दक्ष का चंद्र को शाप

दक्ष का चंद्र को शाप

दक्ष प्रजापति की सत्ताईस कन्याओं का विवाह चंद्र के साथ हुआ। चंद्र उनमें से रोहिणी को अधिक प्रेम करते थे और बाकी छब्बीस को समय नहीं देते थे। जब दक्ष को यह बात पता चली तो उनको चंद्र पर अत्यंत क्रोध आया और उन्होंने चंद्र को गल-गलकर समाप्त हो जाने का शाप दे दिया। नारद मुनि के सुझाव पर चंद्र ने भगवान् शंकर की शरण ली और शिवजी ने उनको दक्ष के शाप से बचा लिया। शिवजी का इस प्रकार चंद्र को बचाना दक्ष प्रजापति को अच्छा नहीं लगा और यह उन दोनों के बीच मन-मुटाव का एक कारण बना। Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

दक्ष प्रजापति की सत्ताईस कन्याओं का विवाह चंद्र के साथ हुआ। चंद्र उनमें से रोहिणी को अधिक प्रेम करते थे और बाकी छब्बीस को समय नहीं देते थे। 

जब दक्ष को यह बात पता चली तो उनको चंद्र पर अत्यंत क्रोध आया और उन्होंने चंद्र को गल-गलकर समाप्त हो जाने का शाप दे दिया। 

नारद मुनि के सुझाव पर चंद्र ने भगवान् शंकर की शरण ली और शिवजी ने उनको दक्ष के शाप से बचा लिया। 

शिवजी का इस प्रकार चंद्र को बचाना दक्ष प्रजापति को अच्छा नहीं लगा और यह उन दोनों के बीच मन-मुटाव का एक कारण बना।

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