सरस्वती नदी के नन्दा नाम की कथा

सरस्वती नदी के नन्दा नाम की कथा

प्राचीन काल में पृथ्वी लोक में प्रभंजन नामक एक प्रसिद्ध महाबली राजा हुआ करते थे। एक बार वो जंगल में शिकार के उद्देश्य से गए हुए थे। जंगल में घूमते हुए अचानक उनकी दृष्टि झाड़ी के पीछे एक हिरणी पर पड़ी। हिरणी को देखते ही राजा ने उस पर बाण चला दिया। बाण के प्रहार से आहत हुई हिरणी ने जब हाथ में धनुष-बाण लिए राजा प्रभंजन को देखा तो बोली, “अरे मूढ़! यह तूने क्या किया? मैं यहाँ सर नीचे किए हुए, निर्भयता से अपने बालक को दूध पिला रही थी और ऐसी अवस्था में इस वन में आकर तूने मुझ निरपराध हिरणी को अपने बाणों का निशाना बनाया है। तूने यह पाप कर्म किया है। मैं तुझे श्राप देती हूँ की तू इस वन में कच्चा मांस खाने वाले जीव के रूप में जीवन व्यतीत करे।“ Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

प्राचीन काल में पृथ्वी लोक में प्रभंजन नामक एक प्रसिद्ध महाबली राजा हुआ करते थे। एक बार वो जंगल में शिकार के उद्देश्य से गए हुए थे। जंगल में घूमते हुए अचानक उनकी दृष्टि झाड़ी के पीछे एक हिरणी पर पड़ी। हिरणी को देखते ही राजा ने उस पर बाण चला दिया। 

बाण के प्रहार से आहत हुई हिरणी ने जब हाथ में धनुष-बाण लिए राजा प्रभंजन को देखा तो बोली, “अरे मूढ़! यह तूने क्या किया? मैं यहाँ सर नीचे किए हुए, निर्भयता से अपने बालक को दूध पिला रही थी और ऐसी अवस्था में इस वन में आकर तूने मुझ निरपराध हिरणी को अपने बाणों का निशाना बनाया है। तूने यह पाप कर्म किया है। मैं तुझे श्राप देती हूँ की तू इस वन में कच्चा मांस खाने वाले जीव के रूप में जीवन व्यतीत करे।“

 

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