प्रवेश परीक्षाओं का मूल उद्देश्य योग्य छात्रों का निष्पक्ष चयन करना है, लेकिन आज के दौर में यह उद्देश्य कहीं खो-सा गया है। एक तरफ जहाँ छात्र दिन-रात मेहनत कर देश की कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, वहीं दूसरी ओर हमें आए दिन घोटालों की खबरें सुनने को मिलती हैं। जब लगातार मेहनत के बावज़ूद भी सफलता हाथ नहीं लगती, तो छात्रों पर इसका क्या असर पड़ता है? प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन में ऊँच-नीच, कैसे हमारे देश को कमज़ोर कर सकती है? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने आपके समक्ष आ रहे हैं, हर्षिता, सृष्टि और शुभांगी।
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