दक्ष प्रजापति ने ब्रह्मा के आदेशानुसार अनेक पुत्र पैदा किये और उनको संसार का विस्तार करने का आदेश दिया। लेकिन नारद जी ने उन पुत्रों से मिलकर उनको वैराग्य का उपदेश देकर सन्यासी बना दिया।
दक्ष को नारद जी पर बड़ा क्रोध आया, परन्तु उन्होंने अपना क्रोध शांत करते हुए और पुत्र पैदा किये तथा उनको भी वही आदेश दिया। लेकिन नारद जी ने इन पुत्रों को भी वैरागी बना दिया।
इस बार दक्ष प्रजापति अपने क्रोध को शांत नहीं कर पाए और उन्होंने नारद मुनि को शाप दे दिया कि वो सदा लोक-लोकान्तरों में भटकते रहेंगे। दक्ष प्रजापति के इसी शाप के कारण नारदमुनि सदा त्रिलोकों में विचरण करते हैं और कभी एक स्थान पर स्थिर नहीं रहते।
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