जब वैवस्वत मनु को वर्षों तक कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने गुरु वशिष्ठ की सहायता मांगी। गुरु वशिष्ठ ने वैवस्वत मनु और उनकी पत्नी श्रद्धा के साथ एक यज्ञ का आयोजन किया।
देवी श्रद्धा ने मन ही मन एक पुत्री की कामना की तो यज्ञ के उपरांत उनके गर्भ से एक पुत्री इला का जन्म हुआ। परंतु वैवस्वत मनु को एक पुत्र की इच्छा थी। उन्होंने गुरु वशिष्ठ से अपनी इच्छा व्यक्त की तो गुरु ने इला को पुरुष बना दिया और उसका नाम सुद्युम्न रखा।
एक बार सुद्युम्न सुमेरु पर्वत के जंगलों में एक हिरन का शिकार करते हुए एक उपवन में प्रवेश कर गए।
उस उपवन में प्रवेश करते ही सुद्युम्न फिर से स्त्री बन गए। वह उपवन देवी पार्वती का क्रीड़ा स्थल था इसलिए शिवजी के प्रताप से उस उपवन में आने वाला कोई भी पुरुष स्त्री बन जाता था।
सुद्युम्न जो की अब इला बन गए थे ने भगवान शंकर और देवी पार्वती से फिर से पुरुष बन जाने के लिए कहा।
भगवान शंकर के प्रभाव से अब वो हर दूसरे महीने स्त्री से पुरुष में बदल जाते।
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