कुछ दिन पहले एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम द्वारा भेजी गई सिफारिशों को मंजूरी नहीं दिए जाने पर चिंता जताई है वही अब कानून मंत्रालय ने एक ऐसी रिपोर्ट पेश की है जिसके बाद सरकार का पलड़ा भारी पड़ता हो दिखाई दे रहा है. इस रिपोर्ट के सामने आ जाने के बाद कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या वाकई हमारे देश को ऐसे कॉलेजियम सिस्टम की जरूरत है जिसके चलते हमारे देश में नाम मात्र के पिछड़े समुदाय से आने वाले लोग जज बन पा रहे हैं.
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