चारों धामों में से भगवान विष्णु का भोजन करने का स्थान पुरी जगन्नाथ का मंदिर है। इसीलिए इस मंदिर में भोजन का सबसे ज्यादा महत्व है। महत्व इतना कि यहाँ के भोजन को प्रसाद नहीं बल्कि महाप्रसाद कहा जाता है। एक समय पर दुनिया का सबसे बड़ा रसोई घर मानी जाने वाली पूरी मंदिर की यह पाकशाला आज भी एक लाख से अधिक भक्तों के लिए रोज खाना प्रस्तुत करती है।
भगवान विष्णु के प्रिय छप्पन प्रकार के पकवान, यहाँ एक के ऊपर एक रखकर मिटटी के बर्तनों में पकाये जाते है। सबसे आश्चर्यचकित कर देने वाली बात यह है कि, सबसे पहले ऊपर वाले बर्तन का खाना पक कर तैयार होता है और फिर एक के बाद एक बर्तन नीचे की ओर पकने लगते हैं।कहा जाता है कि ऐसा चमत्कार सिर्फ इसीलिए हो पाता है कि, यहाँ पर स्वयं महालक्ष्मी अपने प्रियतम भगवान के लिए अपने हाथों से इस खाने को पकाती हैं। दिन में चाहे कितने भी भक्त आ जाएं, यह भोजन कभी कम नहीं पड़ता। हर ओड़िया परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु का समय निकट आने पर उसे अंतिम निवाले के तौर पर यही महाप्रसाद अन्न खिलाते हैं जिसे निर्माल्य कहा जाता है।
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