आरोपियों को इस तरह से एनकाउंटर में मारे जाने के बाद आरोपियों के मानवाधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने मामले का संज्ञान लिया है. कई सारे लीगल एक्सपर्ट भी इस मुठभेड़ पर सवाल उठा रहे हैं. लेकिन जो भी ये मान रहे हैं कि 'जो भी हुआ सही हुआ' और 'ऐसा ही होना चाहिए'. ऐसे लोग कानून के राज और न्यायिक प्रक्रिया की अहमियत नहीं समझ रहे हैं. बिना ट्रायल किए इंसाफ कर देना आपको कभी स्वस्थ समाज नहीं बना सकता.
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