Aamis | Short Review | Sajeev Sarathie
Film Ki Baat 2.0June 01, 202400:01:26

Aamis | Short Review | Sajeev Sarathie

हर इंसान के भीतर होते हैं कुछ अंधेरे बंद कमरे, जिन पर अकल मोटे मोटे ताले लटका कर दबा छुपा कर रखती हैं क्योंकि इंसान की अकल नहीं जानती कि इन अधेरों कमरों से कौन सा शैतान और कौन सा देवता निकल आए जिसे नियंत्रित करना इंसान की सामान्य अकल के लिए मुश्किल हो जाए। पर प्रेम और नफरत दो ऐसे एक्सट्रीम भाव होते हैं जो हदें पार कर जाए तो इनकी शिद्दत से इन बंद कमरों का कोई न कोई ताला टूट भी जाता है। आज मैं जिस फिल्म का जिक्र कर रहा हूं वो करीब 5 साल पुरानी है पर मुझे लगता है इस विषय पर बनी शायद देश की पहली और अब तक तो आखिरी फिल्म होगी ये। आमिस का विषय क्या है वो बता दूंगा तो आपका सस्पेंस खत्म हो जाएगा, पर जो भी है, बहुत विचलित करने वाला, और घिनौना है, और ऐसे विषयों को छूने की हिम्मत कम ही निर्देशक कर पाते हैं। मूल रूप से असमी भाषा में बनी इस फिल्म में दिखे हैं लिमा दास और अर्घदीप बरुआ और दोनों ही कलाकारों ने कमाल का काम किया है विशेषकर लीमा ने। एक दृश्य में जब नायक विभिन्न पशुओं का जिक्र करता है तो एक घरेलू पार्टी में बैठी नायिका के एक्सप्रेशन देखने लायक हैं शायद यही वो पल रहा होगा जब नायिका के भीतर का अंधेरा कमरा खुला होगा और वो दैत्य बाहर निकला होगा। फिल्म सोनी लिव पर हिंदी में भी उपलब्ध है हालांकि मैंने मूल असमी में देखी और ये मेरी लाइफ की पहली असमी फिल्म है। पर मैं ये फिल्म आपको रिकमेंड नहीं करूंगा। क्योंकि ऐसी फिल्में देखने के लिए बहुत ही मजबूत दिल जरूरी है। ये मनुष्य के अंदर के जानवर का एक ऐसा डरावना चेहरा आपके सामने रखेगा जो 100 हॉरर फिल्म से भी ज्यादा खौफ आपके अंदर जगा देगा। अपने रिस्क पर देखना चाहें तो देख सकते हैं। #aamis #assamese #LimaDas #arghdeepbarua #SonyLIV #sajeevsarathie https://www.instagram.com/reel/C7rHihVPJ5F/?igsh=cDl3cWt5aDBydDll Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices

हर इंसान के भीतर होते हैं कुछ अंधेरे बंद कमरे, जिन पर अकल मोटे मोटे ताले लटका कर दबा छुपा कर रखती हैं क्योंकि इंसान की अकल नहीं जानती कि इन अधेरों कमरों से कौन सा शैतान और कौन सा देवता निकल आए जिसे नियंत्रित करना इंसान की सामान्य अकल के लिए मुश्किल हो जाए। पर प्रेम और नफरत दो ऐसे एक्सट्रीम भाव होते हैं जो हदें पार कर जाए तो इनकी शिद्दत से इन बंद कमरों का कोई न कोई ताला टूट भी जाता है। 

 

आज मैं जिस फिल्म का जिक्र कर रहा हूं वो करीब 5 साल पुरानी है पर मुझे लगता है इस विषय पर बनी शायद देश की पहली और अब तक तो आखिरी फिल्म होगी ये। आमिस का विषय क्या है वो बता दूंगा तो आपका सस्पेंस खत्म हो जाएगा, पर जो भी है, बहुत विचलित करने वाला, और घिनौना है, और ऐसे विषयों को छूने की हिम्मत कम ही निर्देशक कर पाते हैं।

 

मूल रूप से असमी भाषा में बनी इस फिल्म में दिखे हैं लिमा दास और अर्घदीप बरुआ और दोनों ही कलाकारों ने कमाल का काम किया है विशेषकर लीमा ने। एक दृश्य में जब नायक विभिन्न पशुओं का जिक्र करता है तो एक घरेलू पार्टी में बैठी नायिका के एक्सप्रेशन देखने लायक हैं शायद यही वो पल रहा होगा जब नायिका के भीतर का अंधेरा कमरा खुला होगा और वो दैत्य बाहर निकला होगा।

 

फिल्म सोनी लिव पर हिंदी में भी उपलब्ध है हालांकि मैंने मूल असमी में देखी और ये मेरी लाइफ की पहली असमी फिल्म है। पर मैं ये फिल्म आपको रिकमेंड नहीं करूंगा। क्योंकि ऐसी फिल्में देखने के लिए बहुत ही मजबूत दिल जरूरी है। ये मनुष्य के अंदर के जानवर का एक ऐसा डरावना चेहरा आपके सामने रखेगा जो 100 हॉरर फिल्म से भी ज्यादा खौफ आपके अंदर जगा देगा। अपने रिस्क पर देखना चाहें तो देख सकते हैं।

 

#aamis #assamese #LimaDas #arghdeepbarua #SonyLIV #sajeevsarathie

https://www.instagram.com/reel/C7rHihVPJ5F/?igsh=cDl3cWt5aDBydDll

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