इन्द्र और वृत्रासुर के बीच हुए देवासुर संग्राम के समय जब इन्द्र ने ऋषि दधीचि की अस्थियों से बने वज्र से वृत्र का वध कर दिया तब बचे हुए असुर अपनी जान बचाने के लिए समुद्र के अंदर छुप गए।
इन्द्र समेत सभी देवताओं ने अगस्त्य ऋषि की शरण ली और उनसे इस समस्या का समाधान माँगा।
देवताओं की मदद करने के उद्देश्य से अगस्त्य ऋषि ने अपनी दैवी शक्तियों का प्रयोग करते हुए समुद्र का सारा जल पी लिया।
असुरों को समाप्त करने के बाद जब देवताओं ने ऋषि से जल को पुनः समुद्र में छोड़ने के लिए कहा तो उन्होंने अपने मूत्र के रूप में सारा जल वापस निकाल दिया।
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