इस पैक्ट की दूसरी ख़ास बात है 'तालिबान कमिटमेंट' - ये कमिटमेंट कहता है कि 'तालिबान अपने किसी भी सदस्य, या किसी दूसरे व्यक्ति या संगठन को, जिनमें अल-क़ायदा भी है, को अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं बनने देगा, और इस के लिए अफ़ग़निस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल नहीं करने देगा.
लेकिन क्या वाकई इस समझौते से शांति की उम्मीद की जा सकती है? और इस समझौते का भारत के लिए क्या मतलब है? इस सब के बारे में आज बिग स्टोरी में बात करेंगे तक्षशिला रिसर्च इंस्टिट्यूट के फेलो, प्रणय कोटस्थाने से.
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