पुरी के श्रीजगन्नाथ मन्दिर के साथ कई अविश्वसनीय कथाएं जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि मंदिर की पतितपावन ध्वजा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में ही लहराती है। दिन के किसी भी समय मंदिर के मुख्य गुम्बद की परछाई कहीं पर भी दिखाई नहीं पड़ती। समुद्र किनारे बसे होने के कारण, इसकी आवाज़ कानों में सुनाई देना बेहद साधारण बात है, परंतु असाधारण बात यह है कि आवाज़ सुनाई तो देगी, लेकिन केवल मंदिर के बाहर तक। जैसे ही कोई मंदिर के मुख्य द्वार के अंदर पांव रखता है, उसे समुद्र की आवाज़ आनी तुरंत बंद हो जाती है। और तो और जहाँ आम तौर पर मंदिरों में कबूतर आदि पक्षियों का वास होता है, वहीं पुरी जगन्नाथ का मंदिर एक मात्र ऐसा मंदिर हैं जहाँ अंदर तो दूर, मंदिर के ऊपर से भी कोई पक्षी कभी नहीं गुजरता।
इन सब के अलावा मंदिर के ऊपर लगे विशालकाय सुदर्शन चक्र, जिसे नीलचक्र भी कहा जाता है, उसे पुरी में कहीं से भी देखे जाने पर उसका सामने का भाग ही देखा जा सकता है। मतलब नीलचक्र को बगल से या उसकी धार को देख पाना असंभव है।
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