एक बार चंद्र देवगुरु बृहस्पति की पत्नी तारा पर मोहित हो गए और उनको अपने साथ भगा ले गए।
देवताओं ने अपने गुरु का साथ लेते हुए चंद्र से उनकी पत्नी वापस लौटाने को कहा, परंतु दैत्यों ने चंद्र का साथ दिया और देव-दानवों के बीच एक भीषण संग्राम छिड़ गया। तारा की कामना से हुए इस युद्ध को तारकाम्यम संग्राम कहा गया।
जब ब्रह्मदेव को लगा की इस युद्ध से उनकी सम्पूर्ण सृष्टि ही नष्ट हो सकती है, तो उन्होंने दोनों के बीच मध्यस्थता करते हुए तारा को देवगुरु के पास वापस भेज दिया।
कुछ समय पश्चात तारा को एक पुत्र की प्राप्ति हुई, बुध।
बुध और इला के पुत्र पुरुरवा ने चंद्रवंश की स्थापना की। इसी वंश से आगे चलकर यदुवंश और कुरुवंश का प्रादुर्भाव हुआ।
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