#233 - क्या धनतेरस वाक़ई धन से जुड़ा है

#233 - क्या धनतेरस वाक़ई धन से जुड़ा है

सद्‌गुरु बता रहे हैं कि दिवाली एक विशेष देवता से सम्बंधित है। साथ ही, दिवाली सूर्य और पृथ्वी के बीच की स्थिति में आने वाले बदलाव से भी संबंधित है। Conscious Planet: https://www.consciousplanet.org Sadhguru App (Download): https://onelink.to/sadhguru__app Official Sadhguru Website: https://isha.sadhguru.org Sadhguru Exclusive: https://sadhguru.co/exclusive-pd Inner engineering Online: isha.co/ieo-podcast Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

सद्‌गुरु बता रहे हैं कि दिवाली एक विशेष देवता से सम्बंधित है। साथ ही, दिवाली सूर्य और पृथ्वी के बीच की स्थिति में आने वाले बदलाव से भी संबंधित है।

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[00:00:00] कार्थिक मास की द्रेयोदर्शी के बाद से कुछ चीज़ें हैं जो बदल जाती हैं, हमारी परमपरा में एक विज्ञान बनाया था कि हमें कैसे रहना चाहिए, तो दिवाली के महत्व को काफी हद तक नजर अंदास कर दिया गया है, इसे वापस लाने का समय आ गया है, ताकि

[00:00:49] जो हमेशा चंद्र कैलेंडर में कार्थिक मास के तेरहवें दिन आता है, और इसे त्रेयोदर्शी कहते हैं, कार्थिक मास के तेरहवें दिन त्यावार होता है, हमारी परमपरा में इसका विज्ञान ये है कि इस दिन सभी पूजा करते हैं,

[00:01:26] दिपावली के दिन ये परंपरा है कि सभी धनवंतरी की पूजा करते हैं, जो कि हमारी सेहत और खुशाली के लिए समर्पितिक देवता हैं.

[00:01:40] आज धनवंतरी शब्दकार्थ काफी हद तक डॉक्टर हो गया है.

[00:01:47] धनवंतरी या धनवंतरी देवता आईरुवेद के स्त्रोत माने जाते हैं.

[00:01:54] आईरुवेद लंबे और सेहतमन जीवन का विज्ञान है.

[00:02:01] खेर, यहां बहुत सारे उतरभारतिय लोग हैं.

[00:02:05] बहुत सारे उतरभारतिय हैं.

[00:02:18] पता नहीं उन्होंने ये कब कर दिया?

[00:02:20] यहां कि इस भाशा की प्रकृतिय ही ऐसे है.

[00:02:25] उतरभारत में जादतर लोग हिंदी भाशा बोलते हैं.

[00:02:28] और वो आखरी शब्द को कार देते हैं.

[00:02:32] अगर आप कहें ध्यान लिंगम, तो वो कहेंगे ध्यान लिंग.

[00:02:38] अगर आप कहें शिवा, तो वो बोलेंगे शिव.

[00:02:42] अगर आप कहें रामा, तो वो कहेंगे राम.

[00:02:47] इस भाशा की यह आदत है.

[00:02:50] हमेशा अखरी शब्द काट दिया जाता है.

[00:02:53] लगभग हर शब्द का.

[00:03:05] कुछ इस तरह.

[00:03:09] तो किसी ने धनवंत्री और त्रेवदशी शब्दों को काटा और बना दिया धन तेरह.

[00:03:18] जो चीज सेहत की थी, वो धन की बन गए.

[00:03:23] धन यानी पैसा.

[00:03:26] अब सब सोचते हैं दीपावली पैसे से जुड़िये.

[00:03:30] ये बात सेहत की क्यों है?

[00:03:41] तो कि ये वो धने अधने लिए वो धने धने धने दीजेशी शब्दों को कार्तिक मासा है.

[00:04:02] प्विधास कैसे बदलने चाहिए?

[00:04:03] सब के लिए हमारी परंपरा में एक विज्ञान बनाया गया था.

[00:04:06] कि हमारा रहन सहन कैसा होना चाहिए?

[00:04:08] ताकि सर्दियों के महीनों से हम गुजर पाएं.

[00:04:11] बिना बीमार पड़े, बिना निराश हुए और बिना जीवन में संतुलन और उद्देश्यक होए.

[00:04:15] ऐसा कैसे करना है?

[00:04:17] इसका एक पूरा का पूरा विज्ञान था.

[00:04:20] दिये जलाना और पटाखे फोर्णा भी उन्हीं चीजों में से एक था.

[00:04:24] ताकि आपकी उरजाएं गिरने न लग जाएं.

[00:04:29] वंश के स्तर पर एक आयाम होता है.

[00:04:32] हमारे अंदर विकास की प्रक्रिया से जोड़ी यादें होती हैं,

[00:04:36] जो सोचती हैं कि जैसे ही सर्दी के महिने आते हैं,

[00:04:39] चाए मौसम वाकई ठंडा हो या ग्लोबल वार्मिंग की वज़े से गर्मी बनी रहे,

[00:04:43] उससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

[00:04:45] बदलाव तो होते ही हैं.

[00:04:47] धर्ती और सूरज के बीच की दूरी और धर्ती और सूर्य के बीच की स्थिति बदल जाती है.

[00:04:53] इस वज़े से धर्ती पर जीवन धीमा होता जाता है.

[00:04:58] अगर आप एक भालू होते, मिरा मानना है कोई समय पहले आप थे,

[00:05:03] तो आप एक लंबी नीन में होते.

[00:05:06] तो शरीर में लंबी नीन में जाने की एक टेंडेंसी या प्रवर्त्ती होती है.

[00:05:10] अगर आपको यह ना पता हो,

[00:05:12] तो इन दिनों बीज अंकुरित नहीं होते.

[00:05:14] भारत में इस मौसम से लेकर 14 जन्वरी तक कोई किसान बीज नहीं बोता.

[00:05:18] क्योंकि बीज पूरी तरा से अंकुरित नहीं होगा.

[00:05:21] या उतनी तेजी से अंकुरित नहीं होगा,

[00:05:24] जितना दूसरे मौसमों में होता है.

[00:05:26] उत्री गुलार्द में हर चीज पूरा जीवन ही धीमा हो जाता है.

[00:05:29] क्योंकि जीवन धीमा होने जा रहा है.

[00:05:32] इसलिए हम अपने आसपास और जादा ऊर्जावान चीज़ें करने की तैयरी करते हैं,

[00:05:36] ताकि हम खुद धीमेना हो जाएं और इसका हिस्सा न बन जाएं.

[00:05:40] एक तरह से हम अपने विकास की प्रक्रिया पर डटे रहना जाते हैं.

[00:05:46] हां, अगर हम कोई और प्राणी होते तो हम कहीं दुबग कर सो जाते हैं.

[00:05:50] पर अब हम इनसान बन गए हैं.

[00:05:52] हमने अपने शरीर की सीमाओं को पार कर लिया है.

[00:05:56] मैं बहुत जादा ही चीज़ें मान कर चल रहा हूं, क्या?

[00:06:04] माना जाता है कि आप अपने शरीर की टेंडेंसी से उपर उठ चुके हैं,

[00:06:09] तो इनसे उपर उठने के लिए कई गत्विधियां बनाई गई हैं.

[00:06:13] ताकि आप एक वैसे हाइबरनेशन जैसी हालत में न चले जाएं.

[00:06:19] शारेरिक सुस्ती, मान सिक्स्तर पर थोड़ा सा डिप्रेशन,

[00:06:22] ऐसे सभी के साथ आसानी से हो सकता है,

[00:06:25] क्योंकि मौसम ही ऐसा होता है.

[00:06:28] ठंडे देशों में निश्चत रूप से लोग इसका अनभव करते हैं.

[00:06:32] हाँ या नहीं?

[00:06:34] क्योंकि आपके भीतर चीजें धीमी हो गई हैं.

[00:06:37] उत्री गोलार्द में सिर्फ आप ही नहीं सब कुछ धीमा हो जाता है.

[00:06:42] क्योंकि सूर्फ के साथ हमारा संबंद बदल जाता है,

[00:06:44] जो कि हमारी जीवन का basic source है.

[00:06:47] इस धर्ती पर उर्जा का basic source सूर्फ है.

[00:06:49] इसलिए नहीं कि आपने solar panel बना लिया है,

[00:06:52] सूर्फ हमेशा से रहा है,

[00:06:55] Now because the sun has gone away from the sun,

[00:06:59] you are going to be further away from the sun,

[00:07:01] this is why this year is the sun.

[00:07:05] This is the day of the sun,

[00:07:07] which is called Kartik Triodashi,

[00:07:10] which is called the sun,

[00:07:13] which is called the sun.

[00:07:14] the sun has gone away from the sun.

[00:07:17] Since the sun has gone away from the sun,

[00:07:27] for example, it was an example,

[00:07:30] for the sun has gone away.

[00:07:32] This is not a woman.

[00:07:33] This is a woman.

[00:07:34] It seems as if the sun has gone away from the sun,

[00:07:38] they are going to want to make it to the sun.

[00:07:44] If you like how this morning,

[00:07:47] they have to make it to the sun,

[00:07:50] which isn't the sun or the sun and the sun is getting up.

[00:07:56] not only a

[00:07:57] flower

[00:07:57] and every day

[00:08:01] and every day

[00:08:02] and every week

[00:08:05] a

[00:08:06] vicious design

[00:08:07] is a

[00:08:08] geometric design

[00:08:10] which has a

[00:08:12] vicious

[00:08:13] shark

[00:08:13] if

[00:08:17] today

[00:08:17] it is

[00:08:18] one

[00:08:18] one

[00:08:19] one

[00:08:20] if

[00:08:20] it is

[00:08:21] another

[00:08:21] design

[00:08:22] then

[00:08:23] 28

[00:08:24] pattern

[00:08:24] and

[00:08:25] people

[00:08:54] We know that we know that the people of the world knew that they were doing it.

[00:08:56] today the dear family

[00:08:57] Our city, if you live in their life

[00:09:00] in the village, it will make a house

[00:09:02] to come and your family

[00:09:03] and your family

[00:09:05] in your life

[00:09:06] so that you can't

[00:09:08] keep the house

[00:09:08] so that you can't

[00:09:15] go in the morning

[00:09:20] in the morning

[00:09:40] This is the commitment.

[00:09:42] That is why before sunrise everybody is out to receive the first rays of sun upon themselves, not upon the ground.

[00:09:49] This is the commitment.

[00:10:48] This is the commitment.

[00:10:56] This is the commitment.

[00:11:32] This is the commitment.

[00:11:39] This is the commitment.

[00:11:40] This is the commitment.

[00:11:40] This commitment.

[00:11:41] This commitment.

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