इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों तक चंदा पहुंचता है. इस पर काफी आरोप भी लगाए जाते हैं. आरटीआई कार्यकर्ता कन्हैया कुमार की एक आरटीआई के जवाब में पता चला कि सरकार ने आखिरी बार 2019 में चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) प्रिंट करवाया था. तब नासिक में इंडिया सिक्योरिटी प्रेस में अलग-अलग प्राइस के 11,400 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड छपवाये थे. इसके बाद अब एक अगस्त से 29 अक्टूबर के बीच 10000 इलेक्टोरल बॉन्ड प्रिंट कराए गए जिसमें से एक अक्टूबर से दस अक्टूबर तक हिमाचल प्रदेश और गुजरात चुनावों के लिए इनको बेचा गया.
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