Valentines Day पर Modi सरकार का फरमान, गाय के साथ मनाये वैलेंटाइन्स डे
HW ReportsFebruary 10, 202300:06:00

Valentines Day पर Modi सरकार का फरमान, गाय के साथ मनाये वैलेंटाइन्स डे

सरकार की तरफ से एक फरमान जारी किया गया है और कहा गया है की वैलेंटाइन डे के मौके पर काऊ हग डे मनाया जाये. यानी की गाय को गले लगाकर अपने गाय के प्यार का इजहार करें. दरअसल, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (Animal Welfare Board of India) ने ‘काऊ हग डे’ को लेकर नोटिस जारी किया है. बोर्ड की तरफ से कहा गया,“हम सभी जानते हैं कि गाय भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. हमारे जीवन को बनाए रखती है. पशु धन और जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करती है. मां की तरह इसकी पौष्टिक प्रकृति के कारण इसे 'कामधेनु' और 'गौ माता' के रूप में जाना जाता है, जो मानवता को सभी धन प्रदान करती है.” AWBI की असिस्टेंट सेक्रेटरी प्राची जैन ने इसे लेकर कहा ‘यह गाय प्रेमियों से सिर्फ एक अपील है. हमने इस वर्ष समय की कमी के कारण इस अवसर पर और इसके आसपास किसी विशेष कार्यक्रम की योजना नहीं बनाई है. लेकिन बोर्ड अगले साल से कुछ कार्यक्रमों की योजना बना सकता है.’ अपील में यह भी कहा गया है कि पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध ने हमारी भौतिक संस्कृति और विरासत को लगभग भुला दिया है. Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

सरकार की तरफ से एक फरमान जारी किया गया है और कहा गया है की वैलेंटाइन डे के मौके पर काऊ हग डे मनाया जाये. यानी की गाय को गले लगाकर अपने गाय के प्यार का इजहार करें. दरअसल, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (Animal Welfare Board of India) ने ‘काऊ हग डे’ को लेकर नोटिस जारी किया है. बोर्ड की तरफ से कहा गया,“हम सभी जानते हैं कि गाय भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. हमारे जीवन को बनाए रखती है. पशु धन और जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करती है. मां की तरह इसकी पौष्टिक प्रकृति के कारण इसे 'कामधेनु' और 'गौ माता' के रूप में जाना जाता है, जो मानवता को सभी धन प्रदान करती है.” AWBI की असिस्टेंट सेक्रेटरी प्राची जैन ने इसे लेकर कहा ‘यह गाय प्रेमियों से सिर्फ एक अपील है. हमने इस वर्ष समय की कमी के कारण इस अवसर पर और इसके आसपास किसी विशेष कार्यक्रम की योजना नहीं बनाई है. लेकिन बोर्ड अगले साल से कुछ कार्यक्रमों की योजना बना सकता है.’ अपील में यह भी कहा गया है कि पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध ने हमारी भौतिक संस्कृति और विरासत को लगभग भुला दिया है. 

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