JNU | Short Review | Sajeev Sarathie
Film Ki Baat 2.0June 26, 202400:01:26

JNU | Short Review | Sajeev Sarathie

जे एन यू यानी जहांगीर नेशनल यूनिवर्सिटी अपने नाम से ही साबित कर देती है कि किस उद्देश्य के साथ इसे बनाया गया है। अब क्रिंज होगी ये तो पता था, पर सिर्फ देखने के लिए देखी कि आखिर किस हद तक क्रींज हो सकती है, मैने किसी तरह इसे झेल ही ली। यूनिवर्सिटी में एक बड़ा स्टेच्यू लगा है जिन्ना और नेहरू जैसे दिखने वाले दो लोगों का जो विश्व विद्यालय की गतिविधियों पर नजर रखते है। यूनिवर्सिटी में सब लाल सलाम बोलते है मगर हीरो सिद्धार्थ बोडके आकार जय श्री राम बोलना शुरू करता है। उर्वशी रौतेला बस एटिट्यूड लेकर चलती नजर आती है। एक लिबरल लड़की है जो किसी भी लड़के के साथ हुक अप कर लेती है। कालेज की प्रबंधन कमेटी से लेकर स्टूडेंट्स तक सब या तो वाम पंथी हैं या मुसलमान है जो सिर्फ और सिर्फ देश विरोधी काम करते हैं। एक हिंदू नेता भी है जो कन्हैया कुमार को इंगित करता है और उन्हें बहुत ही बुरे फ्रेम में प्रोजेक्ट करता है। और इन सब के बीच मोदी जी का उदय हो रहा है नेशनल पॉलिटिक्स में जिसके बाद हवा बदलने लगती है। एक जगह कॉलेज की एक वामपंथी प्रोफेसर कहती है कि अब सेंटर में हमारी सरकार नहीं रही। एक न्यूज एंकर कविश कुमार भी हैं जो इस यूनिवर्सिटी के फेवर में रिपोर्टिंग करता है। पियूष मिश्रा गेस्ट रोल में आते हैं जो कभी वामपंथी यानी फिल्म के हिसाब से देश द्रोही थे मगर अब घर वापसी कर चुके हैं और मुंह खोलते ही गलियां बकते हैं। रवि किशन और विजय राज़ कथित देश द्रोहियों को हवालात में पीटने का चरम सुख उठते हुए दिखते हैं। मतलब कि कुछ भी, जी हां कुछ भी अंट शंट दिखाने से निर्देशक ने परहेज नहीं किया है। हो सकता है एक खास तरह की सोच रखने वाले जाकर इस कचरे को देखें पर मैं तो यही कहूंगा कि इस कूड़ेदान जैसी फिल्म से दूर ही रहें। #jnumovie #JNU #RaviKishan #VijayRaaz #PiyushMishra #cringe #sajeevsarathie Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

जे एन यू यानी जहांगीर नेशनल यूनिवर्सिटी अपने नाम से ही साबित कर देती है कि किस उद्देश्य के साथ इसे बनाया गया है। अब क्रिंज होगी ये तो पता था, पर सिर्फ देखने के लिए देखी कि आखिर किस हद तक क्रींज हो सकती है, मैने किसी तरह इसे झेल ही ली। यूनिवर्सिटी में एक बड़ा स्टेच्यू लगा है जिन्ना और नेहरू जैसे दिखने वाले दो लोगों का जो विश्व विद्यालय की गतिविधियों पर नजर रखते है। यूनिवर्सिटी में सब लाल सलाम बोलते है मगर हीरो सिद्धार्थ बोडके आकार जय श्री राम बोलना शुरू करता है। उर्वशी रौतेला बस एटिट्यूड लेकर चलती नजर आती है। एक लिबरल लड़की है जो किसी भी लड़के के साथ हुक अप कर लेती है। कालेज की प्रबंधन कमेटी से लेकर स्टूडेंट्स तक सब या तो वाम पंथी हैं या मुसलमान है जो सिर्फ और सिर्फ देश विरोधी काम करते हैं। एक हिंदू नेता भी है जो कन्हैया कुमार को इंगित करता है और उन्हें बहुत ही बुरे फ्रेम में प्रोजेक्ट करता है।

और इन सब के बीच मोदी जी का उदय हो रहा है नेशनल पॉलिटिक्स में जिसके बाद हवा बदलने लगती है। एक जगह कॉलेज की एक वामपंथी प्रोफेसर कहती है कि अब सेंटर में हमारी सरकार नहीं रही। एक न्यूज एंकर कविश कुमार भी हैं जो इस यूनिवर्सिटी के फेवर में रिपोर्टिंग करता है। पियूष मिश्रा गेस्ट रोल में आते हैं जो कभी वामपंथी यानी फिल्म के हिसाब से देश द्रोही थे मगर अब घर वापसी कर चुके हैं और मुंह खोलते ही गलियां बकते हैं। रवि किशन और विजय राज़ कथित देश द्रोहियों को हवालात में पीटने का चरम सुख उठते हुए दिखते हैं।

मतलब कि कुछ भी, जी हां कुछ भी अंट शंट दिखाने से निर्देशक ने परहेज नहीं किया है। हो सकता है एक खास तरह की सोच रखने वाले जाकर इस कचरे को देखें पर मैं तो यही कहूंगा कि इस कूड़ेदान जैसी फिल्म से दूर ही रहें।

#jnumovie #JNU #RaviKishan #VijayRaaz #PiyushMishra #cringe #sajeevsarathie

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