Most of us hear the word 'gumshuda' and think of a missing person. Urdu poetry has other ideas.
In this episode of Urdunama, we explore how this simple word takes on many different meanings in poetry. Through these ashaar by Faiz Ahmed Faiz, Ahmad Mushtaq, and others, 'gumshuda' becomes much more than someone who has disappeared. It can be a lost voice, an unfinished song, an incomplete project, a wandering mind, a forgotten childhood, or even a part of ourselves that slowly disappears with time. It can also be that elusive creative spark, or an idea that catches you unawares, only to disappear before it has the chance to become a poem, a story or even a single sentence.
Join us as we unpack one of Urdu's most layered words and discover how poetry uses gumshuda to make sense of absence, memory and the quiet search for what we've lost.
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[00:00:00] This episode is brought to you by Facebook. So, you were scrolling on Marketplace, and there it was. The bike you'd been searching for. You sent a message, and it turned out the seller was super chatty, kinda funny, and an avid cyclist. The next thing you know, you're in a cycling crew. Well, a community cycling group. The thing about Facebook, you might find more than what you're looking for. From a browse to a bike ride, this summer, find more on Facebook.
[00:00:28] पिछले हफ़ते हमने बात की थी गुमनाम की, यानि जिसका नाम खो गया हो. आज नाम नहीं खोया है, आज पूरा इंसान खो गया है. यानि आज हम बात करेंगे गुम्शुदा की. इंग्लिश में इसका तरजुमा अकसर missing करके हम कह देते हैं, समझ लेते हैं, लेकिन उर्द
[00:01:04] जैसे के हमारी नीन, जैसे के बच्पन या कोई खयाल, यह सब भी गुम्शुदा होता है. और कभी-कभी इनसान अपने घर का रास्ता ही नहीं, बलके अपनी सोच का रास्ता भी भूल बैठता है. तो वो क्या बन जाता है? गुम्रह बन जाता है, जब रह भटक जाता है. � लेकिन आज गुमराह की बात नहीं करेंगे, आज हम बात कर रही हैं गुमशुदा की. तो आज इस एपिसोर में हम देखेंगे कि उर्दू शायरी गुमशुदा को किस तरहां से ढूंती है.
[00:01:37] The Queen पर शुरू हो गया है उर्दू नामा, मेरा नाम है फबेह सेयद. गुम से निकलते हुए वोर्द्स पर हमने एक छोटी सी सीरीज अपनी स्टार्ट की है. शुरूआत की थी गुम से, उस पर बात की, फिर उसके बाद हमने बनाया गुम से गुम नाम, अब बारी आती है गुमशुदा की, यानि की Missing, जो खो गया हो. और यहां गुम नाम और गुमशुदा के जो बीच का एक छोटा सा फर्ख है, पहले वो समझाओ, फिर आगे बढ़ेंगे.
[00:02:02] लेकिए गुम नाम और गुमशुदा दोनों एक जैसे वोर्ड्स है, लेकिन गुम नाम पहचान का लफ्स है, सवाल यहां पे नाम का है, गुम शुदा मौजूदगी का लफ्स है, सवाल यह है, कि जो चीज यहां होनी चाहिए थी, वो अब यहां नहीं है, गुम नाम नाम से जुड़ा है, गुम शुदा किसी की मौजूदगी यानि प्रेजन से जुड़ा हुआ है, एक और बात, जैसे हम इस मिनी सीरीज में ग
[00:02:27] गुम को एक प्रीफिक्स की तरहां देख रहे हैं न, वैसे ही शुदा एक उर्दू का बहुती कॉमन सफिक्स है, तो शुदा का मतलब होता है, हो चुका, यानि जिस पर कोई अमल हो चुका हो जिस बात पर, जैसे कि शादी के साथ अगर शुदा जोडेंगे, तो इसका मतल
[00:02:55] जगह से एक साथ निकलेंगे, वैसे ही फैसला शुदा, जिसका फैसला हो चुका हो, something that has been settled, वैसे तो गुम्शुदा के हम बात करें, लेकिन फैसला शुदा जब मैं समझा रहे हूं तो फिर इसके examples भी अबाब सुनिये, मिसाल के तौर पर, ये तो पहले ही फैसला शुदा
[00:03:12] मामला था, यानि this had already been decided, या फिर इस फैसला शुदा पॉलिसी में कोई तबदीली नहीं की गई, यानि कि no changes were made to the already decided policy, या फिर फैसला शुदा strategy के मताबिक ही काम हुआ है, मानि the work was carried out according to the agreed strategy.
[00:03:33] तो हमने क्या किया है कि इस शुदा suffix को गुम prefix के बाजू में लगा दिया है, और हमने बना दिया है, गुम प्लस शुदा is equal to गुमशुदा, शारी पर अभी आते हैं, लेकिन एक और छोटा सा dissection करना है इस word का, हर गुमशुदा चीज का मतलब ये नहीं होता, कि वो हमेश
[00:04:03] चलते हैं कि वो कभी मौझूद थी और कभी मिल भी सकती है, उसके मिलने की probability भी है, इसलिए गुमशुदा सिर्फ खो जाने का word नहीं है, ये उस चीज का लफ्स है, जिसकी कमी महसूस हो रहे है और शायद इसलिए इस लफ्स के साथ एक active तलाश भी जूड़ी रहती है, which is mostly exhausting and tiring.
[00:05:01] और उस किताब के गुमशुदा बाब यानि missing chapters, क्या खुबसूरत metaphor है भाई, शायर ये नहीं कह रहा है कि मेरी पूरी कहानी खो गई है, सिर्फ कुछ chapters ही तो खोए हैं, chapters ही खराब होए हैं, पूरी जिंदगी थोड़ी खराब होई है, जिंदगी ऐसी ही है, हम पूरे नहीं
[00:05:30] मुकमल होना ही बहतर था, एक खुआब जो पूरा होता है, उसके बाद ऐसा तूटता है कि दूसरे खुआब को जुडने का मौका ही नहीं मिलता, मजबूरियां आ जाती हैं, तो पूरी जिंदगी कभी भी मुतासर नहीं होती, छोटे छोटे chapters होते हैं, जो हलके भारी रं�
[00:05:58] जोटे ही हैं, बहुत इंटिमेट इमेज होई, यह वो तक्या है, यह वो सिंबल है, तो शायर कहता है, मेरी जिंदगी के जो missing chapters हैं, उनकी वज़े शायद तुम हो, मेरे कुछ खुआब मेरे पास नहीं रहे, तो तुम्हारे तक्ये के नीचे बरामद होंगे, तो जो गुम
[00:06:27] गुमशुदा का इस्तिमाल बहुत सोच समझ कर किया गया है, क्योंकि गुमशुदा का मतलब destroyed, finished, disappeared नहीं होता है, इसका मतलब है missing, the chapters still exist, जो खुआब है, that also it exists, बस उसकी जगा बदल गई है, पहले वो खुआब मेरे जिंदगी के active chapters, मेरी किताब का हिस्सा थे, पन्नू की
[00:06:50] तरहां वो उखाड के फाड के तेरे तक्ये में तेरे खाब की जगा ले चुए हैं, अब आते हैं फैज एहमद फैस के शेर पर, कि मेरी खामोशियों में लर्जा हैं, मेरे नालों की गुमशुदा आवाज, नाला यानी फर्याद, वो वाला नाला नहीं खुदा का वास्ता
[00:07:14] उर्दो में नाला जो है, वो फर्याद के लिए कहते हैं, रिक्वेस्ट के लिए कहते हैं, अपील के लिए कहते हैं, और उस फर्याद की गुमशुदा आवाज, फैस कहते हैं, वो आवाज अब सुनाई नहीं देती, लेकिन वो गई भी नहीं, मेरी खामोशियों में लर्ज
[00:07:59] तो फैस कह रहे हैं, I don't need to speak anymore. If you can read my silence, you'll hear everything. और मुझे लगता है, यहां गुमशुदा का मतलब थोड़ा चेंज हो जाता है. आवाज गायब नहीं हुई है. It simply stopped sounding like a voice. और वो आवाज क्या बन गई है? खामोशी की लर्जिश बन चुकी है. मेरे खामोशियों में लर्जा है मेरे नालों की गुमशुदा आवाज. मैं फर्याद कर रहा हूँ, किस से कर रहा हूँ, खुदा से कर रहा हूँ. लेकिन वो आवाज जो है,
[00:08:29] वो ऐसी दब गई है, कि बस अब लर्जिश की तरह निकलती है. उसमें जो भी थौट है, क्रियेटिविटी की बात हो रही है यहां पर. बोता रहता हूँ,
[00:08:58] हवा में गुमशुदा नगमों के बीज, वो समझते हैं कि मसरूफ फुगां रहता हूँ मैं. पहली बार सुनिएगा, तो ऐसा लगेगा कि शायर उन गीतों की बात कर रहा है, जो लिखे गए हैं और फिर कहीं खो गए हैं. या फिर के, वो बस एक उदास शायर है, जो हर वक्त आहोजारी में डूबा रहता है, सैडनेस में डूबा रहता है, वो समझते हैं कि मसरूफ फुगां रहता हूँ मैं. मुझे लगता है, इस शेर में जो बीज है, सबसे important symbol है, image है.
[00:09:28] बीज का मतलब है, शायर के पास कुछ तो है, कोई खयाल हो सकता है, कोई एहसास हो सकता है, कोई melody, कोई image, there is something, कि बुनियाद, कोई बीज है, this seed already exists, लेकिन वो अभी तक एक मुकमल नजम, या अंकुरित नहीं हुआ है, वो सीड़ भी तक, कोई thought कैसे आगे बढ़ता है, जब वो या image की शकल ले ले, किसी painting की शकल ले ले, किसी sentence की शकल ले ले, उसमें जोडी हुई दो-तीन lineों की शकल ले ले, तो वो ही symbol है,
[00:09:58] कि एक खयाल है, बीज है, अभी तक नहीं बन पाया है, हर writer और artist इस frustration को समझ सकता है, कभी-कभी आपके पास opening line होती है, ending नहीं होती है, कभी एक brilliant idea होता है, execution नहीं होता है, you know there is something there, but it just refuses to come together, एहमद मुश्ताख उसी creative struggle की बात कर रहे हैं यहां, वो कहते हैं, उमीद करता हूँ, कि इन में से कोई एक उग कर, वो नजम बन जाए,
[00:10:27] जो मेरे जहन में है, लेकिन बाहर से देखने वालों को कुछ औरी नजर आता है, you're constantly working on something that no one else can even see, और इसे लिए लोग गलत समझ लेते हैं, फिर अगला मिसरा उसी गलती के, वो जो वहम लोग पाल लेते हैं, ऐसे artists के बारे में, तो शायर लिखते हैं कि, वो समझते हैं कि, मसरूफे फुगा रहता हूं मैं, फुगा यानि आहुजारी, Lamenting, बाहर से लगता है शायर खोया हुआ है, उदास है,
[00:10:56] ग्लूमी है जी, लेकिन असल में, he is creating, he is busy doing something, which nobody else can see, कई बार what looks like sadness from the outside, is actually the work of creation which is going on, तो शायर यहां यही कह रहा है, बाहि अंदर से तो हम, नजमें बिल्ड कर रहे हैं, उनके बारे में, फिकरात हमारी अलग चल रहे हैं, बाहर से लोगों को ऐसा लग रहा है,
[00:11:28] यह पूरी गजल सुन लेजे, बहुत प्यारी है, एहमद मुश्ताख की गजल है,
[00:12:31] उनके बारे में, लेकिन अगले हफ़ते, आप तब तक अपना खयाल रखें, खुदाफिस,


