We usually translate gum as "lost". But that's only half the story.
In Urdu, gum isn't always about something disappearing. Sometimes it's a misplaced key. Sometimes it's your peace of mind. Sometimes it's simply getting so lost in your thoughts that the rest of the world fades into the background.
This episode marks the beginning of a special Urdunama mini-series exploring a family of Urdu words that begin with gum. Over the next few episodes, we'll see how this one simple prefix gives rise to very different meanings, proving that a single word can open the door to entirely different human experiences. Tune in.
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[00:00:35] देखें जो कह कि फोन उठाया क्यों था, इस बीच Instagram खुल जाता है, WhatsApp खुल जाता है, Mails भी चेको जाते हैं, कभी YouTube Shots भी चल पड़ते हैं, 5 मिनट की बिल्कुल Mindless Scrolling के बाद अचानक या दाता है, Thread, Butter, Dood, Finale की गोलियां, बच्चे के डाइपर, ये सब मंगाना था, इसलिए फोन उठाया था, लेकिन ये हो नहीं सकता, 40 क्रॉस करते ही, इतना कोई गजनी तो बन नहीं सकता है,
[00:01:03] मैं अके लिए तो कते ही नहीं हो सकती हैं, मेरे साथ बहुत सारी बहने और भाई लोग ऐसे हैं, जो यकीनन इस परिशानी से जूच रहे हैं, कभी न कभी थोड़ी देर के लिए, दिन में दो नहीं तो एक बार तो यकीनन सब गुम हो जाते हैं, आज गुम होना क्या होता है, उसकी बात करेंगे, दगुइन पर शुरू हो गया है उर्दू नामा, मेरा नाम है फबेह सेयद, आज से हम एक छोटी सी सीरीज शुरू कर रही हैं, चार लव्ज हैं,
[00:01:32] और सबकी शुरुआत ही एक ही लव्ज से होती है, और वो है गुम, जिसका मतलब है lost, खोया हुआ, इसका असल मतलब है displace होना, गुम से निकलते हुए तीन वर्ड्स हैं, जिन पर आने वाले तीन हफ़तों में हम बात करेंगे, वो words कौन से नहीं बताऊंगी, लेकिन इन तीनों words तक पहुचने से पहले, जरूरी है कि हम गुम को समझे, क्यूंकि हम अकसर गुम का मतलब सिर्फ, जैसे अभी मैं बता रही थी, इसका मतलब है lost, इसका मतलब है, खोया हुआ,
[00:02:02] ये समझ लेते हैं, तो ये clarity पहले बहुत जरूरी है, कि गुम का मतलब lost होना, या disappear होना ही नहीं है, for example, हम कहते हैं, भाई मेरी चाबी गुम हो गई है, तो हम उसे ढूंडना क्यों शुरू कर देते हैं, गुम हो गई है, disappear हो गई है, तो गायब हो गई हैं, existence खतम हो गई है, ढूंडते क्यों हैं, हम इसलिए ढूंडते हैं, क्योंकि हमें यकीन होता है, कि चाबी उस जगा अगर नहीं है, जहां उसे होना चाहिए, तो कहीं और होगी, बस हमें मिल नहीं रही है,
[00:02:30] यही बात जो गुम की है, मुझे बहुत interesting लगती है, कि इस word में एक hope छुपी होती है, एक assumption के जो चीज गुम हो गई है, वो अभी भी कहीं मौझूद है, बस हमारी पॉँच से दूर है, इसलिए हम उसे ढूंडते हैं, इसलिए ढूंडते हैं, क्योंकि हमें उमीद है, कि वो हमको मिल जाएगी, तो यह जो word है गुम, यह सिर्फ objects के लिए ही नहीं आता है, हम कहते हैं भाई, वो सोच में गुम हो गई है, खुद में गुम हो गई है, इश्क में गुम हो गई है, यहां कोई इनसान गुम हो गया है, खोया नहीं है,
[00:03:00] उसका ध्यान, उसका जहन, उसकी तवज़ो कहीं और चली गई है, प्रेजिंट से हटके, इसलिए उसे गुम होना कहते हैं, वो तवज़ो डिस्प्लेस हो गई है, डिसपियर नहीं हुई है, खोई नहीं है कहीं, तो आज इस एपिसोर में जो फोकस है, वो रहेगा गुम पर, शुरुआत करते हैं मुहसिन नकवी के, इस ब्यूटिफल शेर के साथ,
[00:03:27] क्या जानिये क्यों तेज हवा सोच में गुम हैं, खाबीद परिंदों को दरختों से उड़ा कर, इस शेर में गुम का इस्तिमाल बहुत डेलिकेट है, हम आम तोर पर गुम को लॉस्ट कहते हैं भी बता रही थी आपको, लेकिन उर्दू में गुम का एक और मतलब होता है, जैसे हम कहते हैं, वो सोच में गुम था,
[00:03:55] not physically lost, but he is mentally elsewhere, कहीं और है वो, मौसिन नकवी हवा को इंसान बना देते हैं, वो कहते हवा ने अभी अभी सोई हुए परिंदों को दरखतों से उड़ा दिया है, अब वो सोच में गुम है, खोध हवा जो है, वो सोच में गुम है, ये कांड करके दरखतों से उड़ा के परिंदों को, उसको humanize कर दिया है, as if the हवा has paused to think, के मैंने ये क्या कर दिया, अब ये परिंदे कहा जाएंगे, ओहो गुना कर दिया मैंने,
[00:04:24] परिशान कर दिया परिंदों को, अफकॉस हवा इस तरह सोचती नहीं है, लेकिन शायरी का ये ही मज़ा है, शायरी gives emotions to things that do not have them, so that we can understand our own a little better, तो यहां गुम का मतलब खो जाना नहीं है, किसी खयाल में इतना डूब जाना है, कि बाकी दुनिया कुछ देर के लिए पीछे रह जाए,
[00:04:52] अब अनवर शूर का आपको शेर सुनाएंगे, यह तो मुझे बहुती पसंद है, नया-nया romance होता है न, उस time का यह शेर लगता है, कि अच्छा खासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूं, अब मैं अकसर मैं नहीं रहता, तुम हो जाता हूं, कि तो first line is basically all of us, है न, कभी laptop के सामने बैठे होते हैं, कभी lecture में, कभी किसी meeting में, और अचानक पता लगता है, कि पिछले दो मिनिट से ध्यान कहीं और है, पिछले दो मिनिट से हम सोच रहे हैं,
[00:05:20] कि हम जो फ्रिज में कद्दू रखा हुआ है, उसे किस तरह मनाएंगे, यहाँ गुम का मतलब भी वही है, आप कहीं गए नहीं हैं, बस कुछ देर के लिए, आपका जहन कहीं और चला गया है, आप वहीं मौझूद हैं, जहन भी कहीं और चला गया है, वो डिसपियर नहीं हुआ है, उसकी तवज्जो, खतम नहीं हुई है, शिफ्ट हो गई है, डिस्प्लेस हो गई है, फिर दूसरा मिस्रा आता है, जो इस खयाल का फोकस है, अब में अकसर में नहीं रहتा, तुम हो जाता हूँ,
[00:05:50] एक मतलब तो यह है कि, मैं तुम्हारे बारे में इतना सोचता हूँ, कि मेरी सोच का सेंटर ही तुम बन जाते हो, मैं हर बात तुम्हारी ही नजर से देखने लगता हूँ, तुम्हारे लेंज से देखने लगता हूँ So for a while I'm no longer thinking as me, I'm thinking as you लेकिन मुझे ऐसा लगते हैं शेर का एक और मतलब हो सकता है हो सकता है शायर ये कह रहा हो के मैं भी तुम्हारी तरह हो गया हूँ जैसे तुम अपनी ही दुनिया में गुम रहते हो और मेरी तरफ तवज्जों नहीं देते हो
[00:06:17] वैसे ही अब मैं भी गुम रहने लगा हूँ, just like you अच्छा खासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ, अब मैं अकसर मैं नहीं रहता, तुम हो जाता हूँ
[00:06:33] अब आपको निदाफाजली का ये शेर सुनाते हैं, चुप चुप मकान, रास्ते गुमसुम निधाल वक्त, इस शेहर के लिए कोई दीवाना जाहिए इस शेर में गुम ने प्रिफिक्स का काम किया है, और एक वर्ड बनाया है गुमसुम
[00:06:54] हम इस्तिमाल करते हैं ये वर्ड कि आज तो बड़े गुमसुम लग रहे हो, भई क्या बात है, तबियत तो ठीक है, तो गुमसुम का मतलब सिर्फ चुप होना नहीं होता है, गुमसुम वो होता है जब बात करने का मन ना करे, जब एनरजी ही ना हो अब आप पहला मिस्रा देखिए कि चुप चुप मकान, रास्ते गुमसुम निधाल वक्त, यहनि पूरे शेहर से जैसे स्पार्क चला गया हो, एनरजी किसी ने निचोड ली हो, सब कुछ अपनी जगा है, घर भी है, रास्ते भी है, वक्त भी चली रहा है, लेकिन बहुत �
[00:07:23] निधाल रफतार से चल रहा है, बहुत एक्जॉस्टेड लग रहा है, और इसी लिए किसी भी चीज में एक्साइटमेंट नहीं है, कोई मुवमेंट नहीं, कोई नई बात नहीं हो रही, और फिर शायर इसकी रेमेडी भी बताता है, इस शेहर के लिए कोई दीवाना चाहि
[00:07:50] किया जाता है, और इस इस शेहर को किसी एड्मिनिस्ट्रेटर की जरूरत नहीं है, किसी एक दीवानी की जरूरत है, कोई ऐसा जो कि बाकी लोगों को भी इंस्पायर कर सके, जो एक नया आइडिया लेकर आए, जो सब को एकदम लोग लोग बोले चलो कुछ करते हैं, तो ऐ
[00:08:31] दरिया हो या पहाड हो टकराना चाहिए, जब तक न सांस तूटे जिए जाना चाहिए, यूं तो कदम कदम पे है दीवार सामने, कोई नहों तो खुद से उलज जाना चाहिए,
[00:08:45] चौराहे बाग बिल्डिंगे सब शेहर तो नहीं, कुछ ऐसे वैसे लोगों से आराना चाहिए, अपनी तलाश अपनी नजर अपना तजर्बा, रास्ता हो चाहे साफ भटक जाना चाहिए,
[00:09:08] चुप चुप मकान रास्ते गुमसुम निढ़ाल वक्त, इस शेहर के लिए कोई दीवाना चाहिए, बिजली का कुम कुमा नहों काला धुआ तो हो, कुम कुमा वो डेकोरेशन के लिए जो लाइट से इस्तेमाल के जाती हैं, गोल से वैसल टाइप की होती हैं और अंदर लाल बती जिसके होती है, तो ये जो बल्ब्स होते हैं इन्हें कुम कुमा कहते हैं,
[00:09:36] बिजली का कुम कुमा नहों काला धुआ तो हो, ये भी अगर नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए, अब आप सुनिए एहमत मुश्ताख का ये शेर के हम उनको सोच में गुम देख कर वापस चले आए,
[00:10:04] वो अपने ध्यान में बैठे हुए अच्छे लगे हमको, ज्यादा एक्स्प्लेइन करने की जरुवत नहीं है, गुम का मतलब यहां है completely lost in thoughts, शायर किसी से मिलने आया था, लेकिन देखा कि वो अपने ध्यान में बैठे हैं, तो उन्हें डिस्टर्ब करना उन्हें ठीक नहीं लगा, तो डिस्टर्ब करने के बजाए चुप चाप वो वापस चले आए, and honestly मुझे लगता है उन्होंने बिल्कुल सही किया, आप किसी deep thought में, किसी बहुती deep analysis में गुम हो, और कोई आकर आपसे बोल दे, कि फलानी चीज़ कहां रखे, कितना खुस्सा आएगा,
[00:10:40] आगे बढ़ते हैं, एहमद फरास का शेर सुनिया बाप, हम तेरे शौक में यूँ खुद को गवा बैठे हैं, जैसे बच्चे किसी तेवहार में गुम हो जाएं, इस शेर की सबसे खुबसूरत बात है, उसकी तश्बीह, फराज महबत को किसी दर्थ या खुर्बानी से कमपेर नहीं कर रहे हैं, हम यों कह रहे हैं, कि हम महबत में वैसे गुम हो चुके हैं, वैसे कोई बच्चा तेवहार में गुम हो जाता है, खुदाना खास्ता बच्चे किस सना गुम होते हैं, गुम मतलब अपने माबाप से कैसे अलग हो जाते हैं,
[00:11:10] जब वो ओवर्वेल्म होकर कहीं आगे निकल जाते हैं, रंगों का पीछा करने लगते हैं, वैसे भी जब फेस्टिवल्स में आते हैं, बच्चे किसी भीर भाड की जगा पे आते हैं, जहां करतब दिखाय जा रहे होते हैं, हर तरफ कुछ नया देख रहे होते हैं, हर चीज एक्साइटिंग लग रही होते हैं, curiosity, curiosity. तो मुझे लगता है, यह फराज इसमें बहुत ही healthy relationship की बात करे हैं, हम तेरे शौक में यूँ खुद को गवाँ बैठे हैं, जैसे बच्चे किसी तेवहार में गुम हो जाएं, यानि I'm so interested,
[00:11:39] I'm so curious about you that I've kind of lost myself. See, the right person brings out your playful side. आप खुल के हसना शुरू कर देते हैं, you become a little more curious about everything, especially about them. आपके जो guards हैं, वो नीचे गर जाते हैं, you don't feel like you're constantly editing yourself before speaking. इतना ज्यादा आप खुद को filter करके नहीं बोलते हैं. और जब किसी ऐसे के साथ हूँ आप, कि ऐसा लगे that you are in a minefield,
[00:12:08] कि कहीं भी चलके गलत पैर कहीं पढ़ गया, तो महीं उड़ जाएंगे आप. या हर बात सोच कर बोलनी पड़े, हर reaction measure करना पड़े, या सिर्फ इसी बात का खयाल रहे कि भाई, हमारे मुझे कुछ ऐसा ना निकल जाए, कि इनका mood खराब हो जाए, और हमारी शाम खराब हो जाए,
[00:12:37] वो शुरू-शुरू की महबबतों में जो होता है, पट लगातार, मुसलसल तोर पे अगर आप सहमें रहेंगे, उनकी presence में, so you know the answer. तो फराज यहां कहते हैं, कि महबबत में गुम होना, तेवहार में गुम हुए बच्चे जैसा होना चाहिए, He was a little lost,
[00:13:09] अगले हफ़ते हुए, अगले हफ़ते हुए हम गुम से बनते हुए एक वर्ट की बात करेंगे, तब तक के लिए keep thinking, कि वो वर्ट क्या होने वाला है, you take care of yourself, अगले हफ़ते मिलती हूँ, खुदाहफिस.


