Guru Dutt's films continue to resonate decades after they were made, but what was the man behind the camera really like? In this episode of Urdunama, we explore the life, cinema, and legacy of Guru Dutt through the unique lens of Dastan-e-Guru Dutt. Joining us is India's first female Dastango, Fouzia Dastango, who brings this celebrated performance to audiences across the country.
From the melancholy of Pyaasa and the loneliness of Kaagaz Ke Phool to Guru Dutt's collaborative spirit, his portrayal of women, and the enduring relevance of his work, this conversation offers a fresh perspective on one of Indian cinema's greatest auteurs. Tune in and click here to watch Dastan-e-Gurudutt.
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[00:00:06] The Quint पर शुरू हो गया है, Urdunama, मेरा नाम है Fabeha Sayyad. इस podcast पे हम शेरोशारी करते हैं, poetry की बात करते हैं, literature की बात करते हैं, लेकिन आज हम बात करने वाले हैं सिर्फ और सिर्फ सिनमा की. आज हम ऐसे इनसान की बात करेंगे जिसके सिनमा में social issues को बहुत ही sensitive कलम के साथ लिखा
[00:00:27] गया है, और वो इनसान है गुरूदत. गुरूदत पे बहुत सारे articles लिखे जा चुके हैं, research हो चुकी हैं, उन पे बहुत special shows बन चुके हैं. लेकिन अगर आप पूछेंगे भई, गुरूदत पे कभी दास्तान कही गई है, तो हम कहेंगे बिल्कुल. और उस दास्तान को ज
[00:00:55] आप हमारे लिए वक्त निकाल पाई हैं. तो वेलकम टू अर्दु नामा. तो पहले तो मैं आप से जानना चाहते हूं कि दास्तान लिखी किसने है, प्रोड्यूस किसने किया है, तेल इस अ लिटल अबाउट दास्तान, फिर हम बात करेंगे गुरूदत साहब की. इसको दा
[00:01:24] आपना रहे जिसकी इसकी इसकी एक वजन हो जिसका जिसे हम कहते हैं, तो थो निए अगर आप प्रिसर्च करना हैं पूरी दुनिया भर की तो आश्या बद्रा दोस्त हैं तो मैंने उनसे रिक्वेस्ट करी कि के वाइड यू काम एज रिसर्च पार्टन तो रिसर्च और र
[00:02:25] विकास जलान बहुत ही इमोशनल लेंस से लिखे गए हैं, बनाए गई हैं और यह हमें इमोशनल इसलिए लगती हैं क्योंकि इसमें गुरुदत का अपना जाती दर्द है
[00:02:40] गुरुदत के अपने जाती जिन्दगी का रिफलेक्शन हैं
[00:03:08] और काम करने लगे तो उसमें इतना गहरा और इतना डीप चला जाता हैं कि वह अपने आपको भूल जाता हैं गुरुदत के साहथ भी यही था जैसे आपने कहाँ गृफ लोग बहुत बार लोग गुरुदत को गृफ के साहथ जोड़ते हैं लेकिन मैंने जब गृुदत सहाब पर रिसर्च करने शुरू करी गृफ उनकी शक्सियत का एक हिस्सा है वो पूरा हिस्सा नहीं है अगर आप दास्तान में भी देखें तो दास्तान में मैंने उनके बश्पन की बात की है
[00:03:38] अगर आप Mr. and Mr. 55 अगर आपने देखी हो और आप उस टेरेक्टर को याद करें क्या आपको उस किरदार को देखते हुए लगता है कि इस इनसान के दिल में कहीं दर्द है कहीं पे गृफ है कहीं अपनी जिंदगी के बहुत ही अंधेरे वाली जिदी गुजा रहे नहीं या बाजी अगर आप तो अगर आपको इसे इंकार नहीं कर रही गरीव से मैं मैंने बिल्कुर इंकार नहीं किया में दास्तान में इसका जिकर है
[00:04:02] लेकिन उनकी जो आखिर के फिल्मे थी वो गृफ पर ती वो डाग थी तो असल में क्या हुआ कि उनका ज्यादा गहरा असर हुआ हमारे उपर हम वही याद रख पाए जो आखिर की बात ती गुरुधत मतलब बहुत हसते थे ऐसी बात नहीं है गुरुधत ऑमरेड बनाते �
[00:04:20] और गुरुधत पतंग उडाते थे काफी रूमैंटिक आदमी थे असी बात भी नहीं है तो यह जो चीजे हैं यह जो शक्सियत के पहलू है मुझे लगता है कि इनके बारे में बात होनी चाहिए फवया और यस वो बहुत उदास थे और वो लोनली थे बिसिक्ली अकेला पन
[00:04:39] और उनकी शक्सियत का हिस्सा रहा बच्पन से ही ऐसा नहीं कि एक उमर के किसी पड़ाओ पर आखर अगे जादू की तलाश में हो थे वह हमेशा एज ए रहते तलाश में रहते ती तलाश जो है जितनी गहरी होती जाती ती और उन्हों नहीं को बहत तकलीफ थी समाज की ची
[00:05:09] इसे लिए पर आखर अगे जो रहा था जो घट रहा था उससे उन्हें बहुत तकलीफ थी येस और वो जो तकलीफ है जिसके आब बात करी हैं उनके प्रोटागनिस्ट में इतनी दिखती है ये अकेला पन उनका ट्रेडमार्क बन चुका है उनके हीरो इतने तने तनहा क्यो
[00:05:26] हैं प्यासा में विजय कागस के फूल में सुरेश सिना का जो कारेक्टर है और सहाबी बी और घुलाम में वो प्रोटागनिस्ट मीना कुमारी चोटी बहू ये अपने-पने तरीके से बहुत अकेले हैं ये सारे कारेक्टर्स तो ये जो गुरुदत बार-बार एक तनहा इं
[00:05:54] अगरे का ज़ बार एक फ़ास्ता चाहरी उनकी बेगब के साथ जोन का रिष्ता था उनके दोस्तों के साथ जोन का रिष्ता था मैंने उस पर जाध आ जान दिया है खास्त दौर से अगर आप मेरी दास्तान जब आप सुनाएंगी लोगों को तो उसमें काफी एन END डोटस जो हैं उनके इस्तिमाल किये हैं, उनके इस्तिमाल किये हैं, जिससे हमें गुरुदत को करीब से देखने का ज्यादा मौका मिले।
[00:06:15] तो ये तो समझ आता है कि गुरुदत वाज़ अगर बिल भी जाये तो क्या है? ये असल में एक एंथम बन रहा है.
[00:06:46] कि ये डुरुदते बिलाएं जानी जाहे है जाता है तो ये ख्याय जाता है? वह जाता है कि वहाई��가 देखने का गुष्रे、 वेहा कोशलव से इस आप अगह जाना है?
[00:07:14] वो जानता था कि गुदृदत को क्या चाहिए और उसके बाद फबया यह हुआ कि यह एंथम बन गया ऐसा नहीं है कि इससे पहले सोशल इस पर अवाज नहीं खाई गई सुजाथा आई, बीमल रॉय को हम नहीं बूल सकते बढ़े लोग पिए लुट बड़े लोग जो लगतार और उस जमाने बड़े अच्छी बाती फिर लगतार लोग वगतार लोग उठा रहे था लगतार और बहुतारी फिल्मे थी यह एंथम बन गया वह अधर ही यह बमल भी जाये तो क्या है, वो एक क्रेडित हमें गु烦ाफ को देना चही है
[00:07:41] कि बात उससे पहले ही हो रही थी, ऐसा बात ही कि नाया बात ही होने अचानक से एक दिना और उन्हें आपनी आपनी राइटर से लिखवा दी और वो आज एंथम है, मैं उसे एंथम कहती हूं
[00:08:08] कितना फैसेनेटिंग है न ये गुरुदत ने किसी फिल्मी बैक्राउंड के बिना अपनी जोर्नी स्टार्ट की, और वो गालबन टेलफोन ओपरेटर थे शुरुआत में? वो खॉर्योग्राफर भी थे हैं, मतलब उस बंदे के कोई फॉर्मल टेनिंग नहीं थी लेकिन वो जुनून आपको हर चीज सिखा देता है अगर दिलिप कुमार जी का भी नाननों लेकिन वो फॉर्मल एक्टिं की ट्रेनिंग नहीं थी लेकिन वो अपने आप में युनिवर्स्की बन गये
[00:08:38] बिल्कुल और मैं यह नहीं नहीं कहते हैं, नहीं नहीं नहीं चाहिए अगर आप चौदवी का चांद हो या आफताब हो वो अगर आप गाना देखें उसमें आप कैमरे कामरा वोग देखें, कुछ नहीं हो गाना मतला वो बस बंधी बैठी हुई है लेकि उसको भी इसको भी स्कदर हसीन मिलाने का क्रेडिट किसका जाता है
[00:09:08] गुरुदत का जाता है अगर आप या आप जब गुरुदत ऐसे हाथ पकड़ के खड़े होते हैं अगर प्लास सीन है वहाँ पर यह तखतों यह ताजोग की तुनिया वो जो सीन है ठीक है वो जो शौट लिया एंगे तो यह जो चीजे है यह गुरुदत के जुनून का नतीजा थी कहते हैं उन्हें खूब से खूबतर की तलाश रहती थी और यह उनका क्रेड़िट है कि ना तो उन्हें कोई ना एक्टिंग सीखी ना सिनेमटोग्राफी सीखी ना डिरिक्शन सीखी कुछ नहीं सीखा उस बंदे ने
[00:09:39] लेकिन जो कहते हैं ना करत विद्या उन्हें करते-करते आ गया और यह बहुत बड़ी बात है यह बहुत बड़ी बात है अच्छा गुरुदत के बारे में कहा जाता है कि वह अपनी टीम पर बहुत ट्रस्ट करते थे और यह एड़ अ सॉलिट टीम इस डी बर्मन पर्फिश लाइख गरते थे अबरार अल्वी को वह बहुत पसंद करते थे उनकी कहानिया वह लिखते थे म्यूजिक और लिरिक्स का भी अलगी उनका एकोसिस्टम था
[00:10:06] स्डी बर्मन म्यूजिक देंगे और साहर जो है वह लिखेंगे और इस टीम ने घ्री वेश जो एक अगर आज पस आजब और अज बन रहा है तो आपके हिसाब से वह कहां बन रहा है तो यहां पर फिल्म से ज्यादा मुझे फबया मुझे जो वेब सीरीज जो आ रही है इस वब तो वह ज्यादा मुझे लगता है कि
[00:10:39] जैसे कि अभी आया है अमेजॉन पे वो ग्राम चिकसालिक वहाँ पर क्या खालत हो रही है जो एक टॉक्त है
[00:11:01] एक और चीज मैं कहाँँगी फबया दॉक्त है तो गुदाद सहाब के बारे में कि अगर जो पुबसूरत बात ही थी कि अगर जॉनी वाकर को याद थी कि अपने डायलोग इंपरोवाईस कर थे थे तो गुदाद सहाब की यह इंस्ट्रॉक्शन सी कि जब जॉनी वागर अप
[00:11:33] अगर वाईदा रहाएस कर सकते हैं वो करते थे जैसे अगर वहीदा रह्मान नहीं यह बात कहती कि मैं इस ड्रेस में जरा अतलब कमफरेवल नहीं हूं तो जो कहते हैं ओक ड्रेस बदल दीजे और ड्रेस को और किसाब से कर दीजे तो यह बहुत बड़ी फोबी मुझे ल�
[00:11:57] जो कि अगर बाइस कर दीजे कर दीजेए वाज़कि एख रगा राज़कि रख रख अपर लिए प्रवाज़कि आप दुनिया बदल गई हैं चीजे बदल गई हैं हमारे टीम मेरी टीम यह कोई बदल जाती हैं बेस्ट अपोर्शन्टीज मिल एज लोग आगे बढ़ जात उस जमाने में दिखिए हैं यह लोग टिके रहे एक दूसरे के साथ किसी बात नहीं कि फिल्में फ्लॉप नहीं हुई या बड़ा सुपरिटी काम किया लेकिन वो टिके रहना वो ट्रस्ट वो टीम वो चुमबक की तरह यह लोग एक दूसरे के साथ लगे रहें
[00:12:34] पाइनियर मैं भारत की पहली महीला दास्तान वो आर्टिस्ट हूँ इग्जाक्ली तो इंडिया की जो दास्तान है इंडिया की जो कहानी है उसमें आप फीमेल लीड है विच इस हूज गुरदत की फिल्मों की जो फेमिनिसम है उसकी बात आप करना चाहती हूँ मैं आपसे प्यासा में गुलाबो का केरक्टर है और साहबी भी गुलाम में मीना कुमारी जह केरी करेक्डर है छुटी बहुता यह सपपोर्टिंग कारेक्टृ Esta नहीं है चाह्शम प्रोटजिंस बहुते लैड़ और इमोशनली पाफ़ूल केरेक्टर थैं इन गारेक्टर को आप किस
[00:13:06] तो इस दास्तान में तो मैंने इतना जिक्र नहीं किया है क्योंकि इतनी चीजिघी थी फबया और मुझे 1.5ग में एक भी आपने आप में उनके क्राफ्ट की बात ज्यादा करिये अपने अपने आप में लेकिन हाप परसनली मुझे लगए लगता है मुझे गुरुदा तेक �
[00:13:19] वह जगे प्रमीनिस आदमे थे उस वह भी आप अगर आप उनके किरदारों को देखिये, जो भी उनके किरदार थे वो ओड़ते अपने आप में चाहे हो बड़ी चोटी बड़ी बढ़ी बड़ी जो भी चैरक्टर था लेकिन वो अपने आप में अपनी आवाज उठा रही थ
[00:13:47] उनकी ओरते वो नहीं थे जिए उनकी आवाज आप दबा पाएं चाहे उसने अपने अपने शोर से अपना हक मांगा चाहे वो माला सेना किरदार अगर आप देखे और भी बहुतार किरदार जाहे आप मिस्टर शुप्टी पाइप में आप उनको देखिए मधूबाला को अ
[00:14:21] एक अपने कानरी को बाएं बहुतां दयार अपने करने चाहे पने किरदारों को अपने हीरों की अपनी हीरों की शेड़ों ने चुपाया काफ यूंक हीरों नी लिएेंगी की यूदार इक जदाओं बाएंगी So let's talk about that, वो कैसे शुरू हुआ?
[00:15:14] वो कहने लगे वहीदर रहान, एक और चीज थी, कि गुरूदत को उर्दू, जो लोग जानते थे, यह बात बड़ी है, उनको यह था कि उर्दू जानता है, उर्दू जानता है, वो खुल उर्दू नी जानते, लेकि उनको एक बड़ी रगबत थी, उस तरह के लोगों से, उनको वहीदर रहान, इसको तो उर्दू भी आती होगी, बस कर करी मेरी मुलाकात कराओ उनसे, तो उर्दू वाना भी एक एंगल था, गुरुदत की जीदि, वो उर्दू बहुत पसंद करते थे, और वो हरेक से, बसक्ति उर्दू आती हैं,
[00:15:43] मतब जबान से उनने काफी प्याता, तो अगर जबान की बात करें, तो दास्तान गोई जो आर्ट फॉर्म है, वो रिवाइव किया गया है, लेकिन मेरे ख्याल में, जिस दौर में इस डाइंग आर्ट को रिसरेक्ट किया है, उसमें पहले से इतनी distractions है, distractions की बाद इसलिए करें हैं, बिकर दास्तान गोई एक long form art form है, और हमारी जो audience है, उसको short form की आदत हो चुगी है, जिसमें reels हैं, short form videos हैं, और इन सब के hooks होते हैं,
[00:16:11] जो अपनी audience को एकदम hook कर लेते हैं, आपके हिसाब से एक अच्छी दास्तान गोई का जो hook है, वो क्या होता है? ये मैं इसके दो जवाब आपको दूगी, ये challenge है, बिल्कुल है, जब हम गुरुदत पे दास्तान हमने बनानी शुरू गरी है, हम ऐसे लोगों से बात कर रहे थे, अच्छा, वो संजीदत के दादा थे, तो हमारी ओडियन्स ये है, अगर ये आए तो, क्योंकि हमने कमानी में शो किया था, किक्किट शो था,
[00:16:40] तो अमूमन तो भई, जो दास्तान गोई के रसियां है, वो आये थे, जो गुरुदत के फैन थे, जो आये थे, लेकिन कोई जमान लोग भी आये थे, तो उन्दा ही कहना था, कि हमने ऐसे कोई चीज पहले नहीं देखी, काफी बार, ये स्ट्रगल है, और दास्तान मुई को इवाल होना चाहिए, वक्त के साथ, जार हमें वापस एक डाइंग आये बनना है, लेकिन लाइव शो मुझे लगता है, कि हम दोनों पहलों को साथ लेके चलना होगा, फवया में, जैसे जह मैंने गुरुदत पे दास्तान करी, आपको पता है, मैंने अलग-अलग ऐस्परिमेंट करे,
[00:17:10] जैसे आपको प्यान साथ, जिसमें लेकिन पहलों पे, जैसे जिन लेकिन करी हां, जाने पॉँ सुना रही है, जैसे इसे मैं और प्यान गृध आया है, टु शुन दाजिते लिगांट करीने लेक अार एकिन कर एक दाटम एट, क्यों कि गुरुदत को लोगों तक मौचा मकसद यह है यह जो बच्चें जो कह रहे हैं कि यह संजेदत के दादा थे तो इनको बताना है कि गुरुदत कौन थे
[00:17:39] तो गुरुदत और संजेदत के खांदान को यह कर दिया है कि इनसान ने, very good अच्या, आप लाइप परफॉर्म करती हैं आप लाइप वांड़ च्छीए परण हैं कि यह अच्छीख के गुर्ण पर्फोर्न के लिएफ अच्छीएं उनसे आप किस तरह हैं इनसे आप वैजका करती हैं बिल्कुल यह है कि जब हम बारबार कहते हैं
[00:17:58] आपना मुबाई साइलें, गया जिए प्ली साइल्किन कर दिए लिखेंगा नोग तो यह जो आते हैं तो आदमी की अगर सालेंगी जलती है अगर जलती है
[00:18:24] तो लेकिन हमें इसके पुर्ण इसके पुर्ण भी रखनी होगी रखनी होगी, कि जो पुर्ण चाहते हैं एक निगा निए बड़ाशियाद प्रूसर और दूसरा रोप दास्था गोई का होना चाहिए और काफी आप अप अपर आप अपर अपर अचीज ओगा लोग वापस �
[00:18:57] दो किया होती है तो लोग धीरे ऐसे हुआ है कि लोग पिछली चीजों की तरफ जा रहे हैं और इंस्टरराम के पड़ारी है दिखारी दिखा रहा है, कोई अपनी अम्मा का उगलदान दिखा रहा है, कोई कुछ दिखारहे है आज ऐसा लगा जैसे गुरुदत पर मास्टर क्लास अटेंड कर लिये मैंने
[00:19:25] बलके आशुट से ऐसा लग रहा है कि किसी रिष्टेदार के बारे में हम दोनों मिलके बात कर रहे हैं So, thank you so much and we are so proud कि हमारी पुरानी दिल्ली से इंडिया की पहली female दास्तान को वाती है अब पहाडी भोजला की हैं So, thank you so much for making us proud शुक्रिया फब्या बहुत मौबबत यापकी मौबबत है और हम भी बहुत प्राओड है आपको लेके बहुत अच्छा काम कर रही है और आप भी अपना खयाल रखें अगले हफते मिलते हैं खुदाहफिस


