सद्गुरु एक अय्याश राजा की कहानी सुना रहे हैं, जो अपनी पत्नी का ज़बरदस्त बलिदान देखकर, जीवन की प्रकृति को समझने निकल पड़े थे।
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[00:00:00] उज्जैन में एक राजा था, यह राजा, शारेरिक सुखों में डूबा हुआ था, वो वाकई अपनी मनमर्जी करते हुए जीरा था, तो उसकी एक पत्नी थी, जिसका नाम था पिंगला, तब पिंगला बोली, अगर दो दिल मिलकर एक हो गय हूं, तब ऐसा ही होता है, तो अ
[00:00:41] उज्जैन में एक राजा था, उसका नाम था भरतिहरी, यह वही हैं जिनोंने श्रेंगार शटकम लिखा, और बाद में वैरागे शटकम भी लिखा, श्रेंगार शटकम एक कविताओं की रचना है, इसमें सिर्फ काम की लालसा और काम सा हित्य है,
[00:01:07] वैरागे शटकम एक पूरी तरह से वैराग गया और त्यांक की रचना है, यह राजा शारेरिक सुखों में डूबा हुआ था, वो वाकि अपनी मनमर्जी करते हुए जीरा था,
[00:01:25] एक दिन वो शिकार पर गया और उसने एक हिरन को निशाना बनाया और मार गिराया, जब हिरन मर गया, तो माधा हिरन जो उसके साथ ही थी वहीं खड़ी रही, अपनी जान जो खेमें डाल कर भी वहीं खड़ी रही,
[00:01:46] राजा ये देखकर हैरान था, भाग कर अपनी जान बचाने के बजाए, वो वहीं मरने के लिए तैयार खड़ी थी, और तभी इसी बीच, राजा के साथ शिकार कर रहे सैनिकों में से एक को सांपने डस लिया, और वो भी मर गया, जब वो मरा, उसकी पतनी आई, और जैसे ह
[00:02:23] राजा ये देखकर राजा हैरान हो गया, राजा अपने जीवन में खुद को ही सब कुछ समझता था, उसके सुक, उसकी पसंद वगएरा वगएरा, जब उसने इस मादा हिरन को देखा और उस औरत को आग में कूदने की कोशिश करते देखा, तो वो एक तरह से कन्फ्यू�
[00:02:53] आज मैंने ये दो खटनाएं देखी, इन्होंने मेरा मन पूरी तरह से कन्फ्यूस्ट करके रख दिया है, तब विंगला बूली, अगर दो दिल मिलकर एक हो गए हैं, तब ऐसा ही होता है, ये एक सवभाविक चीज है
[00:03:21] इसमें आश्चरी की बात नहीं है, हैरानी की कोई बात नहीं है, अगर दो दिल उनके अनुभाव में वाकई मिलकर एक हो गए हैं, उसमें अपड़े सहे जोकर कहां जैसे ये एक आम बात है, तो इसने राजा को और भी हैरानी में डाल दिया, कि उसकी पत्नी भी है कह रही ह
[00:03:33] उसके पास 500 श्ट्रियां थी, उसे ये बात समझ में नहीं आई, तो अगली बार जब वो शिकार पर गया, वो इसको आजमाना चाहता था, उसने क्या किया कि उसने अपने कपड़ों पर जानवरों का खून सान कर उन्हें महल में बिजवा दिया, और पिंगला को ये बताया
[00:03:54] गया कि राजा मर गये, उन्हें एक बाग ने मार डाला, तो जब पिंगला को ये खून से सने कपड़े मिले, उसने कपड़े नीचे रखे, कपड़ों को नमन किया, और फिर उन कपड़ों पर लेट गई, और उसने वहीं अपनी अंतिम सांस ले और मर गई, जब उसे इस ब
[00:04:29] गया कि राज्य छोड़ दिया, और एक रिशी बन गये, और तब उन्होंने वेराग्य शटकम की रचना की, ये कविताओं वाली सुन्दर रचना है, ये ही स्त्रि प्रकृती का सौभाव है, कि नतीजा महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उस पल में भावना का आवेश औ
[00:04:54] प्रेम किसी भी नतीजे से जादा महत्वपूर्ण होता है, किसी काम का नतीजा क्या होगा, ये हिसाब लगाना पुरुष प्रकृती का सौभाव है, पुरुष प्रकृती हमेशा नतीजे के बारे में सोचती रहती है, स्त्री प्रकृती नतीजे के बारे में नहीं सोचती,
[00:05:09] but you think that what is the meaning of the feminine?
[00:05:15] What do you think? Or what else do you think?
[00:05:18] This is not a true-prakti.
[00:05:20] What do you think? This is true-prakti.
[00:05:25] Do you need to give attention to the thoughts of the feminine?
[00:05:28] Yes, it should give.
[00:05:29] If a person is a person's body,
[00:05:31] then when they are a person's body,
[00:05:34] if you don't have a true-prakti,
[00:05:35] then you will not have the power of the feminine.
[00:05:38] So this is the nature of the feminine,
[00:05:40] that it is capable of going beyond itself.
[00:05:46] This is the nature of the feminine,
[00:05:50] which is the nature of the feminine,
[00:05:52] that the feminine is the nature of the feminine,
[00:05:55] which is the nature of feminine.
[00:06:01] Shambhavi,
[00:06:03] is an aesthetic on its' Their history.
[00:06:13] ।
[00:06:38] is cut.


