नर और नारायण भगवान विष्णु के अवतार ऋषि थे। द्वापर युग में नारायण और नर ने श्रीकृष्ण और अर्जुन के रूप में अवतार लिया था।
एक बार दोनों ऋषि भाई बद्रिकाश्रम में घोर तपस्या में लीन थे।
उनकी तपस्या से इन्द्र को डर लगने लगा और उन्होंने स्वर्ग की सभी अप्सराओं को उनकी तपस्या में विघ्न डालने के उद्देश्य से भेजा।
नारायण ने इन्द्र का ऐसा कृत्य देखकर एक पुष्प को अपनी जंघा पर रखकर एक सुंदरी अप्सरा प्रकट कर दी। उस अप्सरा की सुंदरता के समक्ष इन्द्र की भेजी हुई सभी अप्सराओं की सुंदरता फीकी थी।
नारायण की जंघा जिसे उरु भी कहते हैं से जन्म लेने के कारण उस सुंदरी अप्सरा का नाम उर्वशी पड़ा।
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