रणछोड़

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जरासंध ने कंस के वध का बदला लेने के लिए श्रीकृष्ण पर सत्रह बार आक्रमण किया और हर बार मुंह की खाई। अंततः भगवान कृष्ण को हराने के लिए उसने कालयवन की सहायता माँगी। कालयवन को शिवजी से वरदान प्राप्त था कि युद्ध में कभी उसकी हार नहीं होगी। श्रीक़ृष्ण को पता था कि कालयवन को युद्ध में पराजित करना असंभव है, इसलिए जब उन्होंने कालयवन और जरासंध को उनकी ३० लाख सैनिकों के साथ देखा तो वो युद्धस्थल से भाग खड़े हुए। कालयवन ने श्रीकृष्ण का पीछा किया। श्रीकृष्ण बड़ी ही चतुराई से उस अंधेरी गुफा में जा छिपे जहाँ मुचुकुन्द निद्रा में लीन थे। कालयवन ने मुचुकुन्द को सोता हुआ देखकर सोचा कि वो श्रीकृष्ण हैं और उनको जोर की लात मार दी। इस प्रकार कालयवन के प्रहार से मुचुकुन्द की निद्रा भंग हो गई और इन्द्र के वरदान के अनुसार कालयवन वहीं भस्म हो गया। इस चतुर लीला के कारण भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम रणछोड़ भी पड़ा। Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

जरासंध ने कंस के वध का बदला लेने के लिए श्रीकृष्ण पर सत्रह बार आक्रमण किया और हर बार मुंह की खाई। अंततः भगवान कृष्ण को हराने के लिए उसने कालयवन की सहायता माँगी। कालयवन को शिवजी से वरदान प्राप्त था कि युद्ध में कभी उसकी हार नहीं होगी। 

श्रीक़ृष्ण को पता था कि कालयवन को युद्ध में पराजित करना असंभव है, इसलिए जब उन्होंने कालयवन और जरासंध को उनकी ३० लाख सैनिकों के साथ देखा तो वो युद्धस्थल से भाग खड़े हुए। 

कालयवन ने श्रीकृष्ण का पीछा किया। श्रीकृष्ण बड़ी ही चतुराई से उस अंधेरी गुफा में जा छिपे जहाँ मुचुकुन्द निद्रा में लीन थे। 

कालयवन ने मुचुकुन्द को सोता हुआ देखकर सोचा कि वो श्रीकृष्ण हैं और उनको जोर की लात मार दी। 

इस प्रकार कालयवन के प्रहार से मुचुकुन्द की निद्रा भंग हो गई और इन्द्र के वरदान के अनुसार कालयवन वहीं भस्म हो गया। 

इस चतुर लीला के कारण भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम रणछोड़ भी पड़ा। 

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