आती है मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए अफकॉस यहां पीना से मुराद शराब है शायर बिलकुल सीधी बात करता है जिस तरह एक बिमार इंसान के लिए उसके मर्स की दवा जरूरी है

[00:05:59] वैसे ही मैं भी एक मर्स से गुजर रहा हूं और मुझे अपनी दवा मालूम है मैं पीना चाहता हूं तो मुझे पिला देनी चाहिए यानि जिस मर्स से शायर गुजर रहा है उसकी दवा शराब है शराब किन बिमारियों के लिए इस्तेमाल होती है किसी भी बिमारी के लिए नहीं होती है लेकिन हाँ जो लोग बहुती तकलीफ में होते हैं वो कहते हम इसलिए पी रहे हैं ताके हमें तकलीफ का एहसास उतना ना हो माने उनको अपनी तकलीफ को नम करने के लिए कुछ चाहिए कि उसकी जो टीस है

[00:06:29] वो उतनी ज्यादा चुपती हुई महसूस ना हो प्रॉबबली इस दा लॉजिक बिहाइंड सेइंग के भई मुझे पीनी है पिला देनी चाहिए तो शायर के नजर में पीने से बहतर कोई और इलाज नहीं है लेकिन यहाँ एक और इंट्रिस्टिंग चीज है अगर हम इसे लिटरली मेडिकल सेंस में देखें तो भाई पेशन्ट अपनी दवा खुद प्रिस्क्राइब करता तो है नहीं डॉक्टर के पास जाता है डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन देता है

[00:06:58] पेशन्ट तो बस बताएगा कि उसकी तकलीफ क्या है लेकिन शायर ने यहां पे खुद ही अपना इलाज तै कर लिया है वो खुद ही पेशन्ट है और अपनी दवा भी खुद ही बता रहा है कि मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए I'm willing to take the prescription and in my view, I think शराब is the only solution, is the only medicine and इसी exaggeration से वो सामने वाले को यह महसूस करवाना चाहता है कि मैं वाकई बहुत बीमार हूं

[00:07:25] इतना हूं कि मैं अपनी खौःश और इलाज के बीच का फर्ख भी नहीं बता पा रहा हूं मेरे लिए इस वक्त शराब कोई लग्जुरी नहीं है दवाई है So it's a cry for help बीमार को मरस की दवा देनी चाहिए मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए अब आते हैं अकबर अलावादी के शेर पर ताना है यह बाइदोवे

[00:07:51] ये तर्ज एहसान करने का तुम ही को जेब देता है तर्ज का मतलब होता है तरीका या मेथट और जेब देना यानि किसी चीज़ का किसी को सूट करना शोभा देना ये तर्ज एहसान करने का तुम ही को जेब देता है यानि हैसान करने का ये जो तरीका है जो मैथट तुमने अपना रखा है बस तुम ही को सूट करता है भई

[00:08:19] फिर दूसरे मिसरे में शायर बताता है कि आंकर अहसान करने का यह तरीका थो ये है, मुझाहीं प्रशाड़ों और फिर उसी को दवय दे कर अपना अहसान जताओ, ग्रेट बन जाओ उनक्समें कि पहले परिशान करते हैं, सिचोइशन खराब करते हैं, आपकी

[00:08:46] ऐसी जगा तक ले जाते हैं जहां आप खुद उनके पास help के लिए जाएं और फिर आपकी मदद करके खुद को आपका saviour बना देते हैं So this is manipulation and Akbar Ilhabadi is calling it out कि मर्ज भी तुम्हारा दिया है, दवा भी तुम्हारी है और एहसान भी तुम्हारा है And this is a very dangerous thing कोई बार-बार वही problem create करे, जिसका solution बार-बार वहीं से उन्हीं के पास से निकल के आता है तो वो मदद नहीं है, वो dependency का create करना है

[00:09:15] ये तर्ज अहसान करने का तुम्ही को जेब देता है, मरद में मुपतला करके मरीजों को दवा देना अब podcast का favorite part है, जिसमें मैं हाली, अलताफ हुसैन हाली की नजम, हुब्बे वतन का एक share आपको समझाओंगी पढ़के बहुत तवील, बहुत लंबी ये नजम है, लेकिन ये जो share है, I thought कि आज podcast के लिए बिलकुल perfect है

[00:09:43] कि मुलक में जो मरज है आलमगीर, कौम पर उनकी फर्ज है तद्बीर, मरज फिर से physical illness के sense में नहीं है, बलके मुलक को लगी हुई बड़ी problems और खामियों के लिए इस्तिमाल किया गया है मुलक में जो मरज है आलमगीर, यानि मुलक में जो मरज फैल गए है, corruption, बे-अमनी, गुर्बत

[00:10:04] और आलमगीर का मतलब है worldwide, यानि कोई चीज, कोई phenomena या किसी का influence जो पूरे आलम को, पूरी दुनिया को अपनी गिरिफ्ट में ले ले गीर is a suffix, जिसका मतलब है किसी चीज को अपनी पकड में ले लेना, जैसे बगलगीर, बगलगीर क्या होता है? किसी को अपनी embrace में लेना, किसी को हग करना

[00:10:26] तो मुलक में जो मरज है आलमगीर, यानि the ailments that have taken hold of the country, the problems that have spread across it कौम पर उनकी फर्ज है तद्बीर, यानि उन problems का हल ढूनना, उनसे कैसे निपटना है, उनकी तद्बीर करना, यानि उनके solutions ढूनना, कौम की जिम्मेदारी है

[00:10:48] और जितने भी अशार पढ़ें हैं मर्ज पर, उन सब के contrast में हाली का ये जो share है, इसमें मर्ज का एक deeply interesting shade सामने आ रहा है इसमें मर्ज is an almost a collective problem, एक ऐसी चीज़ जो पूरे मुलक को affect कर रही है हाली का point भी काफी सीधा है, मर्ज को सिर्फ identify करना काफी नहीं होता है, किसी बीमारी को सिर्फ identify करना is not enough उसकी तद्बीर भी करनी है, उसकी remedy भी करनी है

[00:11:16] action के साथ, और ये action किसकी जिम्मेदारी है? कौम की, मुल्क के, citizens की तो मुल्क में जो मरज है, आलमगीर, कौम पर उनकी फर्ज है तद्बीर अलताफ हुसान हाली के जो नजम है हुब वतन, यानि love for once, homeland, यानि patriotism is a very emotional text बहुत लेंदी भी है, इसमें 204 अशार है 204 अशार का मतलब क्या हुआ? मिसरे कितने हुए? डबल कर लीजे इसके

[00:11:45] तो ये नजम पढ़ने के लिए, इसको समझने के लिए पूरा एक episode चाहिए और वो show जरूर बनाएंगे book mark कर लिया है, आप भी याद रखिएगा भूल जाओं तो याद दिला दीजेगा पता है ना कैसे करना है? Instagram पर You can follow me if you want to or just drop a message शालियो आज बस इतना ही, अगले episode में अगले हफ़ते फिर से मलकात होती है खुदा हफिज