भगवान परशुराम के गुरु – महादेव
जब भगवान परशुराम ने युद्धकला और अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा लेने की सोची तो उन्होंने स्वयं महादेव को अपना गुरु बनाने की सोची और उनको मनाने के लिए कठिन तपस्या की।
परशुराम जी की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उनको सभी दैवी अस्त्र-शस्त्रों और युद्धकला की शिक्षा दी और उनको अपना धनुष और फरसा दिया।
इसी फरसे को लेकर चलने के कारण उनका नाम परशुराम पड़ा।
शिवजी का धनुष भगवान परशुराम ने राजा जनक को दे दिया, जिसे भगवान राम ने सीता स्वयंवर के समय तोड़ दिया।


