कैसे सियासत में दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया. दूसरी तरफ भाई के खिलाफ भाई खड़ा हुआ. सत्ता की चाह ने तमाम पार्टियों को कैसे-कैसे खेल कराए. और जिस जनता के जनादेश के दम पर ये हो रहा है वो इस पूरे खेल में गायब है. अब उम्मीद बची है तो सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से.
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