वीरभद्र और भद्रकाली

वीरभद्र और भद्रकाली

दक्ष यज्ञ में सती के देह त्याग का समाचार मिलते ही भगवान् शंकर को अत्यंत क्रोध आया। उनके इस असीमित क्रोध से प्रकट हुए महा भयंकर वीरभद्र और भद्रकाली तो उन्होंने दक्ष यज्ञ को विध्वंश करने का आदेश दिया। वीरभद्र और भद्रकाली के रौद्ररूप के सामने दक्ष यज्ञ में उपस्थित किसी भी देवता या ऋषि की एक ना चली और सभी अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। इस भगदड़ के बीच वीरभद्र ने दक्ष प्रजापति का सर धड़ से अलग कर दिया। उधर सभी देवी-देवता भगवान् शंकर की प्रार्थना करने हुए उनसे वीरभद्र और भद्रकाली को रोकने की अर्चना करने लगे। जब भगवान् शंकर का क्रोध शांत हुआ, उन्होंने अपने रौद्ररूपों को रोका और सभी घायल देवी देवताओं और ऋषिओं को ठीक कर दिया। ब्रह्मदेव के प्रार्थना करने पर उन्होंने दक्ष प्रजापति के कटे हुए सर की जगह एक बकरे का सर लगाकर उनको भी जीवित कर दिया और उनको परमब्रह्म के रूप में दर्शन दिए। दक्ष प्रजापति ने अपने यज्ञ से परमब्रह्म शिवजी को अर्घ्य देकर अपना यज्ञ संपन्न किया। Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

दक्ष यज्ञ में सती के देह त्याग का समाचार मिलते ही भगवान् शंकर को अत्यंत क्रोध आया। उनके इस असीमित क्रोध से प्रकट हुए महा भयंकर वीरभद्र और भद्रकाली तो उन्होंने दक्ष यज्ञ को विध्वंश करने का आदेश दिया। 

 

वीरभद्र और भद्रकाली के रौद्ररूप के सामने दक्ष यज्ञ में उपस्थित किसी भी देवता या ऋषि की एक ना चली और सभी अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। इस भगदड़ के बीच वीरभद्र ने दक्ष प्रजापति का सर धड़ से अलग कर दिया। 

 

उधर सभी देवी-देवता भगवान् शंकर की प्रार्थना करने हुए उनसे वीरभद्र और भद्रकाली को रोकने की अर्चना करने लगे। जब भगवान् शंकर का क्रोध शांत हुआ, उन्होंने अपने रौद्ररूपों को रोका और सभी घायल देवी देवताओं और ऋषिओं को ठीक कर दिया। 

 

ब्रह्मदेव के प्रार्थना करने पर उन्होंने दक्ष प्रजापति के कटे हुए सर की जगह एक बकरे का सर लगाकर उनको भी जीवित कर दिया और उनको परमब्रह्म के रूप में दर्शन दिए। दक्ष प्रजापति ने अपने यज्ञ से परमब्रह्म शिवजी को अर्घ्य देकर अपना यज्ञ संपन्न किया।

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