पॉडकास्ट | वो बेबस बच्चा जो गुम है, उसके गुनहगार हम सब हैं
Big Story HindiJanuary 09, 202000:14:01

पॉडकास्ट | वो बेबस बच्चा जो गुम है, उसके गुनहगार हम सब हैं

मुंबई के 16 साल के तरुण गुप्ता को लापता हुए तीन महीने से ऊपर हो गए हैं. तरुण ऑटिज्म से पीड़ित है, और उसे देखने-बोलने में भी परेशानी होती है. पिछले साल 1 अक्टूबर को, सुबह करीब 10:30 बजे तरुण एक चुनावी रैली में शामिल होकर नाचने लगा और नाचते-नाचते सीएसटी स्टेशन पहुंच गया. जब वो घर नहीं पहुंचा, तो परिवार ने ढूंढना शुरू किया. उसी रात, तरुण के पेरेंट्स ने पुलिस में गुमशुदगी की एफआईआर दर्ज की. सीसीटीवी फुटेज और पैसेंजर्स से बात करने के बाद जांच में सामने आया कि तरुण 1 अक्टूबर को सीएसटी स्टेशन पहुंचा था. इसके बाद, माना जा रहा है कि वो ट्रेन लेकर नवी मुंबई में पनवेल पहुंचा. वो पनवेल स्टेशन पर दो दिन रहा, यानी 1 और 2 अक्टूबर. 2 अक्टूबर को जब उसने एक आरपीएफ जवान से मदद मांगी, तो उसे जबरन तुरारी एक्सप्रेस के लगेज कंपार्टमेंट में डाल दिया गया. इस केस से डिसेबिलिटी को लेकर भारत में जो लापरवाही है लोगो के भीतर, लापरवाहि जो इंफ्रास्ट्रक्चर में झलकती है, सरकारी पॉलिसीस में जिस के असर दिखते हैं, वो दिखती है. आज हम इसी पे बात करेंगे कि आखिर डिसेबिलिटी को लेकर हम बतौर एक देश इतने असंवेदनशील क्यों हैं? सुपरवाइजिंग एडिटर : मुकेश बौड़ाई Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices
मुंबई के 16 साल के तरुण गुप्ता को लापता हुए तीन महीने से ऊपर हो गए हैं. तरुण ऑटिज्म से पीड़ित है, और उसे देखने-बोलने में भी परेशानी होती है. पिछले साल 1 अक्टूबर को, सुबह करीब 10:30 बजे तरुण एक चुनावी रैली में शामिल होकर नाचने लगा और नाचते-नाचते सीएसटी स्टेशन पहुंच गया. जब वो घर नहीं पहुंचा, तो परिवार ने ढूंढना शुरू किया. उसी रात, तरुण के पेरेंट्स ने पुलिस में गुमशुदगी की एफआईआर दर्ज की. सीसीटीवी फुटेज और पैसेंजर्स से बात करने के बाद जांच में सामने आया कि तरुण 1 अक्टूबर को सीएसटी स्टेशन पहुंचा था. इसके बाद, माना जा रहा है कि वो ट्रेन लेकर नवी मुंबई में पनवेल पहुंचा. वो पनवेल स्टेशन पर दो दिन रहा, यानी 1 और 2 अक्टूबर. 2 अक्टूबर को जब उसने एक आरपीएफ जवान से मदद मांगी, तो उसे जबरन तुरारी एक्सप्रेस के लगेज कंपार्टमेंट में डाल दिया गया.
इस केस से डिसेबिलिटी को लेकर भारत में जो लापरवाही है लोगो के भीतर, लापरवाहि जो इंफ्रास्ट्रक्चर में झलकती है, सरकारी पॉलिसीस में जिस के असर दिखते हैं, वो दिखती है. आज हम इसी पे बात करेंगे कि आखिर डिसेबिलिटी को लेकर हम बतौर एक देश इतने असंवेदनशील क्यों हैं? सुपरवाइजिंग एडिटर : मुकेश बौड़ाई

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