Gumraah: Urdu Poetry on Being Lost, Misled and Finding the Way
UrdunamaAugust 08, 202600:11:06

Gumraah: Urdu Poetry on Being Lost, Misled and Finding the Way

We usually think of gumraah as someone who has been led astray. But is that all the word means? In this episode of Urdunama, we unpack the word, 'gum-raah', through the poetry of Khumar Barabankvi and Muneer Niazi among others.  Along the way, we discover that gumraahi isn't always about taking the wrong path. Sometimes it begins with trust. Sometimes with love. Sometimes with a destination that opens into countless new roads. And sometimes, what looks like losing your way turns out to be finding a completely different one.Tune in to discover why one simple Urdu word can hold so many different journeys and paths. Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

We usually think of gumraah as someone who has been led astray. But is that all the word means?

In this episode of Urdunama, we unpack the word, 'gum-raah', through the poetry of Khumar Barabankvi and Muneer Niazi among others.  Along the way, we discover that gumraahi isn't always about taking the wrong path. Sometimes it begins with trust. Sometimes with love. Sometimes with a destination that opens into countless new roads. And sometimes, what looks like losing your way turns out to be finding a completely different one.
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[00:00:05] देखे, आज पाड़कास्ट में थोड़ी सी सुड़ सुड़ एंड खुड़ खुड़ सुनाई देगी, कोई टेक्निकल ग्लिच नहीं है, ये जुकाम हो रहा है, तब्यत खराब है, तब्यत भी खराब है, और मूर भी बहुत खराब है, पिछले हफ़ते मेरे साथ एक बहु

[00:00:29] ज़ड़ की गई, चीजे बहुत फ्रॉमिसिंग लग रही थी, हमने मन बना लिया था, तैश उदा टाइम पर पहुच गए, जूम पर पाच मिनट हो गए, दस मिनट हो गए, पंदरा मिनट हो गए, आदा घंटा बीथ गया, येस, वो ही हुआ जो आप सोच रहे हैं, they ghosted me,

[00:00:43] कोई नहीं आया, बाद में पता चला कि जिस prospective client से मेरी इतने दिनों से email पर बात हो रही थी, वो human था ही नहीं, AI chatbot था, I was talking to a non-human entity, and honestly मुझे उससे ज्यादा पता है है हरानी किस बात की हुई, कि एक बार मेरा माथा नहीं ठिंका, एक बार मुझे शक नहीं हुआ, हर email एक�

[00:01:07] अग्दम नाचरल जैसे normal professional emails लिखते हैं, एक बार नहीं लगा कि इस conversation के पीछे कोई AI है, and then I thought कि हम गुमरा का मतलब अक्सर समझते हैं कि किसी का गलत रस्ते पर चल देना, you know someone who has been misled, और एक गुमरा वो भी है जो खुद भी गलत रस्ते पर चलता है, और दूसरों को भी उ

[00:01:41] गुमरा, इस लफ्स को अगर तोड़ कर आप समझें, तो बहुती simple explanation हो सकता है, गुम का मतलब है lost, राह का मतलब होता है path, यानि की way, तो गुमरा का मतलब क्या हुआ, जिसकी राह गुम हो गई हो, someone who has lost the way, और अगर आप पिछले तीन एपिसोड से हमारे साथ हैं, तो आप

[00:02:01] जानते होंगे कि हम इस वक्त एक mini-series कर रहे हैं, इस series में हम देख रहे हैं कि गुम, यानि जो lost है, जब अलग-अलग words के साथ जुड़ता है, तो कितने नए words, नए माने पैदा करता है, सबसे पहले हमने बात की थी सिर्फ गुम की, यानि की lost, दूसरा episode था फिर सीरीज मे

[00:02:19] गुम नाम, यानि जिसका नाम खो गया हो, फिर था गुम शदा, यानि जो खुद ही खो गया हो, और आज गुमराह, जिसकी रह खो गया हो, जो रह से भटक गया हो, तो देखते हैं कि उर्दू शायरी में गुमराही को किस नजर से देखा जाता है, शुरुआत करते हैं, ख

[00:02:52] रहबर और मन्जिल रहबर का मतलब है गाइड पहला मिसरा फिर से पढ़ती हूं मैं के मेरे रहबर मुझको गुम्राह करते। शायर यहाँ अपने गाइड से कह रहा है कि मुझे गुम्राह करतो। जिसका नाम रास्ता दिखाना है उसी से कह रहा है कि भाईया मुझे रास्ता भटका दे

[00:03:08] और फिर दूसरा मिसरा आता है कि सुना है कि मन्जिल गरीब आ गई है कभी ख्वाहिश का पूरा हो जाना है या कभी जिन्दगी का आखरी मोर है आखरी मोर यहां जब जिन्दगी खतम हो जाती है मौत डेस्टिनेशन है

[00:03:38] तो इसलिए शायर कहता है कि अगर मंजिल इतनी खरीब आ गए तो मुझे थोड़ा और भटकने दो Let the journey last a little longer क्योंकि कई बार journey उतना joy दे देती है उतने rewards दे देती है जितनी destination शायद ना दे पाए और यह देखे आपके यहां जो गुमराही है वो एक negative word नहीं सजाबत और नहीं आ रही है शायर की जिन्दगी में It is a choice, a mindful choice

[00:04:06] थोड़ी सी देर और मेरा arrival मेरी destination पर मेरा arrival मुलतवी करते सुखुमार बारा बंकवी का यह जो शेर है यह याद दिलाता है कि हर बार रास्ता भटक जाना बुरी बात नहीं होती है कभी कभी थोड़ा सा गुमराह होना ही जो सफर है उसके खुबसूर्ती को और बढ़ा देता है अलिवेट कर देता है मेरे रहबर मुझको गुमराह कर दे सुना है कि मन्जिल करीब आ गई है

[00:04:35] अब आते हैं मुनीर नियाजी के शेर पर कि रहबर मेरा बना गुमराह करने के लिए यहां भी जो गाइड है रास्ता दिखाने वाला रहबर है उसकी बात हो रही है लेकिन थोड़ा नेगेटिवली बात की जा रही है रहबर मेरा बना गुमराह करने के लिए मुझको सीधे रास्ते से दरबदर उसने किया इस शेर में दरबदर एक वर्ड है दर बदर यानि place to place दर यानि दरवाजा दर बदर यानि दरवाजा to दरवाजा

[00:05:04] place to place someone who's homeless दर बदर कौन ठोकर खाता है जिसका कोई घर ना हो जिसका अपना कोई दर ना हो someone who's homeless, someone who's wandering without a destination यानि जिस पर मैंने भरोसा किया जिसे मैंने अपना guide समझा वो शुरू से ही मुझे सही रास्ता नहीं दिखा रहा था बलके उसने भटकने के लिए मुझे target बनाया अपना और फिर दूसरा मिस्रा उस धोके की खीमत बताता है मुझे को सीधे रास्ते से दर बदर उसने किया

[00:05:33] यानि उसने सिर्फ मुझे गलत मोड पर ही लाके नहीं छोड़ा डिसीव नहीं किया सिर्फ चीट ही नहीं किया उसने मुझे उस सीधे रास्ते से ही हटा दिया जहां मुझे होना चाहिए था और फिर मैं भटकता ही रह गया

[00:05:59] जो आपको गुमराही पर चाहिए लेकिन जब रहबर ही गुमराह करते है वो ही अगर आपको गुमराही पर चोड़ दे तो रास्ता ही नहीं खोता है भरोसा भी खो जाता है अब यह जो तीसरा शेर है इसमें भी मन्जिल की बात हो रही है

[00:06:28] इसमें भी गुमराही की कम्प्लीन्स है हफीज होशियारपुरी का यह शेर है हमको मन्जिल ने भी गुमरह किया रास्ते निकले कई मन्जिल से मन्जिल, destination की यहां पे बात हो रही है वो जगा जहां हम समझते हैं कि सफर खतम हो जाएगा हमें सुकून मिल जाएगा भई आदमी जब सफर पे निकलता है थक जाता है, हलकान हो जाता है जब destination पे पहुचता है तो एक सुकून की थंडी सांस ले बाता है

[00:06:56] शायर कह रहा है कि भई बिटरयाल हो गए मेरे साथ तो मन्जिल ने ही, destination ने ही मुझको धोका दे दिया है तोड़ी अजीब बात है, रास्ता गुमरह कर सकता है क्या आदमी रास्ते पे भटक जाए या गुमरही के रास्ते निकल जाए मन्जिल कैसे गुमरह कर सकती है तो दूसरा मिसरा इसका जवाब देता है कि रास्ते निकले कई मन्जिल से यानि जिस जगा को हम सफर का अन्जाम समझ रहे थे वो खुद ही एक नई सफर की शुरुआत निकली और आइ फील ये शेर बहुत ही

[00:07:24] डेली विजडम अपने अंदर छुपाए हुए है हम अकसर सोचते हैं बस ये मन्जिल मिल जाएगी सुकून आ जाएगा डिगरी मिल जाएगी बडिया हो जाएगी और रास्ते कैसारे और आप्शन्स निकलते हैं

[00:07:53] एक कोई नई जिम्मेदारी कोई नई खौाहिश पैदा हो जाती है एक नया फैसला करने की नौबत आ जाती है और शायद इसी लिए सुकून हमेशा थोड़ा सा और आगे खिसक जाता है और डिले हो जाता है और इसी लिए शायर कहता है कि कभी कभी हमें रास्ता नहीं बलके मन्जिल गुमराह करती है क्योंकि हम उसे अंजाम समझ लेते हैं जबकि वो सिर्फ इप्तिदा होती है

[00:08:21] अब सुनाते हैं आपको अबास ताबिश कशेर लिखते हैं कि तो पहली बार पढ़ेंगे तो इसा लगेगा कि शायद शायर को मुहबब्ब्बप ने गुमराह कर दिया शायद उन्हें बिट्रेयल फेस करना पड़ा किसी ने दोका दे दिया है और उस दोके के बाद शायर का रुख खुदा की तरफ हो गया है

[00:08:51] जैसे normally हर heartbreak के बाद होता है कि आपका दिल अगर कोई तोड़ता है आप सिधा दूआ करते है And actually, जिन्दगी में भी यह होता है जब इनसान का कोई एक सहारा तोट जाता है वो किसी और को ज्यादा बड़ी ताखत में फिर सहारा ढूँनने लगता है अपने से कोई ज्यादा मजबूत कोई चीज अपना anchor ढूंता है फिर दूसरा मिस्रा है कि तुछ तक आते हुए खुदा तक पहुँच गए है So, यहाँ पर मुझे लगता है सिर्फ heartbreak की बात नहीं हो रही है

[00:09:20] हो सकता है, यहाँ गुमराही का मतलब कभी मुम्किन नहों पाता अगर heartbreak के बाद उसमें एतना wisdom आ गया है कि वो self-reliance पे ज्यादा मजबूती, ज्यादा यकीन रखने लगा है या वो अपने आपको और बहतर बनाने की कोशिश कर रहा है

[00:09:50] चाहे spiritually, चाहे emotional चाहे वो therapy ले रहा है, कुछ भी कर रहा है यह सारी चीजे तब मुम्किन नहीं थी जब तक यह heartbreak उसके जिंदगी में नहीं आता so heartbreak has a lesson here यानि सफर शुरू महभूब के तरफ हुआ था लेकिन उस सफर ने उसे खुदा तक पहुँचा दिया है and इस share का wisdom यहां पे यह बात है कि जो चीज पहली नजर में ऐसा लगे कि गुम्राही है हमारे साथ बहुत बुरा हुआ हमें deceive कर दिया, धोका मिल गए, हमारी life खतम हुगी है शायद वही असल में

[00:10:19] एक और तरहां की राह थी maybe that was the main road that we were supposed to walk so कभी हम जिस destination की तरफ निकलते हैं सफर हमें उससे भी बड़ी किसी चीज तक ले जाता है इतने गुम्राह हो जाईए कि हाँ अपना रस्ता खुद आप निकाल पाएं इतने गुम्राह मत होईएगा कि किसी दूसरे को आप गुम्राह करते फिरे वो बात फिर गलत है

[00:10:47] बाकी अपना अपना हाजमा हर कोई जानता है है ना चालिए अगले हफ़ते फिर मुलाकात होगी यह सीरीज यहीं पर खतम करते हैं हम अगले हफ़ते मिलते हैं खुदाफिस