We all say we hate gossip, but somehow, someone else’s business is always a little too interesting. In this episode of Urdunama, Fabeha Syed takes a closer look at gheebat, meaning the art of talking about people behind their backs. From everyday gossip and the conversations that bring us closer to poetry by Firaq Gorakhpuri and Yagana Changezi, we explore why we love to talk about other people’s lives, what it does to our relationships, and where the line between venting and backbiting really lies. Tune in.
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[00:00:05] Gheebat – Gheebat का मतलब है किसी की पीठ पीछे उसकी बुराई करना, मुच्ताक एहमद युसुफी का ये जुमला कि दुनिया में Gheebat से ज्यादा जल्द हजम होने वाली कोई चीज नहीं है, सौफी सदी सच है, गीबत वो चीज है जो करने वाले को भी बुरी नहीं लगती और सुनने वाला भी मना नहीं करता कुछ ऐसी understanding हो जाती है कि ये communication ना होते होते भी होई जाता है
[00:00:34] ऐसी चीज जिसे हम सब officially hate करते हैं, nobody wants to be associated with it और फिर भी secretly, well, let's just say we keep the industry, the gossip mill running So why do we do it? किसी और के business में interest लेना, अपने business को mind करने से इतना ज्यादा entertaining क्यों लगता है हमें आज गीबत को हम थोड़ा operating table पर रखते हैं, देखते हैं venting और backbiting के बीच जो line है, वो कहां है
[00:01:03] और क्यों किसी और की life का जो drama है, वो हमें बहुत ही ज्यादा irresistible लगता है and yes, फिक्र मत कीजिए, आज हम आपकी बात नहीं करें, अभी अभी पता चल जाएगा The Quint पर शुरू हो गया है उर्दुनामा, मेरा नाम है फबेहा सेयद आज बात होगे गीबत पर, जिसका मतलब है backbiting किसी की पीट पीछे बुराई करना, बहुत गलत बात है, तौबा तौबा, बहुत ही गलत बात है
[00:01:32] सोचे ये शायद, ऐसा sport है, जिसमें कोई medal जीतना नहीं जाता है लेकिन professional खिलाडी सब है जैसे ही कोई पास आकर कहता है देखो मुझे तुमें बताना नहीं है, लेकिन you know what कान ऐसे खड़े हो जाते हैं, जैसे वाइफाई को signal मिल गया है और बुरा मत पानियेगा, हमें लगता है कि friendships, common goals या same books और music पसंद होने की वज़े से बनती है
[00:02:01] इमानदारी से बताईए, किसी एक ही इंसान को dislike करना दोस्ती को fast track नहीं कर देता है देखे, human tendency है किसी के साथ same चीजें पसंद करना connection बनाने में conversations चाहिए, familiarity चाहिए, vulnerability चाहिए सबसे ज्यादा तो and most importantly patience चाहिए patience की जरूरत जहां पर होती है, उसका मतलब क्या होता है? कि वक्त लगता है, तो इतना वक्त नहीं है किसी के पास
[00:02:31] किसी एक चीज या किसी एक इनसान से same frustration जब होती है तो इतना वक्त नहीं लगता है तुरंत friendships हो जाती है, instant chemistries बन जाती है तो ये जो एक common grievance होता है ना वो होता है असल intimacy का shortcut अच्छा, तुमारा husband तुम्हें परिशान करता है? अच्छा, तुम्हारी wife तुम्हें परिशान करता है? आओ जी, हमां के बैठते हैं, तूसरे की बुराइयां करते हैं
[00:02:59] आओ जी, हमारी intimacy यहीं पर बन जाएगी तुम्हें जाती गटिया चीज है वोट एक बहुती भद्धा example देकर आपको समझा रही है इसलिए जो घीबत है इस तरह की, उसमें बहुत potential होता है damage करने का तो ये जो अचानक एक छोटा सा us against the world club बन जाता है वो देखना पड़ेगा कि कहां पर damage ज्यादा करता है कहां पर नहीं करता है enough of this gossip शायरी पर आएंगे शुरुआत करते हैं
[00:03:29] जगत मोहन लाल रावन के एक बड़े ही तीखे से शेर के साथ जिसमें वो घीबत के सबसे obvious form को दिखा रहे हैं और वो क्या form है? जी लिखते हैं तो सामने तारीफ आपके लिए अच्छी अच्छी बाते हैं आपके मोह पर
[00:03:59] और आपके जाते ही पलटते ही गीबत में गिला complaints, criticism, बुराई और फिर दूसरे मिस्टरे में क्या कहते हैं? वो सफाई कहकर एक और तमाचा मार देते हैं कि आपके दिल की सफाई देख लिए यानि सामने तो आप इतने मीठे हैं, इतनी तारीफ करते हैं और पीछे ही आप छुरा गुप देते हैं अब समझ आ गया कि आपके दिल की सफाई कितनी है तो यहां पे शायर किसी के character को expose कर रहा है लेकिन यहां एक बहुत ही uncomfortable सवाल भी है
[00:04:29] दूसरों के दोहरेपन को पहचानना तो आसान है लेकिन जब यही काम हम खुद कर रहे होते हैं तो येस यही से फिराग गोरकपुरी का जो शेर है शायर अपनी ही अगीबत कर रहा है किस से? सुनिये लिखते हैं
[00:04:57] परदाए अर्जे वफा में भी रहा हूं करता तो पहली मिसरे में शायर अपनी अर्जे वफा कर रहा है अपनी महबत, अपनी लॉयल्टी, अपनी हेलपलेसनेस अपना दर्ज, सबकुछ बिलवट के सामने रख रहा है क्योंकि शायर ने परदा वोड यूस किया है
[00:05:28] यहाँ इसका मतलब है प्रीटेक्स्ट अर्जे वफा के परदे में, उसके प्रीटेक्स्ट में, उसके बहाने में, उसके कवर में meaning under the guise of expressing my love and devotion परदाए अर्जे वफा में भी रहा हूं करता और अगले मिस्रे में, तुझ से मैं अपनी ही अगीबत मुझे मालूम न था यानि तुम्हारे सामने अपनी ही बुराई कर रहा था मैं अच्छली और मुझे मालूम नहीं चल रहा था
[00:05:55] क्योंकि I was thinking, maybe I'm just confessing my love maybe I'm just telling you how clean I am in my heart about you, how honest I am but actually, मैं उस ताइम पर अपनी अगीबत कर रहा था, अपने आपको betray कर रहा था गीबत में traditionally तीन लोग होते हैं आप a listener and a third person whom you are bad-mouthing फिराख यहां third person को ही हटा देते हैं वो खुद अपनी ही गीबत का subject बन जाते
[00:06:24] और यह सिर्फ एक बहुती clever use of the word नहीं है इसमें relationships की एक बहुती uncomfortable reality है जब आप किसी से महबत के नाम पर बार बार अपनी सफाई पेश करते हैं अपनी weaknesses, अपनी vulnerability एक दम निकाल के सामने रख देते हैं कि शायद उनको बहतर यखीन हो आपके उपर अपनी misery explain करते हैं आप उनके सामने तो अप actually सामने वाले को अपनी feelings बता रहे होते हैं लेकिन साथ ही unknowingly अपनी image को undermine कर रहे होते हैं
[00:06:53] because just think about it कोई इंसान अगर आपको समझता होता तो उसके सामने इतने explain करने के जरूरत ही नहीं पड़ती so फिराख का ये जो घीबत है यहाँ पे इसलिए बहुत ही sharp उसका इस्तेमाल लगा मुझे because बहुत ही एक painful one-sided devotion को वो suddenly self-deprecating बना देते हैं मैं तुम्हारे सामने किसी और की नहीं अपनी बुराई कर रहा था और मुझे पता भी नहीं चल रहा था
[00:07:22] और मैं सब को क्या नाम दे रहा था अर्जेवफा का confession का, महबबत के expression का तो परदय अर्जेवफा में भी रहा हूं करता तुझसे मैं अपनी ही गीबत मुझे मालूम ना था अब तो मालूम हो गया ना So stop right away एक interesting set up situation है
[00:07:51] गीबत लोग कहा कहा करते हैं घरवर में तो होती है, kitchen में गीबत होती है, kitchen politics होती है workplace होती है, वहाँ भी आपस में good बन जाते है, politics होती है पान की दुकान में भी बड़ी गीबत होती है चाई की दुकान, पान की दुकान So अगर gossip की geography देखें तो हर culture का अपना एक epicender होता है, ठीक है West में शायद वो office का water cooler हो जाता है, brunch table हो जाती है लेकिन हमारे यहां
[00:08:20] मुनवर राना सहाब ने इसे एक ही जुमले में पकड़ लिया बोलते हैं, गीबत और पान का रिष्टा बहुत पुराना है Just imagine, कितनी accurate बात है हमारे यहां पान की जो दुकान है, सिर्फ पान लेने की जगा नहीं थी It was the original social media feed जब social media था भी नहीं So local news हुई, सबसे पहले breaking महीं से मिलती थी और पान का भी अपना एक ritual है आप पान बस निगल नहीं जाते हैं पान को चबाते हैं उसके साथ, उसे चबाते रहते हैं जुगाली होती है, वक्त लगता है उसको
[00:08:49] अंदर लेने में बार बार उसकी पीक थूके जाते हैं तो पूरा एक process होता है पान को चबाके खाके उसे हजम करने का और जब तक पान का वो पीठा सा, स्वाद मुँ में रहता है बाते भी आगे वड़ती रहती है जब तक पीक निकलती रहती है ठुकते रहते है जब तक बाते भी निकलती रहती है फिर पता ही नहीं चलता कि पान खतम हुआ है कि नहीं लेकिन पूरे महले का two hour commentary session पूरा हो जाता है, मुकमल हो जाता है
[00:09:19] तो मुनवर राना का यह जो जुमला है शायद इसी पुरानी social habit की तरफ इशारा करता है कि हमने gossip को भी अपनी तहजीब और रिवायतों में इतना शामिल कर लिया है कि बात मीठी लगती रहती है चाहे उसमें किसी और के लिए कितनी ही कड़वाहट क्यों ना हो तो यहाँ थोड़ा regulate करने की ज़रूरत है अब आगे बढ़ते है यास यागाना चंगेजी का आपको शेर सुनाऊंगी इसमें भी गीबत एक अलगी दिशा में चली जाती है
[00:09:47] लिखते हैं कि कोई इतना भी नहीं आप से अगीबत ही करे मतलब सोचने वाली बात है यह अंगल गीबत के बारे में बात करते हुए कभी सोचा नहीं था हमने कोई इतना भी नहीं आप से अगीबत ही करे कांटे पढ़ते हैं जबान में मेरे अफसाने से तो सबसे पहले आप को नोटिस कीजिए जो आपका इस्तेमाल हुआ है शेर में कि कोई इतना भी नहीं आपसे अग़िबत ही करे जो शायर है यहां खुद से बात कर रहा है
[00:10:15] लेकिन मैं या मुझे कहकर नहीं वो अपने ही, यामने ही को आप कहकर अड्रेस कर रहा है जैसे हम बोलते हैं नहीं तो अपने आप हो गया यानि खुद भखुद हो गया तो खुद के लिए, सेल्फ के लिए आप वो गाढ़ इस होता है
[00:10:43] कि अब कोई ऐसा भी नहीं है जो बैट कर आपकी बुराई कर ले You are completely off their radar कोई इतना भी नहीं आप से अगविबत ही करे कांटे पढ़ते हैं जबान में मेरे अफसाने से लेकिन यगाना सहब इसमें almost बहुती प्राइड के साथ ही बात कह रहे हैं इसे अपने ही lonely self को समझा रहे हो
[00:11:12] that being outside the gossip circuit does not necessarily mean you are irrelevant फिर कहते हैं कांटे पढ़ते हैं जबान में मेरे अफसाने से तो मेरा अफसाना, मेरी कहानी, मेरी जिन्दगी इतनी heavy है कि उसे twist करके, उसके घीवत करके बयान करना भी जबान को शोभा नहीं देता है लोगों के जबान में चुबता है तो यहां घीवत का use काफी interesting है
[00:11:38] normally घीवत में तीन लोग जैसे मैंने आपको बताया के होते हैं listener होता है, third person होता है और आप होते हैं you तो यागाना सहाब यहां उस structure को पलट रही है कि शायर खुद से ही बात कर रहा है कि देखो इतने cut off हो गये हो कि कोई तुम्हारे बारें बात करना भी पसंद नहीं करता है
[00:12:06] तो घीवत कभी किसी के दोरेपन को expose करती है कभी अंदर की तरफ मुड़कर self criticism बन जाती है और कभी सिर्फ हमारी everyday social life का fuel बन जाती है और जिसका हाथ पकड़के अपने connections, अपने relationships लोग navigate कर लेते हैं और वैसे भी दुर घटना से तो साफधानी बहतर होती है साफधान रहना तो हर कोई पसंद करता है इसी बात पर यहीं पर खतम करते हैं ये podcast
[00:12:34] आपसे अगले हफते मिलती हूँ तब तक अपना खयाल रखें खुदा हाफ़ज


