As another summer pushes temperatures to record highs, darja-e-haraarat , meaning 'degree of heat', has become part of our daily vocabulary. We hear it in weather reports, worry about it when a child feels warm, and increasingly experience it in a world shaped by climate change.
On this week's Urdunama, we explore the Urdu word haraarat. While it literally means heat or temperature, poetry gives the word a far richer and tender life. it can signify warmth, affection, vitality, conviction, and even the spark of resistance.
Through verses by Faiz Ahmed Faiz, Muztar Khairabadi and Majaz Lakhnavi, Fabeha Syed traces the many shades of haraarat in Urdu poetry and reflects on how a word associated with heat can also illuminate the warmth that binds, heals and moves us to action. Tune in.
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[00:00:05] The Quint पर आप सुन रहे हैं, गर्मा-गर्म एपिसोड अफ उर्दू नामा, मेरा नाम है फबिहा जयद, मम्ता के साए में से हरारत अगर निकालें तो ये लफ्स आपने मुम्किन है किसी उर्दू नियूस बिलिटिन में जरूर सुना होगा, शदीद गर्मी की लहर जारी, दर�
[00:00:24] दरजाये हरारत यानी टेंपरेचर, और आजकल तो लगता है कि हम सब पूरी दुनिया दरजाये हरारत के हिसाप से ही जिन्दगी गुजारी है, हर साल ऐसा लगता है, गर्मी पिछले साल से थोड़ी ज्यादा है, और क्लाइमिट चेंज के इस दौर में हरारत सिर्फ एक ल
[00:01:08] जो सीने में ठंड़क उतार देती है, गर्मी बाता है, और वहां वो वांब्त जो सीने में ठंड़क उतार देती है, The warmth of love, the warmth of memory, the warmth of closeness मुस्तर खेराबादी का शेर है लिखते हैं
[00:01:36] न कोई दाग न धबा न हरारत न तपिश चांद सूरत से भी ये माहजबी अच्छे है सबसे पहले माहजबीन यानि चांद जैसी पेशानी जबीन यानि माध था पेशानी चांद जैसा चहरा रखने वाली हसीन औरत अब देखिए उर्दु शायरी में हुस्न को समझने के लिए चांद और सूरज का जिक्र बहुत कॉमन है
[00:02:06] लेकि मुस्तर खेराबादी यहां पे उल्टा काम करें वो कह रहे हैं कि जो माजबीन है यह चांद और सूरज से भी बहतर है हमारे लिए वजे क्या दे रहे हैं?
[00:02:18] यहां हरारत का मतलब और सूरज को देखिए और जो ब्रिल्लियन्स है जो चमक है इडिस व्जे और सूरज को फालज उसका है यहां हरारत का मतलब वो गर्मी है जो बेचैन कर देती है
[00:02:47] जला देती है जो सखत होती है यहां हरारत वॉम्ड नहीं है बलके स्कॉशिंग हीट है अब हरारत के एक और मतलब पर आते हैं असरार नहीं हुछ का गी मुज़री में इससे को आवाए मुज़ाति यालू है, उसका आफ यह हिस्से सुने लिगते हैं
[00:03:09] हम जिसम में टाक्त रेक्टे हैं, सीनों में हृरारत रेक्ते हैं, म secured हम एंडस्या Ouchem हम सिर्फ मेहनत करने वाले लोग नहीं हम महसूस भी करते हैं हरारत being alive की यहां पर मिसाल है
[00:03:38] यानि जब आप जिन्दा होते हैं हम चीज़ें महसूस करते हैं we are so alive हमें गुसा भी आता है हम नाइनसाफी भी बरदाश नहीं करते हैं हमारे दिल में उमीदे भी हैं ख्वाहिशे भी हैं और जब वो तूटती हैं तो हमें बहुत तकलीफ होती है और इसी बात का सुबूत अगले मिस्रे में मिल जाता है हम अजमे बगावत रखते हैं तो यहां हरारत का मतलब बुखार टेंपरिचर से नहीं है यह वो अंदर की गर्मी है, जोश है, पाशन है
[00:04:05] जो इनसान को बेहिस, इंसेंसिटिव नहीं होने देता है वो जजबा जो कहता है कि जो गलत है वो गलत है So in a way, मजाज, मजदूर को सिर्फ एक वरकर के तौर पर नहीं देख रहे हैं वो कह रहे हैं, this is a thinking, feeling human being जो नाइनसाफे पर response देता है, बगावत करने के capable है इसके साथ नाइनसाफे मत करिये
[00:04:33] अब मैं आती हूँ अपनी पसंदीदा नजम पर जिसका उन्वान है, मेरे हमदम, मेरे दोस्त, वाई फैज, अमत फैज जिस शेर की मैं बात करना चाहरे हैं, जिसमें हरारत है वो पढ़ूंगे तो सही, लेकिन उससे पहले थोड़ी आपको ओवर्वियू समझाना चाहरे हूँ इस पूरी नजम का वरना अगर सीधा हरारत पर आ जाएंगे, तो फिर नजम का मतलब नहीं समझाएगा, कुछ हासल नहीं है फिर ये नजम पढ़ने से नजम का उन्वान है मेरे हमदम, मेरे दोस्त
[00:05:03] और शुरू से आखर तक एक ऐसे दोस्त की गुफ्तगू है शायर ऐसे दोस्त से मुखातिब है जो किसी गहरी उदासी, किसी थकन, किसी डीप, इंटेंस हार्ट ब्रेक से जूज रहा है किसी बोच से गुजर रहा है फैज की जो नजम है वो शुरू होती है विद हिम सेंग कर मुझे इसका यकी हो मेरे हमदम, मेरे दोस्त
[00:05:34] यहां जो शायर है, फैज अमद फैज यह कही नहीं रहे है कि मेरे पास तुम्हारे दुक का इलाज है मेरी फ्रेंडशिप गान हील यू अगर मुझे यकीन हो कि मेरी महबत, मेरी रफाकत, मेरे अलफाज, मेरे गीत तुम्हारा दुख कम कर सकते है तो मैं यह काम सारी जिन्दगी करता रहा हूं तुम्हारा दिल बहलाता रहा हूं तुम्हें दुनिया की खुबसूरतिया दिलाता रहा हूं
[00:06:02] मैं तुझे गीत सुनाता रहा हूं हलके शीरी आप शारों के, बहारों के, चमनजारों के गीत और फिर गीतों की वो काटलॉग खोल देते हैं वो लिस्ट खुलने लग जाती है और मुझे ऐसा लगता है कि इस पूरे हिस्से में जिसमें वो गीत गिनवा रहे हैं इसमें फैज एक ही बात को मुख्तलिफ तस्वीरों में दिखाते हैं चांदनी हो फूल हो महबत हो या फिर गर्म हाथों की हरारत हो अभी आउंगी ये सब एक एक करके पढ़ओंगी और समझाऊंगी
[00:06:31] इन सब में असल में जो नर्मी की कुवत है जो वाम्त की ताकत है उसकी बात की सारे उसी के सिंबल्स हैं पार अफ जेंटल टच पार अफ हरारत मैं तुझे गीत सुनाता रहूं हलके शीरी आप शारों के बहारों के चमनजारों के गीत आमदे सुब के महताब के सैयारों के गीत तुझ से मैं हुस्न महबत की हिकायत कहूं
[00:07:00] कैसे मगरूर हसीनाओं के बर्फाप से जिस्म गर्म हाथों की हरारत में पिखल जाते हैं ऐसा लग रहा है फिजिकल इंटिमसी की बात हो रही है
[00:07:25] The image is about जिस्म, गर्म हाथ, हरारत, पिखलना These are bodily images. It is not at all about seduction. It is not at all about pleasure. शायर यहां transformation की बात कर रहे हैं Cold से warm की तरफ, कैसे मगरूर हसीनाओं के बर्फाप से जिस्म एक तरफ है बर्फाप जिस्म, बर्फ की तरह ठंडे जिस्म और दूसरी तरफ है गर्म हाथों की हरारत
[00:07:55] Not heat, warmth, warmth of affection तो क्या बता रहे हैं हाँ पे फैस? ठंडे से warm की तरफ जा रहे हैं It is a process of healing. यह transformation healing की दिखा रहे हैं इसी को फिर फैस गीतों के नाम पर image after image पेश करते हैं फिर वो कहते हैं कैसे एक चहरे के ठहरे हुए मानूस नुकूश देखते देखते यक लखत बदल जाते हैं
[00:08:21] इससे मुराद है चहरे के वो नक्ष जो हमें अच्छी तरह मालूम है familiar face एक ऐसा चहरा जिसे हम रोज देखते हैं मुझे ऐसा लगता है यहां फैज एक बहुत गहरी बात कर रहे है मानूस नुकूश यानि वो चहरा जो आपको इतना मालूम हो गया है उसमें कोई नई बात आपके लिए नहीं रह गया है यानि सब टैगनेंट है और पिर भी देखते लगत बदल जाते है यानि महवत और अपनायत की हरारत में वोही पुराना चहरा दोबारा नया हो जाता है
[00:08:48] जहां आपको लगता है कि इसमें कुछ नया बाकी है यह फिर कूछ ऐसा होता है कि जब सारे नुकूश यक लखत बदल जाते हैITH renewal है, there's a kind of renewal जो एक re-discovery है उसकी बात हो रही है इसी नजम को आप ले लीजे ना कितनी बार पढ़ा है मैंने podcast पर हर बार एक नई परत एक नई layer खुलती है कैसे एक चेहरे के ठहरे हुए मानूस नुकूश देखते देखते
[00:09:16] यक लख्त बदल जाते हैं आगे लिखते हैं किस तरहां आरिज-े-महबूब का शफाफ बिलौर यक बयक बादा-ए-एहमर से दहक जाता है यहां आरिज यानी चीक्स गाल और शफाफ बिलौर यानी क्रिस्टल की तरहां साफ और चमकदार फैस कहते हैं कि महबूब के गाल अचानक सुर्ख हो उटते हैं बलश करने लगते हैं लेकिन फैस यहां पर बलश
[00:09:45] बलश वर्ड उन्हें कहना मन्सूर नहीं था इसलिए वो कहते हैं कि क्रिस्टल जैसा चहरा अचानक लाल शराब की रंगत से दहक उटता है यक बयक बादा एहमर से दहक जाता है देखें यहां भी वही बात है कुछ बदल रहा है संथिंग इस ट्रांसफॉर्मिंग हरारत रंग पैदा कर रही है एक ठंडक भरा क्रिस्टल है उसमें रंग आ गया भई उसमें जान आ गया फिर आगे वो लिखते हैं कैसे गुल्चीन के लिए जुकती है खुद शाख गुलाब
[00:10:14] किस तरहा रात का एवान महेंग जाता है गुल्चीन यानी फूल तोडने वाला अब जाहिर है कि गुलाब की शाख वाखी किसी के लिए जुकती तो है नी लेकिन फूल खुद आगे बढ़कर अपने आपको पेश कर रहा है कैसे गुल्चीन के लिए जुकती है खुद शाख गुलाब और फिर वो कहते हैं रात का एवान महेंग उटता है एवान यानी एक बहुत बड़ा सा मकान
[00:10:54] तो कभी-कभी एक जैन्मिन कनेक्शन से पूरा आटमस्फियर बहतर हो जाता चाहे वो आपके अंदर का हूँ या बाहर का हूँ योई गाता रहूं गाता रहूं तेरी खातिर गीत बुनता रहूं बैठा रहूं तेरी खातिर यानि अगर मुझे यकीन हो कि सारी खुबसूर्टीय जो मैं गिनवा रहा हूं ये सारी हरारत
[00:11:25] पर मेरे गीत तेरे दुख का मुझावा
[00:11:56] यहाँ मेरे लिए विरूख के लुख और पहर हुआ। पूरी नजम का मरकज है
[00:12:26] चाहे कितने गीत प्यारे प्यारे सुना दू वो तुम्हारा ट्रीटमेंट नहीं कर सकते हैं तुम्हारे दुख का फैज आमद फैज रिजेक्ट नहीं कर रहे हैं पोईट्री को गीत यानि खुबसूरा चीज़ों को गिनवाना इस गीत जिसके वो बार-बार बात करें वो मुहाबत को, अपनी अफेक्शन को, अपनी अटेंशन को हर्गेस भी कमतर नहीं बतारे हैं बलकि वो विलिग्निस दिखा रहे हैं
[00:12:55] वो हरारत के ऐहमेद से उनकार नहीं कर रहे हैं बलकि ओफर कर रहे हैं generously in fact पहले वो हमें उसके सारी खुबसूरतियां गिनवाते हैं वाम्त की लेकिन फिर वो ये भी आद दिलाते हैं कि चाहे कितनी ही वाम्त आपके आसपास हो कुछ जखम इतने गहरे होते हैं कि उनके लिए कोई external source of हरारत काफी नहीं होता है और शायद इसलिए मुझे नजम इतनी पसंद है क्योंकि इसमें बड़ा ही practical एक तरीका वता रहे हैं अपने घमों को
[00:13:24] heal करने का हरारत को celebrate भी किया है और जोर भी दिया है कि the warmth of love, friendship, care, companionship all those things are fine and they make life bearable in the truest sense even when they cannot completely heal but the real healing always comes from within वो जो जर्रा है, जो surgeon है जिसकी बात कर रही है वो इस जहां के किसी जी रूख के
[00:13:53] कबजे में नहीं किसी के पास नहीं है, हाँ मगर तेरे सिवा तेरे सिवा, तेरे सिवा, तेरे सिवा तू who's going through so much मैं पसीने पसीने हो गई अगर आपको तस्वीर दिखाती अपनी इस आल अबाउट healing begins from within वो हरारत आपके अंदर है वो ही दवाई है वो ही जर्रा है जिसकी आपको जरूरत है accidents होते हैं गाव सबके पढ़ते हैं उसमें कोई बड़ी बात नहीं है
[00:14:22] लेकिन इलाज वक्त पे करना वो जरूरी है और वो इलाज आपके पास है तो ये तो थी हरारत की बात अगले एपिसोड में होगी शरारत की बात खयाल रखें, खुदा हफिस


