BGM यानी पार्श्व संगीत को एक ज़माने में फिल्म का एक अहम घटक नहीं माना जाता था। हालांकि कुछ फिल्में जैसे शोले, दीवार, डॉन, हुकूमत आदि के पार्श्व संगीत को काफी सराहना मिली थी। पर इसके लिए डेडीकेटेड संगीतकार को अपॉइंट करने की प्रथा काफी हद तक नई है। आज के फिल्म मेकर पार्श्व संगीत की अहमियत को बखूबी समझने लगे हैं। अंकित और संचित बल्हारा ने इस विषय को लेकर एक अहम बात कही कि अगर दर्शक फिल्म देखते हुए सीन में डूब जाता है और पार्श्व में बज रहे संगीत की तरफ उसका ध्यान नहीं जाता है तो ये संगीतकार की सफलता मानी जानी चाहिए, क्योंकि पार्श्व संगीत सब कॉन्शस में आपको उस दृश्य के इमोशंस से जोड़ने में कामियाब रहा है।
सुनिए बातचीत का ये अंश।
वैसे इस दृष्टि से फिल्म "रंग दे बसंती" का पार्श्व संगीत मेरे लिए एक सब कॉन्शस इफेक्ट रहा जिसकी सुंदरता को मैने दूसरी बार फिल्म को देखते हुए महसूस किया। क्या आप के साथ हुआ है कभी ऐसा ?
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Ankit Balhara
Sanchit Balhara
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