रामनाथ गोयनका अवॉर्ड बताते हैं असली जर्नलिज्म क्या है
Big Story HindiJanuary 21, 202000:19:25

रामनाथ गोयनका अवॉर्ड बताते हैं असली जर्नलिज्म क्या है

इस साल दिए गए रामनाथ गोयनका अवार्ड्स ऐसी न्यूज रिपोर्ट्स को मिले हैं जिसमें जमीन से जुड़ी हुई कहानियां हैं. इन कहानियों के जरिये ये पता लगा कि हिंसा से कई घर कैसे तबाह हो जाते हैं. चुनाव के नाम पर करप्शन किस धड़ल्ले से किया जाता है और मजहब के नाम पर, खाने-पीने पर और सिर्फ शक के बिनाह पर लोगों को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया जाता है. हिंदी पत्रकारिता में ही क्विंट के शादाब मोइज़ी को उनकी शॉर्ट डाक्युमेंट्री के लिए अवॉर्ड मिला है. शादाब ने मुज़फ्फरनगर दंगों के पीड़ितों के परिवारों की कहानी बताई, कि कैसे 2013 में हुए दंगों के पांच साल बाद भी पीड़ित मुजफ्फरनगर में अपने गांव नहीं जाना चाहते. कैसे वो आज भी अपनों को तलाश रहे हैं. पुलिस उन्हें आज भी लापता बता रही है. द क्विंट की पूनम अग्रवाल को भी इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए अवॉर्ड मिला है. और अस्मिता नंदी और मेघनाद बोस बोस की डाक्यूमेंट्री 'लिंचीस्तान' को भी अवार्ड मिला है. रामनाथ गोयनका आवर्ड से सम्मानित इन पत्रकारों से आज बिग स्टोरी में बात करेंगे . Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices
इस साल दिए गए रामनाथ गोयनका अवार्ड्स ऐसी न्यूज रिपोर्ट्स को मिले हैं जिसमें जमीन से जुड़ी हुई कहानियां हैं. इन कहानियों के जरिये ये पता लगा कि हिंसा से कई घर कैसे तबाह हो जाते हैं. चुनाव के नाम पर करप्शन किस धड़ल्ले से किया जाता है और मजहब के नाम पर, खाने-पीने पर और सिर्फ शक के बिनाह पर लोगों को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया जाता है.
हिंदी पत्रकारिता में ही क्विंट के शादाब मोइज़ी को उनकी शॉर्ट डाक्युमेंट्री के लिए अवॉर्ड मिला है. शादाब ने मुज़फ्फरनगर दंगों के पीड़ितों के परिवारों की कहानी बताई, कि कैसे 2013 में हुए दंगों के पांच साल बाद भी पीड़ित मुजफ्फरनगर में अपने गांव नहीं जाना चाहते. कैसे वो आज भी अपनों को तलाश रहे हैं. पुलिस उन्हें आज भी लापता बता रही है.
द क्विंट की पूनम अग्रवाल को भी इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए अवॉर्ड मिला है. और अस्मिता नंदी और मेघनाद बोस बोस की डाक्यूमेंट्री 'लिंचीस्तान' को भी अवार्ड मिला है. रामनाथ गोयनका आवर्ड से सम्मानित इन पत्रकारों से आज बिग स्टोरी में बात करेंगे .

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