मन तरंग है

मन तरंग है

जब सांस, मन और शरीर एकलय हो जाते हैं, तो शरीर की अशुद्धियाँ और मन के विकार अपने आप समाप्त हो जाते हैं और हम स्वयं में तथा अपने चारो तरफ शुद्धता का संचार करते हैं | आइये आज गुरुदेव के साथ मेडिटेट करते हैं |Learn more about your ad choices. Visit podcastchoices.com/adchoices Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices
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