कहते हैं जब कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है तो सारे असुर भस्म हो जाते हैं। ऐसा केवल और केवल अपने भीतर के दैवीय गुण के प्राकट्य से ही संभव है। ध्यान, प्रार्थना और यज्ञ भीतर के दैवीय गुण को जागृत करने का मार्ग हैं।Learn more about your ad choices. Visit podcastchoices.com/adchoices
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