विशुद्धि चक्र हमारे गले के भीतर स्थित होता है। यहाँ कुंठा और कृतज्ञता, दो भावनाएँ स्थित होती हैं। जब हम ऊर्जा से परिपूर्ण होते हैं तब हममें कृतज्ञता उत्पन्न होती है, जब हममें ऊर्जा की कमी होती है तो हम कुंठित रहते हैं। इस चक्र पर ध्यान करने से हमारी ऊर्जा बढ़ती है और हममें कृतज्ञता उदय होती है।
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