सप्ता सागरादाचे एलो साइड A और साइड B, जी हां ये लव स्टोरी दो हिस्सों में आपके सामने आती है। यूं तो हर भारतीय फिल्म में एक प्रेम कहानी संलग्न होती है, पर कुछ फिल्में ऐसी होती है जो देखने वालों को प्रेम के समुंदर में उतार ही देती है। समुंदर इस फिल्म का एक अहम घटक है और शंख भी।
कहते हैं शंख को कानों से लगाओ तो समुंदर के लहरों की आवाज सुनाई देती है। जैसे एक छोटे से शंख में पूरा अनंत अथाह समुंदर समा गया हो। ठीक ऐसे ही जब मनुष्य के नन्हे से दिल में प्रेम का अथाह अनंत समुंदर समा जाता है तब जन्म लेती हैं ऐसी प्रेम कहानियां।
नायिका को समुंदर पसंद है और नायक नायिका के लिए एक घर बनाना चाहता है जो समुंदर किनारे हो। फिल्म का पहला हिस्सा आपको नायिका की प्यार भरी आंखों में डूबायेगा तो दूसरा हिस्सा नायक के दिल में नायिका के लिए बसे गहरे प्यार से परिचय कराएगा। जहां पहले में नायिका सलाखों के पार से नायक को देखती है, साइड B में नायक एक खिड़की की जाली से नायिका को देखता है। दोनों एक दूजे को मुक्त देखना चाहते हैं। एक दूसरे का दर्द पी जाना चाहते हैं। जिस्मानी रूप से दूर होकर भी कभी एक न हो पाएंगे ये जानकर भी उनके दिल जैसे एक दूसरे के लिए ही धड़कते हैं।
रक्षित शेट्टी और रुक्मणि वसंत का अभिनय जैसे अभिनय लगता ही नहीं। दोनों के साथ वाले दृश्य कम ही हैं पर फिर भी इनकी केमिस्ट्री आप शिद्दत से फील करते हैं। साइड B में चैत्रा अचर का किरदार इंट्रोड्यूस होता है और इस किरदार के माध्यम से निर्देशक ने बहुत कुछ कहा है। सच फिल्म खत्म होने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे ये प्रेम कहानी कभी खत्म नहीं होनी चाहिए थी।
https://www.instagram.com/reel/C3XQX3KvfeR/?igsh=MW9paHdxdDNzdDEwbg==
Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices


