अगस्त्य ऋषि और लोपामुद्रा

अगस्त्य ऋषि और लोपामुद्रा

अगस्त्य ऋषि देव-युगल मित्र-वरुण और अप्सरा उर्वशी के पुत्र थे। एक बार उन्होंने विवाह कर घर बसाने की सोची और विवाह के उद्देश्य से कान्यकुब्ज के राजा से उनकी पुत्री का हाथ माँगा। राजा ऋषि की दैवी शक्तियों से परिचित थे, इसलिए उन्होंने ऋषि को मना नहीं किया और उनका विवाह अपनी पुत्री लोपामुद्रा से करा दिया। जब ऋषि अगस्त्य ने अपनी पत्नी के साथ संबन्ध बनाने की सोची तो लोपामुद्रा ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने कहा की मैं एक राजकुमारी हूँ। पहले आप मुझे एक राजकुमारी के समान वैभवशाली जीवन दें उसके बाद ही मैं पूर्ण रूप से आपकी पत्नी बन सकूँगी। Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

 अगस्त्य ऋषि देव-युगल मित्र-वरुण और अप्सरा उर्वशी के पुत्र थे। 

एक बार उन्होंने विवाह कर घर बसाने की सोची और विवाह के उद्देश्य से कान्यकुब्ज के राजा से उनकी पुत्री का हाथ माँगा। 

राजा ऋषि की दैवी शक्तियों से परिचित थे, इसलिए उन्होंने ऋषि को मना नहीं किया और उनका विवाह अपनी पुत्री लोपामुद्रा से करा दिया। 

जब ऋषि अगस्त्य ने अपनी पत्नी के साथ संबन्ध बनाने की सोची तो लोपामुद्रा ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने कहा की मैं एक राजकुमारी हूँ। पहले आप मुझे एक राजकुमारी के समान वैभवशाली जीवन दें उसके बाद ही मैं पूर्ण रूप से आपकी पत्नी बन सकूँगी।

 

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