Ghutan: The Meaning of Suffocation in Urdu Poetry, From Kaifi Azmi to Gulzar
UrdunamaSeptember 05, 202600:19:29

Ghutan: The Meaning of Suffocation in Urdu Poetry, From Kaifi Azmi to Gulzar

What does ghutan truly mean? Is it physical suffocation, an eerie silence, or the weight of deep loneliness? Or is it that heavy feeling of being trapped inside an overwhelming wave of emotion? In this episode of Urdunama, Fabeha Syed breaks down the word through the poetry of legends like Kaifi Azmi and Gulzar, among others. She traces how ghutan evolves from a simple physical sensation to a complex emotional, social, and political struggle, and ultimately, a universal longing to breathe, speak, and laugh freely again. Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

What does ghutan truly mean? Is it physical suffocation, an eerie silence, or the weight of deep loneliness? Or is it that heavy feeling of being trapped inside an overwhelming wave of emotion?

In this episode of Urdunama, Fabeha Syed breaks down the word through the poetry of legends like Kaifi Azmi and Gulzar, among others. She traces how ghutan evolves from a simple physical sensation to a complex emotional, social, and political struggle, and ultimately, a universal longing to breathe, speak, and laugh freely again.

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[00:00:05] आज जिस लफ्स पे हम बात करने वाले हैं वो है घुटन यानि Suffocation. Well, of course, आज बात होगी कि कैसे शायरी में यह जो वर्ड है घुटन इसको इस्तेमाल किया गया है, किस तरह के Metaphors आते हैं, यह शायर अपनी बेवसी कैसे Express करते हैं, किस तरह के situations में शायर घुटन Experience करता है, य लेकिन Podcast में आगे कुछ भी कहें, उससे पहले एक बात हमारी आप कान खोल के सुन लिजे.

[00:00:31] Just understand कि घुटन महसूस करना हर एक के हिस्से में आता है. किसी भी वज़े से घुटन हो, उस Suffocation हर कोई कभी ना कभी महसूस करता है. And the good news is, कि जियादतर घुटन के लिए help available होती है. जिसमानी घुटन हो, तो डॉक्टर देखकर उसकी वज़े बताता है, इलाज बताता है, कि भई, खून की कमी होती है, या कई बार lungs का इशू होता है, respiratory issues होते हैं, या जो भी ये डॉक्टर ठीक से बता पाता है.

[00:00:59] दूसरी घुटन होती है, जस्बाती, यानि emotional suffocation, उसका भी इलाज experts दे सकते हैं. नफसियात, यानि psychology समझने वाले जो health experts हैं, नफसियाती मसाइल का इलाज करते हैं. तो पहला step है कि अपनी घुटन को acknowledge कीजिए, और फिर मसले का हल तलाश कीजिए. अब शुरू करते हैं podcast. The Quint पर शुरू हो गया है उर्दुनामा, मेरा नाम है फबेह सेयद.

[00:01:28] आज बात होगी घुटन की, जिसका मतलब होता है suffocation, या वो कैफियत जब ऐसा लगे कि सांस नहीं आ रहा है, या फिर सांस मुश्किल से आ रहा हो. ये जो section है अब शायरी का वो start करेंगे और इसमें घुटन को एक political idea के साथ जोड के शायर ने लिखा है, या जो political कैफियत है उसके वज़े से शायर को घुटन महसूस होती है.

[00:01:50] और शायर कौन है? कैफियाजमी. उनका iconic शेर जिसमें घुटन का experience ना सिर्फ परसनल या फिजिकल है, बलके बहुती ज्यादा political है. क्या लिखते हैं? के होटो को सी के देखिये, पच्चताइएगा आप. हंगा में जाग उटते हैं अकसर घुटन के बाद.

[00:02:20] इस शेर में कैफियाजमी घुटन को एक feeling की तरहां describe नहीं कर रहे. He is giving it a consequence. हंगा में जाग उटते हैं अकसर घुटन के बाद. तो पहला मिसरा है के होटो को सी के देखिये, होटो को सी देना, यानि expression अपना रोग देना.

[00:02:42] होट क्या करते हैं? बात करते हैं. बात का मतलब जो आप सोच रहे हैं वो आप expel कर रहे हैं, words में express कर रहे हैं, बोल कर, language के जरिये. अब होटो को सी देंगे तो फिर क्या करेंगे? तो expression को रोग देना है, यानि होटो को सी देना है. दूसरे मिस्रे में उस रोकने का result है, के होटो को सी दिया, expression को रोग दिया, घुटन हो गई. घुटन यहां पर build-up होती रही है, और फिर एक point पर वो बाहर निकलती है, हंगामे के रूप में.

[00:03:16] जब आप किसी चीज़ को कह नहीं सकते हैं, एक्सप्रेस नहीं कर सकते हैं, बस अंदर दबाते रहते हैं, तो वो सिर्फ खामूशी नहीं रहती है, वो bottle-up हो के, हो, हो, हो, हो, हो, फिर एक बार एक ही साथ बाहर निकल आता है, फट जाता है. जब बहुत ही इंट्रेस्टिंग ये एक्सप्रेशन है शायर का, और यहां पे आप ये समझेए कि घुटन का जो opposite है, वो सुकून होता है, जब suffocation होती है, तो उसके बाद सुकून, relief is the opposite of घुटन.

[00:03:42] यहां पे जो शेर है, शायर ने उसमें घुटन का opposite क्या बताया है, हंगामा है, सुकून नहीं है, और मजीद discomfort है. और जब वो pressure अपनी हद पार करता है, तो खामोशी काफी नहीं रहती, फिर होता है हंगामा. तो कैफी की poetry में social और political resistance का जो element बार-बार नजर आता है, उस context में ये movement, silence से घुटन, घुटन से हंगामा, ये कई बार आपको महसूस होगा.

[00:04:11] Because again, घुटन यहां suffering नहीं है, सिर्फ it is a pressure. ऐसा pressure जो एक point के बाद खामोश नहीं रह पाता है, वो भट जाता है. होटों को सी के देखिए, पच्चताईएगा आप हंगामे जाग उठते हैं, अकसर घुटन के बाद. कि operation एक हद तक ही चलेगी, उसके बाद क्या होगा? हंगामा.

[00:04:38] अब आते हैं साहिल लुधियानवी के शेर पर, कि बहुत घुटन है कोई सूरते बया निकले, अगर सदाना उठे कम से कम फुगा निकले. इस शेर में साहिल लुधियानवी का जो घुटन का expression है, उसका मतलब है, there is something that needs to be said. But there is no adequate way of saying it.

[00:05:30] और कुछ देर पहले कैफियाजमी भी वही बात कह रहे थे, कि हंगामे जाग उठते हैं अक्सर घुटन के बाद. साहिल लुधियानवी की भी यही शिकायत है, कि इतनी घुटन है कि समझ नहीं हारा, किस तरीके से इसको बयान करें. साहिल लुधियानवी की यह पूरी घुजल मैं पढ़ना चाहूंगी, क्योंकि शायर इसमें फीलिंग को, यह जो घुटन वाली फीलिंग है, इसको पॉसनल स्पेस में कनफाइन नहीं कर रहा. वो बार-बार सोसाइटी, पावर, इनिक्वालिटी की तरफ देख रहा है.

[00:05:58] तो घुजल ही पढ़ लेते हैं, कि बहुत घुटन है कोई सूरत बयान निकले, अगर सदा न उठे कम से कम फुगा निकले. फकीर शहर के तन पर लिबास बाकी है, अमीर शहर के अर्मान अभी कहा निकले.

[00:06:20] हकीकतें हैं सलामत तो खुआब बहते रे, उदास क्यों हो जो कुछ खुआब राएगा निकले. वो फलसफे जो हर एक आस्ता के दुश्मन थे, अमल में आएं तो खुद वख्फ आस्ता निकले.

[00:06:42] इधर भी खाक उड़ी है, उधर भी जख्म पड़े, जिधर से हो के बहारों के कारवा निकले. सितम के दौर में हम एहले दिल ही काम आए, जबा पे नास था जिनको वो बेजबा निकले.

[00:07:14] अब आपको सुनाएंगे खुमार बारा बंकवी का शेर, कि दम अंधेरे में घुट रहा है खुमार और चारों तरफ उजाला है. दम अंधेरे में घुट रहा हैница, कुमार और चारों तरफ उसुजाला है. सबसे पहले गुटन की वजह बहुत पजलिंग है. शायर का दम घुट रहा है, वो खुल को अंधेरे में महसूस कर रहा है. लेकिन अगले ही मिसरे में कहता है कि चारो तरफ उजाला है, तो फिर ये अंधेरा कहां से आ रहा है?

[00:07:42] शेर हमें इसका कोई obvious जवाब नहीं देता है. कि दम अंधेरे में घुट रहा है खुमार और चारो तरफ उजाला है. हम अकसर घुटन को किसी वज़े से जोड़ देते हैं. कोई मुश्किल सिचुएशन आन पड़ी, कोई बंदिश है, कोई चीज है जो हमें रोक रही है. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है. कई बार जो घुटन है, वो किसी external pressure, external source की वज़े से नहीं होती है. खुमार का ये जो शेर है, यहां बार बार, दुनिया में रोशने की कमी है, ऐसा नहीं कह रहा है.

[00:08:11] खुमार का ये जो शेर है, वो complain नहीं कर रहा है कि बाहर की दुनिया में रोशने की कमी है, इसलिए मेरा दम घुट रहा है. वो तो उल्टा ये गह रहा है कि बाहर उजाला है, चारो तरफ उजाला है लेकिन शायर उस उजाले को experience नहीं कर पा रहा है So the problem is not that there is no light, the problem is that he is unable to experience it जो कुछ उसके अंदर चल रहा है, वो इतना overwhelming है कि बाहर की दुनिया उस तक पहुँच ही नहीं पा रहा है बाहर की दुनिया में जो उजाला है, वो उसको दिखी नहीं पा रहा है

[00:08:39] He can see that things are fine around him, but he cannot quite access that feeling of being fine himself और यही वो point है जहां पे शेर, it becomes more than a simple expression of sadness सिर्फ sadness नहीं है कही बाहर जो बाहर की दुनिया है, वो change नहीं होती है वो वो ही रहती है, लेकिन जो हमारी capacity है, हमारी ability है to receive it, वो change हो जाती है कई बार mood इतना अच्छा होता है आपका, कि बाहर कुछी हो

[00:09:07] आग लगे, फसाद हो, घर में तोड़फोड मचे लोग चीख रहें, चिला रहें, लड़ाईयां हो रही है आप अंदर से बिल्कुल zen mode में होते है कई बार ऐसा होता है, बाहर सब खामोश है एकदम picture perfect आपका drawing room है, आपका घर है हर चीज एकदम जगा पर है लोग भी बहुती शायसता मिजाज है आपसे कोई बात भी नहीं कर रहा है, ऐसी कि आपका मुठ खराब हो, उसके बावजूद ऐसा लगता है कि अंदर आग लगी हुई है कोई हलका सा आप से बात भी कर ले तो आप एकदम उबल पड़ते हैं, जैसे कि भीड के छटे को किसी ने छेड़ दिया हो

[00:09:35] तो कई बार आसपास अच्छी चीजे होती हैं, लोग भी अच्छे होते हैं जिंदगी objectively ठीक था की चल रही होती हो almost, but when you're caught in a difficult emotional state, none of that necessarily reaches you आपको पता है कि रोशनी है, you just cannot move towards it और शायद घुटन की ये एक खास quality है it can make your inner state, you know, feel completely inescapable लगता कि भई हम फस गए हैं, निकल ही नहीं सकते हैं

[00:10:03] even when there is nothing obvious outside holding you back यानि ऐसा आपको लगता है कि आपके पास कोई रास्ता नहीं है जबकि रास्ते मौजूद होते हैं, बस उस वक्त उन तक पहुचने की capacity नहीं होती है दम अंधेरे में घुट रहा है खुमार और चारो तरफ उजाला है अमीर गजल बाश का बाप शेर सुनिए कि खौफ तनहाई घुटन सननाटा

[00:10:35] खौफ, तनहाई, घुटन, सननाटा क्या नहीं मुझ में जो बाहर देखूं इस शेर में जो शायर है वो इनसान के अंदरूनी गम है जो उसके अंदर फैली हुई तनहाई है बहुती साइकलोजिकल डिस्ट्रेस है जो गहरा होता चला जाता है उसकी बात कर रहा है खौफ है भई, दिल के अंदर, फियर, तनहाई है यानि लोनलीनस है, घुटन है, सफोकेशन है सननाटा, वो बहुती अंसेटलिंग साइलेंस जो आपको बहरा कर देता है

[00:11:04] तो ये जो फीलिंग्स है ना, एक के बाद एक आती रहती है और मिलकर एक ऐसा, एक ऐसी दुनिया अंदर ये अंदर बना देती है जो बहुती अपसेटिंग है लेकिन जो ट्विस्ट है इस शेर में, वो अगले मिस्रे में है कि क्या नहीं है मुझमें जो बाहर देखूं अकसर जब इनसान, खौफ, तनहाई, घुटन, इन सारी चीज़ों से बचना चाता है

[00:11:33] तो वो क्या करता है? खुद को डिस्ट्राक्ट करता है खुद को डिस्ट्राक्ट किस तरह करेगा? या तो घर में कुछ ऐसा करना शुरू करतेगा जिसे उसे प्रॉबबली अच्छा फील हो, या फिर बाहर निकल जाएगा दोस्तों से मिलेगा, रिष्टेदारों से मिलेगा भीड में चला जाएगा, शोरो गुल में थोड़ा अपना दिल लगाने की वो कोशिश करेगा, hoping that the outside world will offer some relief, लेकिन शायर कह रहा है कि मेरे अंदर ये सारी चीज़े पहले से मौझूद हैं, खौफ भी है, तनहाई

[00:12:01] भी है, घुट अंसन, नाट अन, everything that is so uncomfortable, तो बाहर जाकर मुझे ऐसा क्या मिलेगा, जो मेरे अंदर नहीं है तो ये समझकर ऐसा लग रहा है कि ये जो शेर है, उसमें शायर ये कहना चाह रहा है कि बाहर की दुनिया में भी मुझे ये तमाम feelings महसूस होती है, तनहाई, अकेलापन, सननाटा,

[00:12:22] खौफ, और मेरे अंदर भी ये सब चल रहा है, तो जो चीज़ में ले आता है, अंदर की दुनिया आपकी इतनी है, इतनी डार्क है, बेचैन है, तो बाहर की दुनिया भी आप उसी नजर से देखेंगे, थोड़ी देर

[00:12:46] पहले जो शेर हमने पढ़ा था, खुमार बारा बंकवी का, कि दम अधेरे अधेर का शेर नहीं है, ये उस पॉइंट की बात कर रहा है, जहां इनसान अपने अंदर इतना ओवर्वर्मड है, कि वो उमीद खतम कर देता है, कि बाहर

[00:13:15] शायद कोई रिलीफ ऐसा होगा, जो मेरे अंदर तक पहुँच जाएगा, अब गुलजार की नजम आपको एक हम सुनाएंगे, घुटन, उसका उन्वान ही घुटन है, अमीर गजलबाश का जो शेर है, इसका पॉइंट है कि अंदर घुटन है, कि ये आज़िफ मेरे अंदर कोई पर्मनेंट जगा उसने ले ली है, कि बाहर की दुनिया में कुछ भी अच्छा नहीं लगता है, कुछ भी कन्विंसिंग नहीं है कि चीजे बहतर होंगी, तो गुलजार इसी

[00:13:45] इनर फीलिंग को एक स्टेप और आगे ले जाते हैं, वो घुटन को अल्मूस्ट एक पाइफिकल चीज बना देते हैं, जिसे वो अपने बदन से निकालने की कोशिश कर रहा है शायर इसमें

[00:14:01] लिखते हैं जी में आता है कि इस कान से सुराख करूं, घ�

[00:14:24] बहुत पहाफ करूँ भर्दू रेशम की जलाई हुई बुक्की इसमें, कहकाहाती हुई इस भीड में शामिल होकर, मैं भी एक बार हसूँ, खूब हसूँ, खूब हसूँ.

[00:14:37] ये modern उर्दू poetry, यानि जदीद नजम की एक बहुत ही intense and very painful and psychological नजम है, इसमें गुलजार एक ऐसी state of mind को express कर रही है, जहां mental stress और depression इतना गहरा हो गया है, कि जो शायर है, उसे physically अपने अंदर से निकाल देना चाता है.

[00:15:01] और साथ ही वो एक बहुत ही strong desire भी रख रहा है, कि society का जो एक हिस्सा है, society में जो लोग हैं, बिलकुल उनके जैसे मैं भी normal होना चाता हूँ, उसी भीड में शामिल हो जाना चाता हूँ, जो आस-पास मेरे लोग हस रहे हैं, बिलकुल सुकून से function कर रहे हैं. I also want to be, you know like that.

[00:15:31] Shire के दिमाग में thoughts और pain का इतना overwhelming pressure है, कि वो उसे किसी भी तरहां से बहार निकाल देना चाता है. वो literally imagine कर रहा है कि एक कान में अगर वो सुरख करेगा, और दूसरी तरफ से उस चीज़ को, उस बहुती negative चीज़ को खीच कर बहार निकाल देगा, तो शायद अंदर से वो घ

[00:16:01] पिमाख को और अंदर आपके दिल को, पूरी body को इतना disturb कर रही है, उसे बस एक बार खीच कर बहार कर देना चाता है शायर. फिर वो कहता है सारी की सारी निचोड़ू ये रगें, साफ करूं, भर्दू रेशम की जलाई हुई बुक की इसमें. अब imagery और भी physical हो गई है इसम

[00:16:30] constant pain महसूस करवा रहा है, वो सब निकाल देना चाहता है. और फिर वो कहता है कि इन खाली की हुई रगों में रेशम की जलाई हुई बुक की भर्दू. पुरानी देसी या हिकमती इलाज में रेशम को जलाकर बनाई गई जो राख होती थी, उसे खून रोकने के लिए इस्त

[00:17:00] बुक की यानि बॉंट सिल्क की आश भर देना चाहता है, ताकि अंदर का ये जो पेन है, जो जखम है और जो उसका फ्लो है, वो रुख जाए और वो कम्प्लेटली नम्ब हो सके. बाकाईदा एक मेडिकल प्रोसेस यहां पे शायर ने बयान कर दिया है, that whatever I am feeling is actually pathological, it needs to be treated

[00:17:31] यहां शायर की असली longing express हो रही है, बहुती intense imagery के बाद, पूरे medical process के बाद, जिसके थूरू depression वो निकाल के फेक रहा है बाहर, यह आती है उसकी ultimate desire, कि खुद को दुनिया से अलग करना नहीं है मुझे, the shire wants to be a part of this world, उसके क्या struggles हैं, उनके बारे में ना सोचते हुए, just for once he wants to be a part of that beard, who is laughing.

[00:18:26] खिड़कियां ऐसे में खोल देनी चाहिए, हवा आने दीजिये, सास अपने आप आजाएगा, अगले हफते मिलते हैं, खयाल रखिये, खुदा हाफिस.