अंदेखा संघर्ष | खिड़की S3 Ep2
KhidkiJuly 05, 202400:09:10

अंदेखा संघर्ष | खिड़की S3 Ep2

संसार के सभी व्यक्तियों का एक समान ख्वाब जरूर होता है, और वह यह, कि उनके द्वारा किए गए संघर्ष को पहचान मिले, उनके काम की सराहना हो व समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा मिले। और इसी ख्वाब को मुकम्मल करने के लिए दिन-रात वे प्रयत्न करते हैं। मगर क्या सभी को उनके संघर्षों का फल प्राप्त होता है? क्या हर व्यक्ति के काम को समान दृष्टि से देखा जाता है? क्या हर किसी को उसकी भागीदारी के लिए याद किया जाता है? तो उत्तर है नहीं। कई संघर्ष ऐसे भी हैं, जिन्हें किताबों में नहीं लिखा गया है, जिनका जिक्र टेलीविजन पर नहीं हुआ है, और जिन्हें अखबार के कॉलम में प्रकाशित नहीं किया गया है। ऐसे संघर्ष जो आजीवन संघर्ष बनकर रह गए। आज पूर्णिमा, खुशम, हिमांशु एवं अनुष्का यादव ऐसे ही एक वर्ग की बात करने वाले हैं, जिनका संघर्ष आज भी अंदेखा और अनकहा है। जिन्होंने विभिन्न प्रकार से समाज की प्रगति में अपना योगदान दिया है मगर फिर भी उन्हें अपने हितों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

संसार के सभी व्यक्तियों का एक समान ख्वाब जरूर होता है, और वह यह, कि उनके द्वारा किए गए संघर्ष को पहचान मिले, उनके काम की सराहना हो व समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा मिले। और इसी ख्वाब को मुकम्मल करने के लिए दिन-रात वे प्रयत्न करते हैं। 

मगर क्या सभी को उनके संघर्षों का फल प्राप्त होता है? क्या हर व्यक्ति के काम को समान दृष्टि से देखा जाता है? क्या हर किसी को उसकी भागीदारी के लिए याद किया जाता है? तो उत्तर है नहीं। कई संघर्ष ऐसे भी हैं, जिन्हें किताबों में नहीं लिखा गया है, जिनका जिक्र टेलीविजन पर नहीं हुआ है, और जिन्हें अखबार के कॉलम में प्रकाशित नहीं किया गया है। ऐसे संघर्ष जो आजीवन संघर्ष बनकर रह गए। 

आज पूर्णिमा, खुशम, हिमांशु एवं अनुष्का यादव ऐसे ही एक वर्ग की बात करने वाले हैं, जिनका संघर्ष आज भी अंदेखा और अनकहा है। जिन्होंने विभिन्न प्रकार से समाज की प्रगति में अपना योगदान दिया है मगर फिर भी उन्हें अपने हितों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices